बंगाल में बड़ा प्रशासनिक भूचाल: ममता के करीबी IPS शांतनु बिस्वास बाहर, खुल सकती हैं पुरानी फाइलें
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बंगाल में बड़ा प्रशासनिक भूचाल: ममता के करीबी IPS शांतनु बिस्वास बाहर, खुल सकती हैं पुरानी फाइलें

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर अब मनी लॉन्ड्रिंग, जमीन कब्जाने वाले सिंडिकेट और पुलिस-रियल एस्टेट गठजोड़ जैसे गंभीर आरोपों की जांच चल रही है।

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी
May 16, 2026, 07:11 pm IST
inभारत, पश्चिम बंगाल
ममता बनर्जी के बेहद करीबी रहे हैं शांतनु बिस्वास

ममता बनर्जी के बेहद करीबी रहे हैं शांतनु बिस्वास

पश्चिम बंगाल की राजनीति और पुलिस महकमे में उस समय बड़ा भूचाल आ गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी के बाद शांतनु सिन्हा बिस्वास की सेवाएं आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दी गईं। कभी ममता बनर्जी सरकार के बेहद करीबी माने जाने वाले इस वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर अब मनी लॉन्ड्रिंग, जमीन कब्जाने वाले सिंडिकेट और पुलिस-रियल एस्टेट गठजोड़ जैसे गंभीर आरोपों की जांच चल रही है।

राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद यह कार्रवाई नई सरकार की ओर से “सिस्टम क्लीनअप” के बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें जहां सेवा विस्तार पाए अन्य अधिकारियों को इस्तीफा देने या सम्मानजनक तरीके से पद छोड़ने का अवसर दिया गया, वहीं शांतनु बिस्वास के मामले में सरकार ने सीधे सेवा समाप्ति का रास्ता चुना।

ED की गिरफ्तारी के बाद तेज हुआ घटनाक्रम

बीते दिनों ईडी ने कोलकाता और आसपास सक्रिय कथित जमीन सिंडिकेट और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की थी। इसी कार्रवाई के तहत शांतनु सिन्हा बिस्वास को लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया। पहले ईडी अधिकारियों ने उनसे लगभग 10 घंटे तक लगातार पूछताछ की। एजेंसी को शक था कि जमीन कब्जाने और रियल एस्टेट नेटवर्क से जुड़े कई मामलों में पुलिस संरक्षण दिया गया।

इससे पहले जब ईडी ने उन्हें पूछताछ के लिए कई नोटिस भेजे, तब वह कथित रूप से एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए। बाद में एजेंसी ने उनके खिलाफ ‘लुकआउट नोटिस’ जारी किया था। इससे यह संकेत मिला कि जांच एजेंसी उन्हें लेकर पहले से ही गंभीर थी।

कौन है ‘सोना पप्पू’, जिसके कनेक्शन ने खोली पूरी फाइल?

ईडी की जांच का केंद्र एक कथित हिस्ट्रीशीटर बिस्वजीत पोद्दार उर्फ ‘सोना पप्पू’ है, जो फरार बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह नेटवर्क सिर्फ जमीन खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें दबाव, फर्जी केस और पुलिसिया प्रभाव का इस्तेमाल भी किया जाता था। जांच में गिरफ्तार रियल एस्टेट कारोबारी जॉय कामदार का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि सोना पप्पू, कुछ बिल्डर और पुलिस अधिकारियों का एक गठजोड़ विवादित जमीनों को बेहद कम कीमत पर हथियाने का काम करता था।

बताया जाता है कि इस नेटवर्क का तरीका बेहद संगठित था। पहले जमीन मालिकों पर दबाव बनाया जाता, फिर अलग-अलग पुलिस थानों में उनके खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज करवाई जातीं। लगातार कानूनी और पुलिसिया दबाव के चलते कई लोग अपनी संपत्तियां औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हो जाते थे। बाद में उन्हीं जमीनों पर करोड़ों रुपये के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट खड़े किए जाते थे।

पुलिस सिस्टम का इस्तेमाल निजी सिंडिकेट के लिए?

जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या पुलिस महकमे के कुछ अधिकारियों ने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल निजी सिंडिकेट को फायदा पहुंचाने के लिए किया। कोलकाता पुलिस के 12 अन्य पुलिसकर्मी भी अब ईडी की जांच के घेरे में बताए जा रहे हैं। इनमें ज्यादातर इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी बताए जा रहे हैं। आरोप है कि ये अधिकारी शांतनु बिस्वास के करीबी माने जाते थे और कथित नेटवर्क के संचालन में सहयोग करते थे।हालांकि, अभी तक इन अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन एजेंसियां उनके बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति, कॉल डिटेल और पुराने केस रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं।

ममता सरकार में मिला था सेवा विस्तार

शांतनु सिन्हा बिस्वास उन अधिकारियों में शामिल थे, जिन्हें पिछली ममता सरकार के दौरान दो साल का सेवा विस्तार दिया गया था। राजनीतिक गलियारों में उन्हें सत्ता के बेहद भरोसेमंद अधिकारियों में गिना जाता था।
यही कारण है कि उनकी गिरफ्तारी और फिर सेवा समाप्ति को बंगाल की राजनीति में एक बड़े प्रतीकात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि राज्य में कुछ प्रभावशाली पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त नेटवर्क के बीच करीबी संबंध थे। फिलहाल तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

नई सरकार का बड़ा संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई बीजेपी सरकार इस कार्रवाई के जरिए प्रशासनिक तंत्र को स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि भ्रष्टाचार, जमीन सिंडिकेट और राजनीतिक संरक्षण के आरोपों पर अब सख्त रवैया अपनाया जाएगा। राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ के अंदरूनी जानकारों का कहना है कि सरकार नही चाहती थी कि इतने गंभीर आरोपों का सामना कर रहे अधिकारी को किसी प्रकार की संस्थागत सुरक्षा का संदेश जाए, इसलिए सीधे सेवा समाप्ति का फैसला लिया गया।

कई पुराने मामलों की फाइलें खुल सकती हैं

ईडी की कार्रवाई के बाद अब कोलकाता पुलिस और रियल एस्टेट सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। एजेंसियां कई पुराने जमीन विवादों और बंद फाइलों की दोबारा जांच कर सकती हैं। कई ऐसे मामलों की भी समीक्षा की जा रही है, जिनमें शिकायतकर्ताओं ने पहले पुलिस पर पक्षपात या दबाव बनाने के आरोप लगाए थे। यदि जांच में और नाम सामने आते हैं, तो आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं।

 

Topics: ममता बनर्जीप्रवर्तन निदेशालयEDभाजपा सरकारकोलकाता पुलिससुभेंदु अधिकारीकोलकाता डीसीपी शांतनु बिस्वास
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
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