खाड़ी युद्ध के बीच दुनियाभर की तेल सप्लाई बुरी तरह से ठप हो चुकी है। इस बात का अंदेशा केंद्र सरकार को पहले से ही हो चुका है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से सालभर सोना नहीं खरीदने, पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील की थी। इसी क्रम में अब सरकार ने चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह रोक 30 सितंबर 2026 तक या अगले कोई आदेश आने तक रहेगी। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। इस कदम का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को बढ़ने से बचाना है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इस साल अल नीनो का असर मॉनसून पर पड़ने की आशंका है। इससे अगले सीजन में चीनी का उत्पादन कम हो सकता है। अगर उत्पादन घटा तो कीमतें बढ़ने का खतरा है। इसलिए सरकार ने एक्सपोर्ट बंद करने का फैसला किया। लगातार दूसरे साल उत्पादन घरेलू खपत से कम रहने का अनुमान है। पहले सरकार ने चीनी मिलों को 1.59 मिलियन टन चीनी एक्सपोर्ट करने की इजाजत दी थी। तब उम्मीद थी कि उत्पादन ज्यादा रहेगा। लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
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नोटिफिकेशन में क्या है?
सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक रॉ शुगर और सफेद चीनी दोनों के एक्सपोर्ट पर रोक है। कुछ खास शर्तों के साथ ही अनुमति मिलेगी। अगर नोटिफिकेशन जारी होने से पहले लोडिंग हो चुकी थी तो उस शिपमेंट को जाने दिया जाएगा। अगर शिपिंग बिल फाइल हो चुका है और जहाज भारतीय बंदरगाह पर पहुंच चुका है, तो भी एक्सपोर्ट की छूट रहेगी। अगर चीनी कस्टम या कस्टोडियन को सौंप दी गई है तो भी शिपमेंट क्लियर हो जाएगा।
ट्रेडर्स पर क्या असर?
मुंबई के एक बड़े ग्लोबल ट्रेड हाउस के डीलर ने बताया कि फरवरी में सरकार ने काफी एक्सपोर्ट कोटा दिया था। इसी के आधार पर ट्रेडर्स ने बाहर के साथ डील साइन की थी। अब उन ऑर्डर्स को पूरा करना मुश्किल हो गया है। ट्रेडर्स ने करीब 8 लाख टन चीनी के एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट कर लिए थे। इनमें से 6 लाख टन से ज्यादा चीनी पहले ही बाहर भेज दी गई है। बाकी के लिए अब नई चुनौतियां हैं।
वैश्विक बाजार पर प्रभाव
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के इस फैसले से दुनिया भर में सफेद और रॉ शुगर की कीमतों को सहारा मिल सकता है। ब्राजील और थाईलैंड जैसे दूसरे देशों को एशिया और अफ्रीका के खरीदारों से ज्यादा ऑर्डर मिल सकते हैं। भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक है। इस रोक के बाद न्यूयॉर्क में रॉ शुगर फ्यूचर्स 2 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ गए। लंदन में व्हाइट शुगर फ्यूचर्स करीब 3 प्रतिशत उछल गए।

















