भुवनेश्वर। विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा 2026 को लेकर पुरी में तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं। एक ओर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के भव्य रथों का निर्माण परंपरागत विधि-विधान के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने संभावित 15 से 20 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, यातायात और स्वच्छता से जुड़े व्यापक इंतजाम शुरू कर दिए हैं। रथ निर्माण कार्य और प्रशासनिक तैयारियों ने श्रद्धालुओं के बीच उत्साह और श्रद्धा का वातावरण और अधिक बढ़ा दिया है।
रथ निर्माण कार्य में तेजी, 18 पहिए तैयार
श्रीजगन्नाथ मंदिर के निकट स्थित रथ निर्माण स्थल पर तीनों रथों के निर्माण का कार्य परंपरागत सेवायतों की देखरेख में लगातार जारी है। मंदिर सूत्रों के अनुसार अब तक तीनों रथों के लिए कुल 18 पहियों का निर्माण पूरा हो चुका है। हर वर्ष की तरह इस बार भी रथ निर्माण कार्य धार्मिक परंपराओं और निर्धारित अनुष्ठानों का पालन करते हुए किया जा रहा है।
रूपकार सेवक तीनों रथों के लिए 11-11 साल लकड़ी के ब्लॉकों पर बारीक नक्काशी कर रहे हैं। वर्तमान में लकड़ी के हिस्सों पर भगवान नरसिंह की आकृतियां उकेरी जा रही हैं, जो रथों की प्रमुख सजावटी और धार्मिक विशेषताओं में शामिल होती हैं। इन कलाकृतियों में ओडिशा की समृद्ध शिल्प परंपरा और सदियों पुरानी कारीगरी की झलक देखने को मिलती है।
इसी के साथ अस्थायी लोहार कार्यशाला में ओझा लोहार सेवक रथ निर्माण के लिए आवश्यक लोहे के उपकरण तैयार करने में जुटे हैं। यहां ‘पंडारी’, ‘तुंब बाला’, ‘आर कांटा’ और ‘पंडारी चाबी’ जैसे महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण किया जा रहा है। ये सभी उपकरण विशाल लकड़ी के रथों को मजबूती और स्थायित्व प्रदान करने में अहम भूमिका निभाते हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि रथ निर्माण से जुड़ा प्रत्येक कार्य निर्धारित सेवकों की निगरानी में सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार किया जा रहा है, ताकि रथयात्रा की धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक विरासत अक्षुण्ण बनी रहे।

पहली समन्वय समिति बैठक में व्यापक तैयारियों की समीक्षा
रथयात्रा की तैयारियों को लेकर पुरी टाउन हॉल में पहली समन्वय समिति बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केन्द्रांचल आरडीसी सुधांशु मोहन सामल ने की। इस दौरान जिलाधिकारी दिव्यज्योति परिड़ा ने जानकारी दी कि इस वर्ष रथयात्रा में 15 से 20 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसे देखते हुए प्रशासन ने सभी विभागों को समयबद्ध तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में आयोजन को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों ने सुझाव रखे। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
रथ निर्माण के लिए लकड़ी और अन्य सामग्री की व्यवस्था
श्रीमंदिर नीति प्रशासक प्रियरणजन पृष्टि ने बताया कि रथ निर्माण के लिए कुल 818 लकड़ियों की आवश्यकता है, जिनमें से 710 लकड़ियां पहले ही पहुंच चुकी हैं। शेष 108 लकड़ियां महीने के अंत तक पुरी पहुंच जाएंगी। उन्होंने बताया कि इस बार अतिरिक्त चारमाल निर्माण के लिए ढेंकानाल जिले के हिंदोल क्षेत्र से ताड़ के पेड़ लाए जाएंगे। इसके अलावा 200 किलोग्राम अतिरिक्त धूप (झुणा) खरीदी जाएगी तथा 3 क्विंटल चंदन की लकड़ी तमिलनाडु से मंगाई जाएगी। राज्य कोयर बोर्ड द्वारा 28 रथ खींचने वाली रस्सियां तथा 6 कर्तन रस्सियां उपलब्ध कराई जाएंगी।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुरी महानगर निगम क्षेत्र में दुर्घटना, भगदड़, आकस्मिक मृत्यु अथवा आतंकवादी घटना की स्थिति में बीमा सुविधा उपलब्ध कराने की भी घोषणा की है।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विशेष तैयारी
जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि रथयात्रा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। पुरी जिला मुख्य चिकित्सालय की नई इमारत के प्रथम और द्वितीय तल पर 150 बिस्तरों वाला अस्थायी अस्पताल बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त रेडक्रॉस, रेड टीबी और आईजीएच में अस्थायी रूप से 100 अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था की जाएगी। बड़ दांड से रेलवे स्टेशन तक 8 अस्थायी अस्पताल स्थापित किए जाएंगे, जबकि कुल 30 प्राथमिक चिकित्सा केंद्र कार्यरत रहेंगे। जिला मुख्य चिकित्सालय में सुपर स्पेशलिस्ट और विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात रहेंगे तथा अस्थायी अस्पतालों में मेडिसिन और जनरल चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध होंगी।
हीट स्ट्रोक उपचार इकाई, वातानुकूलित वार्ड और 10 बिस्तरों वाला विशेष उपचार यूनिट भी तैयार किया जाएगा। रथयात्रा के दौरान 42 सरकारी एंबुलेंस सेवा में रहेंगी और ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ 30 कर्मियों को बड़ा दांडा क्षेत्र में तैनात किया जाएगा। रक्त भंडार में 300 यूनिट रक्त सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी की जा रही है।
पेयजल, स्वच्छता और यातायात पर विशेष फोकस
रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बड़ा दांड में स्थापित 185 “ड्रिंक फ्रॉम टैप” केंद्रों और श्रीदांडा के 20 टैपों पर 24 घंटे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा 19 ओवरहेड टैंक और 120 पीवीसी टैंकों के माध्यम से भी पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
स्वच्छता व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने विशेष तैयारी की है। श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न स्थानों पर 1000 अस्थायी शौचालय तथा पुलिस आवास स्थलों पर 600 अस्थायी शौचालय बनाए जाएंगे। वाटको अधिकारियों ने बताया कि बड़ा दांडा और श्रीमंदिर से जुड़े इलाकों में नालों और सीवरेज की समुचित सफाई कराई जाएगी, ताकि बारिश के दौरान जलभराव की समस्या न हो। खुले नालों को ढंकने की भी व्यवस्था की जाएगी।
परिवहन विभाग की ओर से तालबनिया में सामान्य यात्री बसों और अन्य वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा विकसित की जाएगी। वहीं मालतीपाटपुर में राज्य के बाहर से आने वाली बसों के लिए पार्किंग तथा लगभग 2000 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की जाएगी। पुरी-भुवनेश्वर मार्ग पर यातायात नियंत्रण के लिए 4 इंटरसेप्टर वाहन और 10 विशेष प्रवर्तन दल तैनात किए जाएंगे। बैठक में पुरी से सांसद डा संबित पात्र , पुरी विधायक सुनील कुमार महांति, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा प्रशासनिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने रथयात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और भव्य बनाने के लिए समन्वित प्रयासों पर जोर दिया।















