हरिद्वार : मस्जिद की ऊंची मीनारों को हटाने का काम शुरू, डीएम ने दी थी सीलिंग की चेतावनी
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हरिद्वार : मस्जिद की ऊंची मीनारों को हटाने का काम शुरू, डीएम ने दी थी सीलिंग की चेतावनी

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में बिना प्रशासनिक अनुमति के बनाई जा रही सूबे की सबसे बड़ी मस्जिद की ऊंची मीनार को हटाने का काम शुरू हो गया है। प्रशासन की सीलिंग की चेतावनी के बाद प्रबंधकों ने खुद अवैध निर्माण हटाना शुरू किया।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Shivam Dixit
May 16, 2026, 03:35 pm IST
inउत्तराखंड
Haridwar administration action on illegal mosque construction and minaret removal

देहरादून । उत्तराखंड को सनातन संस्कृति की राजधानी कहे जाने वाले हरिद्वार जिले की सुल्तान नगर पंचायत  में मस्जिद का निर्माण रुकवाने गई प्रशासन की टीम ने मीनार मस्जिद गिराने को लेकर प्रबंधकों को चेतावनी दी कि वे स्वयं इसे तोड़ दे अन्यथा प्रशासन परिसर को सील करने की कारवाई करेगा।

डीएम मयूर दीक्षित ने बताया कि मस्जिद भवन और उसकी मीनार को लेकर सोशल मीडिया में चली खबरो का संज्ञान लेते हुए पूर्व में मस्जिद प्रबंधकों को नोटिस दिया गया था, बावजूद इसके उनके द्वारा अवैध निर्माण कार्य नहीं हटाया गया, आज एसडीएम के नेतृत्व में पुनः प्रशासनिक टीम ने वहां जाकर प्रबंधकों को चेतावनी दी गई कि अवैध निर्माण को नहीं हटाने की दशा में परिसर को सील कर दिया जाएगा। जिसके बाद प्रबंधकों ने आपत्ति जनक मीनार को स्वयं हटाने का काम शुरू करवा दिया गया है।

डीएम श्री दीक्षित ने बताया कि उक्त अवैध निर्माण को जैसे बनाया गया था उसी प्रकिया से ही हटाया जाना संभव है ।उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया पर निगरानी रखी जा रही है और पुलिस प्रशासन को भी सतर्कता बरतने को कहा गया हैं।

उल्लेखनीय है कि करीब दस माह पहले  उत्तराखंड की सबसे बड़ी  मस्जिद के निर्माण और ऊंची मीनारों को मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया और न ही इसके निर्माण के लिए जिला प्रशासन अथवा प्राधिकरण से कोई अनुमति ली गई थी। अब यहां पुनः बल्लियां खड़ी करके काम होता दिखाई दे रहा है।

सोशल मीडिया में ये प्रकरण चर्चित होने पर डीएम  हरिद्वार ने इसके निर्माण पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया था,जिसके बाद उक्त मस्जिद के निर्माण कार्य को रोक दिया गया था।

अक्टूबर 2025 में चर्चा में आयी थी मस्जिद

हरिद्वार जिले के सुल्तानपुर नगर पंचायत क्षेत्र में उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद बनाए जाने और उसकी मीनार की ऊंचाई को लेकर खबरें सुर्खियों में रही।  हरिद्वार जिला प्रशासन ने इसका निर्माण कार्य रोकते हुए नोटिस जारी किया था। बताया जाता है कि नोटिस का कोई जवाब नहीं मिला यानि स्पष्ट है कि उक्त मस्जिद बिना किसी सरकारी अनुमति के बनाई जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट का 2009 और 2016 का ऐसा निर्देश है कि कोई भी धार्मिक भवन या संरचना बिना जिला अधिकारी के अनुमति के नहीं बनाई जा सकती। इसके पीछे तर्क यही था कि एक तो धार्मिक संरचना, सरकारी भूमि पर न बने और इसके निर्माण में सुरक्षा के हर पहलू का ध्यान रखा जाए।

कई मस्जिदों ने नहीं ली निर्माण की अनुमति

उत्तराखंड में 722 से अधिक मस्जिदों का निर्माण हो चुका है जिसका आंकड़ा उत्तराखंड सरकार के पास भी है। इनमें सबसे ज्यादा मस्जिदें सनातन गंगा नगरी हरिद्वार जिले में है जिनके संख्या 322 बताई गई है।

देहरादून जिले में 155, उधम सिंह नगर में 144 और नैनीताल जिले में 48 मस्जिदें है।खास बात ये कि इनमें से शायद ही कोई ऐसी हो जिसमें भव्यता का निर्माण कार्य न चल रहा हो।

खास बात ये भी है कि कुछ चिन्हित स्थानों पर मस्जिदों ने भव्यता के साथ साथ बड़ा आकार लेना भी शुरू कर दिया है मानो यहां कोई कंप्टीशन चल रहा हो कि कौन सबसे ऊंची मीनार बनाएगा या कौन सबसे बड़ी मस्जिद बनाएगा।

सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण,

गौर करने वाली बात ये कि इनमें कोई भी निर्माण संबंधी अनुमति नहीं ले रहा ,कारण ये है कि प्रशासनिक अनुमति प्राप्त करने के लिए उन्हें भूमि, संस्था पंजीकरण,आय व्यय का ब्यौरा और अन्य दस्तावेज दिखाने पड़ते है जोकि बहुत से मस्जिद प्रबंधकों के पास  नहीं होते। कई इमारतें ऐसी है जोकि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे करके बनाई गई है और फिर उन्हें वक्फ बोर्ड में पंजीकृत करवा दिया गया,इसका नतीजा ये हुआ कि प्रशासन इनके खिलाफ कार्रवाई करने से परहेज करता रहा।

पिछले दिनों वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करवाने के दौरान भी ऐसे ही पेच उलझे हुए दिखाई दिए है।

बरहाल सनातन देवो की भूमि उत्तराखंड में इस्लामिक प्रतीक चिन्हों की बढ़ती बसावट से स्थानीय सनातन संगठन भी चिंतित है।

नियमों का उलंघन

जानकारी के मुताबिक इस मस्जिद के निर्माण मानकों को लेकर कोई गाइड लाइन की चिंता नहीं की गई क्योंकि जब इसका नक्शा ही पास नहीं करवाया गया तो न तो फायर सेफ्टी न ही लोकनिर्माण और न ही अन्य किसी विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया। आम तौर पर कोई आम व्यक्ति घर भी बनाता है तो उसके लिए मानक तय है, कितनी ऊंचाई होगी,पार्किंग स्पेस कहां है? परन्तु उक्त मस्जिद निर्माण के दौरान ऐसे किसी भी मानकों का पालन नहीं किया गया।

पहाड़ी रिहायशी अथवा व्यवसायिक भवन बनाने के लिए केवल 12 मीटर की अनुमति है। जबकि मैदानी इलाकों में इसमें 30 मीटर यानी करीब 100 फीट  लेकिन  यहां  मस्जिद में 250 फिट ऊंची मीनार किसी भी मानक के अनुसार प्रथम दृष्टि में सही नहीं कही जा रही। जानकारी के अनुसार यदि सौ मीटर से ऊंची इमारत है तो उसके लिए शासन से अनुमति के साथ साथ आई आई टी के संरचनात्मक प्रौद्योगिकी विभाग से अनुमति लेना आवश्यक है।

Topics: Haridwar Newswaqf board propertyillegal construction UttarakhandUttarakhand Mosque CaseDM Mayur Dixit ActionSultanpur HaridwarEncroachment Haridwar
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