पोखरण से एआई तक: जिम्मेदार नवाचार के पथ पर बढ़ता भारत
July 13, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

पोखरण से एआई तक: जिम्मेदार नवाचार के पथ पर बढ़ता भारत

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस की आधारशिला वर्ष 1998 में उस समय रखी गई, जब भारत ने वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता और रणनीतिक शक्ति का अभूतपूर्व परिचय देते हुए राजस्थान के पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण किए।

Written byयोगेश कुमार गोयलयोगेश कुमार गोयल — edited by Mahak Singh
May 11, 2026, 12:51 pm IST
in भारत
पोखरण

पोखरण

भारत जब भी अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों का इतिहास लिखेगा, तब 11 मई का दिन स्वर्णिम गौरव, आत्मनिर्भरता और तकनीकी पराक्रम के प्रतीक के रूप में सदैव याद किया जाएगा। वर्ष 1998 में राजस्थान के पोखरण की तपती धरती पर हुए सफल परमाणु परीक्षणों ने न केवल भारत को विश्व की परमाणु शक्तियों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा किया बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि भारतीय वैज्ञानिक प्रतिभा किसी भी वैश्विक शक्ति से कम नहीं है। सीमित संसाधनों, अंतर्राष्ट्रीय दबावों और तकनीकी प्रतिबंधों के बीच भारतीय वैज्ञानिकों ने जिस अदम्य साहस, दूरदृष्टि और नवाचार क्षमता का परिचय दिया, वह आधुनिक भारत के आत्मविश्वास की आधारशिला बन गया। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि के सम्मान में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 11 मई को ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस’ घोषित किया। आज यह दिवस केवल पोखरण की स्मृति तक सीमित नहीं है बल्कि भारत की डिजिटल क्रांति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सुपर कम्प्यूटिंग, अंतरिक्ष अनुसंधान और स्वदेशी तकनीकी नवाचारों की निरंतर प्रगति का उत्सव बन चुका है। वर्ष 2026 की थीम ‘समावेशी विकास के लिए जिम्मेदार नवाचार’ इस संकल्प को और सशक्त करती है कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य मानवता के कल्याण, सामाजिक समानता और विकसित भारत के निर्माण को नई दिशा देना है।

पोखरण ने बदली दुनिया की दृष्टि

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस की आधारशिला वर्ष 1998 में उस समय रखी गई, जब भारत ने वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता और रणनीतिक शक्ति का अभूतपूर्व परिचय देते हुए राजस्थान के पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण किए। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में संचालित इस मिशन को ‘ऑपरेशन शक्ति’ नाम दिया गया। 11 मई 1998 को हुए इन परीक्षणों ने भारत को विश्व के परमाणु शक्ति संपन्न देशों के विशिष्ट ‘एलीट क्लब’ में छठे राष्ट्र के रूप में स्थापित कर दिया। यह केवल सैन्य क्षमता का प्रदर्शन नहीं था बल्कि भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की प्रतिभा, साहस और तकनीकी दक्षता का वैश्विक प्रमाण भी था। इसी ऐतिहासिक दिन भारत ने दो अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धियां भी हासिल की। पहला, बेंगलुरु में भारत के पहले स्वदेशी विमान ‘हंसा-3’ का सफल परीक्षण किया गया। दूसरा, डीआरडीओ द्वारा विकसित ‘त्रिशूल’ मिसाइल का सफल परीक्षण हुआ। इन गौरवपूर्ण उपलब्धियों के सम्मान में ही वर्ष 1999 से प्रतिवर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की ओर बढ़ता भारत

प्रत्येक वर्ष प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड द्वारा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के लिए एक विशेष थीम निर्धारित की जाती है। वर्ष 2026 की थीम ‘समावेशी विकास के लिए जिम्मेदार नवाचार’ वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित करती है। यह थीम केवल तकनीकी प्रगति की बात नहीं करती बल्कि ऐसी तकनीक के विकास पर बल देती है, जिसका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक समान रूप से पहुंचे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आधुनिक तकनीक केवल महानगरों और संपन्न वर्गों तक सीमित न रह जाए बल्कि ग्रामीण भारत, किसानों, विद्यार्थियों और सामान्य नागरिकों के जीवन को भी सशक्त बनाए। इस वर्ष का यह आयोजन विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि और सुशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा डिजिटल तकनीकों की न्यायसंगत पहुंच पर केंद्रित है। आज भारत डिजिटल क्रांति, अंतरिक्ष विज्ञान, सुपर कम्प्यूटिंग और स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में विश्व का ध्यान आकर्षित कर रहा है। भारत अब केवल विदेशी तकनीकों का उपभोक्ता नहीं बल्कि नवाचार और तकनीकी समाधान प्रदान करने वाला वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनकर उभर रहा है।

दुनिया मानती है भारत की तकनीकों का लोहा

आज भारत केवल विदेशी तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बन चुका है। विभिन्न क्षेत्रों में भारत की प्रगति ने दुनिया को चकित कर दिया है।

डिजिटल क्रांति:यूपीआई और आधार

भारत का ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) आज विश्व के लिए एक केस स्टडी बन चुका है। विकसित देश भी भारत की इस रीयल-टाइम भुगतान प्रणाली को अपनाने के लिए उत्सुक हैं। दुनिया की सबसे बड़ी बायोमीट्रिक पहचान प्रणाली ‘आधार’ ने न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है बल्कि ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (डीबीटी) के माध्यम से सरकारी योजनाओं को पारदर्शी बनाया है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के माध्यम से भारत ने दिखा दिया है कि कैसे कम लागत में एक विशाल आबादी को डिजिटल रूप से जोड़ा जा सकता है।

एआई और सुपरकंप्यूटिंग: ‘ऐरावत’ का उदय

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में भारत ने ‘ऐरावत’ के रूप में अपनी धाक जमाई है। पुणे स्थित ‘सी-डैक’ में स्थापित यह एआई सुपरकंप्यूटर दुनिया के शीर्ष 500 सुपरकंप्यूटरों की सूची में 75वें स्थान पर है। यह मौसम विज्ञान, ड्रग डिस्कवरी और जटिल अंतरिक्ष गणनाओं में भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

अंतरिक्ष विज्ञान: ‘किफायती’ और ‘सटीक’ मिशन

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष को ‘लोकतांत्रिक’ बना दिया है। भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बना, जिसने ‘मंगलयान’ मिशन के जरिये अपने पहले ही प्रयास में मंगल पर पहुंचने में सफलता पाई और वह भी हॉलीवुड की एक फिल्म के बजट से कम लागत में। यही नहीं, चंद्रयान-3 के तहत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना। यह मिशन स्वदेशी तकनीक और दृढ़ इच्छाशक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है।

रक्षा तकनीक: आकाश मिसाइल और आत्मनिर्भरता

रक्षा के क्षेत्र में भारत अब ‘क्रेता’ से ‘विक्रेता’ बनने की राह पर है। आकाश मिसाइल प्रणाली, जिसे डीआरडीओ ने विकसित किया है, आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मांग में है। इसकी मारक क्षमता और सटीक निशाना इसे दुनिया की बेहतरीन कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों में से एक बनाती है।

स्वास्थ्य और शिक्षा में आधुनिक तकनीक की भूमिका

हालिया वैश्विक महामारी ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिक तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं बल्कि मानव जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा कवच भी है। संकट की उस घड़ी में भारतीय वैज्ञानिक क्षमता और डिजिटल नवाचार ने करोड़ों लोगों की सांसों की डोर को थामे रखा। कोवैक्सीन जैसे स्वदेशी टीकों ने न केवल देशवासियों को सुरक्षा प्रदान की बल्कि भारत को वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग का मजबूत केंद्र भी बनाया। इसी दौरान टेलीमेडिसिन और डिजिटल हैल्थ प्लेटफॉर्म्स ने स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल दी। दूरस्थ गांवों और छोटे कस्बों तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से पहुंचने लगी। शिक्षा के क्षेत्र में भी तकनीक ने नई क्रांति पैदा की। अब एआई आधारित पर्सनलाइज्ड लर्निंग सिस्टम भाषाई बाधाओं को समाप्त कर विद्यार्थियों को उनकी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे शिक्षा अधिक समावेशी, सुलभ और प्रभावी बन रही है।

जिम्मेदार नवाचार और मानवता से जुड़ती तकनीक

‘जिम्मेदार नवाचार’ का वास्तविक अर्थ केवल नई तकनीकों का निर्माण नहीं बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो नैतिक, सुलभ और समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए उपयोगी हो। भारत आज इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भारतीय भाषा मॉडल और Bhashini जैसी पहलें डिजिटल समावेशन की नई क्रांति बनकर उभरी हैं। इन तकनीकों की सहायता से अब एक किसान अपनी मातृभाषा में मौसम की सटीक जानकारी प्राप्त कर सकता है, फसलों में रोगों की पहचान कर सकता है और आधुनिक कृषि संबंधी सलाह भी हासिल कर सकता है। अब ‘डिजिटल इंडिया’ का उद्देश्य केवल इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराना नहीं बल्कि इंटरनेट के माध्यम से अवसर, ज्ञान और आत्मनिर्भरता को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। यही तकनीक तब वास्तविक परिवर्तन का माध्यम बनती है, जब वह गांव, गरीब और सामान्य नागरिक के जीवन को सीधे सशक्त करे।

नवाचार के पथ पर बढ़ता भारत

कुल मिलाकर देखा जाए तो राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस केवल भारत की वैज्ञानिक विजयगाथाओं का उत्सव नहीं बल्कि भविष्य के भारत का घोष भी है। यह दिन युवाओं को बताता है कि विज्ञान प्रयोगशालाओं की चारदीवारी में कैद कोई विषय नहीं बल्कि वह शक्ति है, जो समाज की सबसे कठिन चुनौतियों को अवसरों में बदल सकती है। आज भारत आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की ओर कदम बढ़ा रहा है। अंतरिक्ष में चमकते हमारे उपग्रह, डिजिटल क्रांति से बदलता जनजीवन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में बढ़ती भारतीय उपस्थिति इस उभरते भारत की नई पहचान बन चुकी है। आने वाला भारत केवल तकनीकी रूप से शक्तिशाली नहीं बल्कि मानवीय मूल्यों से प्रेरित तकनीकी महाशक्ति होगा। संभव है कि अगली विश्वस्तरीय खोज किसी बड़ी प्रयोगशाला से नहीं बल्कि किसी जिज्ञासु भारतीय बालक के सपनों और कल्पनाशक्ति से जन्म ले।

Topics: Digital Public InfrastructureIndigenous Defence TechnologyNational Technology Day 2026Pokhran nuclear testsDRDOIndia's scientific achievementsArtificial IntelligenceAiravat supercomputeratal bihari vajpayeeC-DAC PuneISROMangalyaanDigital IndiaAI based educationindian space research organisationTechnological self-relianceChandrayaan-3Science and innovation
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

EPFO

EPFO ने बंद की ये सुविधा: अब UAN के लिए UMANG ऐप डाउनलोड करना होगा जरूरी

रक्षा क्षेत्र : ब्रह्मोस बनी कूटनीतिक ब्रह्मास्त्र

Grand screening of Panchjanya's documentary Amit Atal held

हमारी नाल संघ से जुड़ी है.. : वृतचित्र ‘अमिट अटल’ का हुआ भव्य प्रदर्शन, दत्तात्रेय जी और जोशी जी ने बताएं अनसुने प्रसंग

aadhar card update

UIDAI का बड़ा ऐलान: अब आधार कार्ड में यह काम होगा फ्री, नहीं लगेगा कोई शुल्क

ISRO की बड़ी कामयाबी: 88% पावर पर सफल हुआ इंजन, अब 200 टन थ्रस्ट टेस्ट की बारी

आज का इतिहास

23 जून का इतिहास: ओलंपिक दिवस से लेकर इसरो के ‘पुष्पक’ मिशन तक, जानें इस दिन की प्रमुख घटनाएं

Load More

ताज़ा समाचार

Explainer: आत्मनिर्भर भारत की नई क्रांति का नाम है E-20, अन्नदाता से ऊर्जादाता बनने की शुरुआत

supreme court

काशी, मथुरा और संभल मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के समझौते प्रस्ताव से दोनों पक्षों ने किया इनकार

तीर्थ यात्रियों की ट्रेन को रवाना करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर हर्रावाला से वेरावल के लिए विशेष रेल यात्रा का शुभारंभ

दिल्ली दंगों का दोषी ताहिर हुसैन

दिल्ली दंगा : IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में AAP का पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, अनस और जावेद दोषी

कर्णावती में पौधरोपण करते वालंटियर्स

अहमदाबाद ने बनाया विश्व रिकॉर्ड: एक घंटे में 3.61 लाख पौधरोपण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

देहरादून साइंस सिटी बनेगी विज्ञान और नवाचार का राष्ट्रीय केंद्र : सीएम धामी 

भारतीय महिला क्रिकेट टीम

लॉर्ड्स के मैदान पर भारतीय महिला टीम ने रचा इतिहास, इंग्लैंड को 270 रन से हराया, 142 साल के इतिहास में पहली बार

cm yogi adityanath

अपराधियों के लिए यूपी में कोई जगह नहीं, करें सख्त कार्रवाई : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

उत्तर प्रदेश में विश्वस्तरीय सड़क संपर्क विकसित करना हमारी प्राथमिकता: नितिन गडकरी

क्या है दिल्ली लक्ष्मी योजना? 21 से 60 साल तक की महिलाओं को हर महीने मिलेंगे 2500 रुपये; जानिये कैसे मिलेगा ये लाभ

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies