भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायालय ने भोजशाला के वाग्देवी मंदिर की पुष्टि की है। वहीं, हिंदू पक्षकार जितेंद्र सिंह विसेन ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दाखिल करते हुए मांग की है कि यदि मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देता है, तो बिना हिंदू पक्ष को सुने कोई भी एकतरफा आदेश पारित न किया जाए।
इंदौर बेंच ने क्या कहा
दरअसल, इंदौर बेंच ने अपने फैसले में इस स्थल को वाग्देवी मंदिर मानते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि यह स्थान राजा भोज के काल में शिक्षा और विद्या का प्रमुख केंद्र रहा है, जैसा कि प्रमाणों से स्पष्ट है। अदालत ने कहा कि यहां देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की जा सकती है और हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार प्राप्त है। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में पुरातात्विक साक्ष्यों, ऐतिहासिक तथ्यों, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले का भी उल्लेख किया। अदालत ने माना कि उपलब्ध प्रमाण इस स्थल के मंदिर स्वरूप की ओर संकेत करते हैं।
हिंदू पक्षकार ने दाखिल की कैविएट
फैसले के तुरंत बाद हिंदू पक्ष की ओर से कानूनी तैयारी भी तेज हो गई। हिंदू पक्षकार जितेंद्र सिंह विसेन ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कैविएट में स्पष्ट कहा है कि “उपरोक्त मामले में नीचे हस्ताक्षरकर्ता को सूचना दिए बिना कोई भी आदेश पारित न किया जाए।” विसेन इंदौर हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता क्रमांक-6 के रूप में पक्षकार रहे हैं। कानूनी जानकारों के मुताबिक कैविएट दाखिल करने का अर्थ यह है कि अब सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम पक्ष की संभावित याचिका पर हिंदू पक्ष को सुने बिना कोई अंतरिम राहत या स्थगन आदेश जारी नहीं करेगा।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। अदालत ने कहा कि सभी पक्षों ने बेहद सहयोगात्मक रवैया अपनाया और मामले की गंभीरता को समझते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फैसला केवल भावनाओं के आधार पर नहीं बल्कि ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुरातात्विक रिपोर्ट और कानून के दायरे में रहकर दिया गया है।

















