उत्तर प्रदेश में अगले साल के शुरुआत में विधानसभा का चुनाव है। उत्तर प्रदेश में सभी दलों की अपनी-अपनी प्राथमिकता है। जहाँ भाजपा लगातार तीसरी बार 2022 से बड़े और 2017 के चुनाव के जैसा बहुमत प्राप्त करने के मकसद से चुनावी मैदान में उतरेगी, वहीं समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव के नेतृत्व में लगातार दो बार से विपक्षी दल का तमगा हटाकर अपने को सत्ताधारी दल बनाने के लिए मैदान में उतरेगी। लेकिन इन दोनों दलों के अलावा भी दो महत्वपूर्ण दल कांग्रेस पार्टी और बहुजन समाज पार्टी हैं, जिन पर सबकी नजर होगी और ये दोनों दल केवल भाजपा और सपा को कमजोर या मजबूत करने के लिए चुनावी मैदान में उतरेंगे।
2009 से 2022 तक कांग्रेस का गिरता जनाधार: अमेठी-रायबरेली का वो कड़वा सच
2009 के लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में 22 सीट जीतकर सबसे बड़ा दल बनी थी। 2009 के प्रदर्शन के आधार पर कांग्रेस पार्टी 2012 के विधानसभा के चुनाव में बड़ी भूमिका की तलाश में थी, मगर अरमानों पर पानी फिर गया और पार्टी महज 28 सीट ही जीत सकी थी। उसके बाद कांग्रेस दिनोदिन राज्य में अपना जनाधार खोती गई और 2019 के लोकसभा के चुनाव में राहुल गांधी अमेठी से चुनाव हार गए। इसके बाद 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी और रायबरेली लोकसभा सीटों के अंतर्गत आने वाली 10 विधानसभा सीटों में सात पर अपनी जमानत गंवा दी थी। कांग्रेस पार्टी और सपा को 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए गठबंधन करना पड़ा।
अमेठी और रायबरेली लोकसभा सीटों पर 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन
| लोस सीट | विधानसभा | वोट | मतदाता | कुल मतदाता | % वोट |
|---|---|---|---|---|---|
| अमेठी | 178 – तिलोई | 21978 | 204940 | 351462 | 10.72 |
| 181 – सलोन | 11439 | 200323 | 349294 | 5.71 | |
| 184 – जगदीशपुर | 66491 | 203268 | 378415 | 32.71 | |
| 185 – गौरीगंज | 28964 | 202856 | 350093 | 14.28 | |
| 186 – अमेठी | 14080 | 189864 | 349837 | 7.42 | |
| कुल | 142952 | 1001251 | 1779101 | 14.28 | |
| रायबरेली | 177 – बछरावां | 56835 | 209512 | 326005 | 27.13 |
| 179 – हरचंदपुर | 16230 | 201651 | 319603 | 8.05 | |
| 180 – रायबरेली | 14954 | 230100 | 366267 | 6.5 | |
| 182 – सरेनी | 42702 | 216700 | 371469 | 19.71 | |
| 183 – ऊंचाहार | 9985 | 212030 | 339043 | 4.71 | |
| कुल | 140706 | 1069993 | 1722387 | 13.15 |
लोकसभा के बाद कांग्रेस की रणनीति में बदलाव
लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस लगातार दो लोकसभा के बाद विपक्ष के नेता की भूमिका प्राप्त करने में सफल हुई थी और उसके बाद कांग्रेस की नजर अब सभी क्षेत्रीय दलों को समाप्त करके खुद को उनकी जगह मजबूत करने पर टिक गई है। इस कड़ी में उसने दिल्ली में आम आदमी पार्टी और उसके नेता अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक सफाया किया। 2025 में आप दिल्ली विधानसभा का चुनाव हार गई और केजरीवाल अपनी सीट नई दिल्ली सीट पर हार गए। केजरीवाल, जिन्होंने 2013 में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को इस सीट पर 54 प्रतिशत मत प्राप्त करके हराया था, उसी सीट पर उनकी हार हुई और इससे सबसे खुश कांग्रेस पार्टी हुई थी।
केजरीवाल और ममता बनर्जी के बाद अब अखिलेश यादव निशाने पर क्यों?
केजरीवाल के बाद कांग्रेस पार्टी के निशाने पर ममता बनर्जी थीं। ममता बनर्जी सबसे ताकतवर क्षेत्रीय नेता मानी जाती थीं और कांग्रेस को भय था कि अगर वे 2026 में पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव जीत गईं, तो 2029 में भाजपा विरोध में सभी दल उन्हें अपना नेता चुनेंगे। अतः कांग्रेस पार्टी ने अपनी निगाह ममता बनर्जी को चुनाव हराने पर ही टिका दी और वाम दलों या किसी भी अन्य दल के साथ कोई गठबंधन नहीं किया। कांग्रेस को पता था कि भाजपा इस बार ममता बनर्जी को चुनाव हराने में सक्षम है और कांग्रेस ने दूर से खुद को मजबूत करने का प्रयास किया। कांग्रेस पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो सीट जीतने में सफल हुई, जबकि पिछले विधानसभा में पार्टी का कोई भी प्रतिनिधि नहीं था।
2027 में सपा बनाम कांग्रेस: क्या गठबंधन टूटना ही कांग्रेस की असली रणनीति है?
अब कांग्रेस पार्टी के निशाने पर 2027 में अखिलेश यादव हैं। अखिलेश यादव की सपा लोकसभा में 37 सीटों के साथ कांग्रेस पार्टी के बाद तीसरा सबसे बड़ा दल है। कांग्रेस इस तथ्य से अवगत है कि जब तक उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव मजबूत रहेंगे, तब तक वह राज्य में कमजोर ही रहेगी। अतः वह खुद को मजबूत करने के लिए सपा को इस बार के विधानसभा के चुनाव में केजरीवाल और ममता बनर्जी की तरह ही हराने में अपनी भूमिका तलाश करेगी।
अजय राय का बड़ा बयान: सभी 403 सीटों पर बूथ स्तर पर तैयारी
कांग्रेस ने इस प्रकार का क्रियाकलाप दिखाना शुरू भी कर दिया है और उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष अजय राय ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पार्टी सभी 403 विधानसभा सीटों पर बूथ लेवल पर अपने संगठन को मजबूत कर रही है। सपा और कांग्रेस गठबंधन में बराबर के दल हैं। अजय राय का कथन सपा को चुनौती के साथ ही खतरे की घंटी है। कांग्रेस 2024 के लोकसभा के चुनाव में 39 सीटों पर प्रथम पायदान पर आई थी और इस बार वह 100 से अधिक सीटों की मांग सपा से करेगी।
गठबंधन टूटने की संभावना और राजनीतिक प्रभाव
कांग्रेस का पूरा प्रयास होगा कि सपा उससे संबंध तोड़ ले, जिससे वह मुस्लिम वर्ग में सपा के खिलाफ माहौल बनाए कि सपा भाजपा को हराने में गंभीर नहीं है। कांग्रेस पार्टी के पास वर्तमान विधानसभा में सिर्फ दो विधायक हैं और उसे खोने के लिए कुछ भी बड़ा नहीं है, मगर सपा अगर चुनाव हार जाती है तो आप की तरह सपा का भी विखंडन शुरू हो जाएगा। इसका अंतिम लाभ कांग्रेस पार्टी को मिलेगा।












