पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के साथ ही मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी लगातार बड़े कदम उठा रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने नेशनल हाइवे के सात हिस्सों को केंद्र सरकार के कंट्रोल में देने का फैसला कर लिया है। इससे NHAI और NHIDCL को इन इलाकों में सड़कें बनाने और सुधारने का काम आसानी से शुरू करने का रास्ता खुल गया है। ये हिस्से पहले राज्य के PWD के नेशनल हाइवे विंग के अधीन थे। केंद्र की तरफ से लंबे समय से इनको सौंपने की बात चल रही थी, लेकिन करीब एक साल तक ये अटके रहे।
किन सड़कों को केंद्र को सौंपा गया?
NH-312 का 329.6 किलोमीटर लंबा हिस्सा – जंगीपुर, उमरपुर, कृष्णानगर, बनगांव, बशीरहाट से होते हुए भारत-बांग्लादेश सीमा पर घोजाडांगा तक।
NH-31 का बिहार-बंगाल बॉर्डर से गाजोल तक का हिस्सा।
NH-33 का फरक्का तक का हिस्सा।
NH-10 का पश्चिम बंगाल-सिक्किम बॉर्डर रूट – सेवोक आर्मी कैंटोनमेंट, कोरोनेशन ब्रिज, कलिम्पोंग।
हासिमारा-जयगांव खंड – भारत-भूटान बॉर्डर तक।
बारादिघी-मैनागुड़ी-चांगराबांधा रूट – बांग्लादेश बॉर्डर तक।
सिलीगुड़ी-कर्सियांग-दार्जिलिंग हिल रोड।
इन सड़कों के सुधार से मालदा, मुर्शिदाबाद के रास्ते बिहार-बंगाल के बीच की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों में भी बांग्लादेश सीमा तक आवाजाही आसान हो जाएगी।
चिकन नेक या सिलीगुड़ी कॉरिडोर
अहम बात ये है कि इन सात में से पांच हिस्से चिकन नेक कॉरिडोर यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर से गुजरते हैं। यह कुल करीब 60 किलोमीटर लंबा इलाका है, जिसका सबसे संकरा हिस्सा सिर्फ 20-22 किलोमीटर चौड़ा है। यह क्षेत्र भारत को नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से जोड़ता है। सिक्किम के आगे चीन (तिब्बत) भी है।
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राष्ट्रीय सुरक्षा की नजर से यह जगह बहुत अहम मानी जाती है। सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से यहां सड़कों को चौड़ा करने और मजबूत बनाने की बात करते रहे हैं। सिक्किम की पहाड़ी सड़कों पर हर साल भूस्खलन होता है, जिससे भी जरूरत बढ़ी है। 2017 के डोकलाम विवाद की याद भी इस इलाके की संवेदनशीलता को दिखाती है।
क्यों हुआ यह फैसला?
पिछली TMC सरकार के समय इन कामों में देरी होती रही। नई BJP सरकार के आने के बाद यह फैसला जल्दी लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि अब हाइवे विस्तार और मरम्मत का काम तेजी से हो सकेगा। इससे डिफेंस लॉजिस्टिक्स मजबूत होंगे, व्यापार और पर्यटन बढ़ेगा, और पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ाव बेहतर होगा। कुछ रिपोर्ट्स में सुरंग बनाने की योजनाओं की भी बात कही गई है।
सीमा सुरक्षा के लिए है आवश्यक
बांग्लादेश में हाल के सत्ता परिवर्तन और कट्टरपंथी ताकतों के बढ़ते प्रभाव के बाद इस कॉरिडोर को लेकर चर्चाओं में तेजी आई है। मोहम्मद यूनुस की सरकार के दौरान आसपास चीनी गतिविधियों के संकेत भी आए। ऐसे में भारत के लिए इस इलाके की सुरक्षा और ज्यादा जरूरी हो गई है। यह फैसला मुख्य रूप से सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी देने और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

















