भुवनेश्वर: श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में ‘असमय’ नेत्रोत्सव और रथ यात्रा के प्रस्तावित आयोजन पर कड़ी आपत्ति जताई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़े पवित्र उत्सवों का आयोजन केवल पुरी श्रीजगन्नाथ मंदिर में प्रचलित परंपराओं, शास्त्रीय विधानों तथा निर्धारित धार्मिक पंचांग के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
एसजेटीए ने कहा है कि इन पवित्र अनुष्ठानों का समय प्राचीन परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं द्वारा निर्धारित है, जिसमें किसी प्रकार का परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि निर्धारित परंपरा से हटकर किए जाने वाले किसी भी आयोजन से देश-विदेश में फैले करोड़ों जगन्नाथ भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।
यह विवाद तब सामने आया जब मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी आई कि हापुड़ स्थित एक स्थानीय संगठन, ‘भगवान श्रीजगन्नाथ रथ यात्रा सेवा समिति’, वर्ष 2026 में 13 जून को नेत्रोत्सव तथा 14 जून को रथ यात्रा आयोजित करने की योजना बना रहा है। एसजेटीए ने इस प्रस्तावित कार्यक्रम को मंदिर परंपराओं के विपरीत बताया है। पुरी श्रीमंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक डॉ. अरबिंद कुमार पाढ़ी, आईएएस ने हापुड़ की जिलाधिकारी एवं कलेक्टर सुश्री कविता मीणा को औपचारिक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने अनुरोध किया है कि जिला प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करते हुए ऐसे किसी भी आयोजन को रोका जाए, जो निर्धारित धार्मिक कैलेंडर और शास्त्रीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

एसजेटीए ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि पुरी जगन्नाथ मंदिर की परंपराओं के अनुसार वर्ष 2026 में नेट्रोत्सव 14 जुलाई को और विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा 16 जुलाई को आयोजित की जाएगी। प्रशासन ने कहा कि ये तिथियां सदियों पुरानी धार्मिक गणनाओं, अनुष्ठानों और शास्त्रीय विधानों के आधार पर निर्धारित की गई हैं। मुख्य प्रशासक ने यह भी उल्लेख किया कि श्रीजगन्नाथ मंदिर की प्रबंधन समिति, जिसकी अध्यक्षता पुरी के गजपति महाराजा करते हैं, पहले भी कई अवसरों पर यह स्पष्ट कर चुकी है कि रथ यात्रा एवं संबंधित अनुष्ठानों का आयोजन केवल निर्धारित तिथियों पर ही किया जाना चाहिए।
समिति द्वारा इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव भी पारित किए गए हैं, जिनमें समय से पहले या असंगत तिथियों पर आयोजन का विरोध किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, निर्धारित तिथियों से पहले इन धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन करने से न केवल भक्तों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, बल्कि इन पवित्र परंपराओं की गरिमा और प्रामाणिकता पर भी प्रश्न उठ सकता है। पत्र में डॉ. पाढ़ी ने लिखा, “उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए आपसे अनुरोध है कि कृपया आवश्यक कदम उठाते हुए भगवान श्रीजगन्नाथ रथ यात्रा सेवा समिति, हापुड़ को निर्धारित तिथियों के अलावा नेत्रोत्सव और रथ यात्रा आयोजित करने से रोका जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी धार्मिक अनुष्ठान पुरी श्रीजगन्नाथ मंदिर की परंपराओं और शास्त्रीय विधानों के अनुसार ही संपन्न हों।” एसजेटीए ने इस मामले में जिला प्रशासन से त्वरित और उचित कार्रवाई की अपेक्षा जताई है, ताकि धार्मिक परंपराओं की पवित्रता और व्यापक श्रद्धालु समुदाय की भावनाओं की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।












