वडोदरा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोमवार को लगातार दूसरे दिन देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने और आयातित वस्तुओं पर निर्भरता कम करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने और कार पूलिंग को बढ़ावा देने की अपील की।
वडोदरा में सरदार धाम से जुड़े विभिन्न परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमें हर छोटे-बड़े प्रयास से ऐसे उत्पादों का उपयोग कम करना है, जो विदेश से आते हैं और ऐसे व्यक्तिगत कामों से भी बचना है, जिनमें विदेशी मुद्रा खर्च होती हो।”
ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हर साल लाखों करोड़ रुपये विदेशी वस्तुओं और कच्चे तेल के आयात पर खर्च करता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुई हैं और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि जब-जब देश युद्ध या किसी बड़े संकट से गुजरा है, तब-तब नागरिकों ने सरकार की अपील पर अपने दायित्व निभाए हैं और अब भी वैसी ही सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की आवश्यकता है।
पेट्रोल-डीजल की खपत कम करें
मोदी ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने और कार पूलिंग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मेट्रो, इलेक्ट्रिक बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों के अधिक उपयोग से विदेशी मुद्रा की बचत में मदद मिलेगी।
वर्क फ्रॉम होम की अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने कामकाज को आसान बनाया है और सरकारी तथा निजी संस्थानों में वर्चुअल बैठकों तथा ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसे विकल्पों को प्राथमिकता देने से ईंधन की खपत कम की जा सकती है। रविवार को हैदराबाद में अपने संबोधन में भी उन्होंने कोरोना काल की तरह ‘वर्क फ्रॉम होम’, ऑनलाइन बैठकों और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को फिर से अपनाने की जरूरत पर जोर दिया था।
गैर जरूरी हो तो सोना ना खरीदें
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की बड़ी राशि सोने के आयात पर भी खर्च होती है और लोगों को फिलहाल गैर-जरूरी सोने की खरीद टालनी चाहिए।
उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ को जन आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि विदेशी सामान की जगह स्थानीय उत्पादों को अपनाना समय की मांग है। मोदी ने कहा कि अपने गांव, शहर और देश के उद्यमियों को मजबूत करना ही आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सबसे बड़ा योगदान होगा।
कोरोना संकट की तरह करेंगे सामना
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी और पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति इस दशक के सबसे बड़े संकटों में से एक बन चुकी है। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि जैसे भारत ने कोरोना संकट का सामना किया, वैसे ही वर्तमान चुनौतियों से भी सफलतापूर्वक बाहर निकलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि वैश्विक संकटों का असर देश के लोगों पर न्यूनतम पड़े। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक बड़ी भूमिका निभाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

















