पांच प्रदेशों के चुनाव में मुस्लिम विधायकों का विश्लेषण: असम, बंगाल और केरल में क्या बदला?
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पांच प्रदेशों के चुनाव में मुस्लिम विधायकों का विश्लेषण: असम, बंगाल और केरल में क्या बदला?

असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी चुनाव में मुस्लिम वोट का रुझान। मुस्लिम विधायकों की संख्या में बदलाव और विपक्षी दलों को मिला समर्थन।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by कुलदीप सिंह
May 11, 2026, 01:11 pm IST
in असम, विश्लेषण, केरल, पश्चिम बंगाल
Assam Bengal Kerala Muslim Voters

प्रतीकात्मक तस्वीर

पांच प्रदेशों में हुए चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं पर सबकी नज़र थी। पांच में से तीन प्रदेश पश्चिम बंगाल, असम और केरल मुस्लिम बहुलता के लिए जाना जाता है। इन सभी प्रदेशों में मुस्लिम केंद्रित राजनीतिक दल भी है। असम में बदरुद्दीन अजमल की आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और पश्चिम बंगाल में नए बनी हुमायूँ कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी शामिल है। एआईयूडीएफ और आईयूएमएल ने अपनी मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी सार्थकता पहले साबित कर चुकी है। वहीं आम जनता उन्नयन पार्टी  पार्टी के लिए यह पहला मौका था।

असम में चुने गए 22 मुस्लिम विधायक

असम में मुस्लिम वर्ग के 22 विधायक चुने गए हैं। ये सभी 22 विधायक विपक्षी खेमे के हैं। एआईयूडीएफ के दो विधायक निर्वाचित हुए हैं जो मुस्लिम वर्ग से हैं। कांग्रेस पार्टी के 19 विधायक निर्वाचित हुए हैं, जिनमें 18 मुस्लिम वर्ग के हैं। कांग्रेस पार्टी का सिर्फ एक गैर मुस्लिम विधायक आरक्षित सीट से निर्वाचित हुआ है। शेष एक मुस्लिम विधायक तृणमूल कांग्रेस पार्टी से निर्वाचित हुआ है। असम में विपक्ष के 24 विधायकों में 22 मुस्लिम है।

पश्चिम बंगाल में कम हुए मुस्लिम विधायक

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम विधायकों की संख्या पिछले विधानसभा के अपेक्षा कम हुआ है। बंगाल में उत्तरी हिस्से के मुस्लिम मतदाताओं और दक्षिणी हिस्से में मुस्लिम मतदाताओं के मतदान के विकल्प में काफी अंतर है। जहाँ उत्तर बंगाल के मुस्लिम मतदाताओं की पहली पसंद कांग्रेस पार्टी और आम जनता उन्नयन पार्टी है। वहीं दक्षिणी हिस्से में मुस्लिम मतदाताओं की एकमात्र पसन्द ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी है। पिछले चुनाव में उत्तर बंगाल के भी मुस्लिम मतदाताओं ने विकल्पहीनता के कारण ममता बनर्जी को मतदान किया था। मगर इस बार इस इलाके के मुस्लिम मतदाताओं ने फिर से कांग्रेस, वाम दल और हुमायूँ कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के लिए मतदान किया है।

पश्चिम बंगाल में 40 सीटों पर 39 मुस्लिम विधायक निर्वाचित हुए हैं। हुमायूँ कबीर दो जगहों से निर्वाचित हुए हैं। अतएव 39 मुस्लिम विधायक चुने गए हैं। कांग्रेस पार्टी के दो विधायक चुने गए हैं जो मुस्लिम वर्ग से हैं, पांच प्रदेशों में हुए चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं पर सबकी नज़र थी। इन पांच में तीन प्रदेश पश्चिम बंगाल, असम और केरल मुस्लिम बहुलता के लिए जाना जाता है। इन सभी प्रदेशों में मुस्लिम केंद्रित राजनीतिक दल भी है। असम में बदरुद्दीन अजमल की आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और पश्चिम बंगाल में पुरानी इंडियन सेक्युलर फ्रंट के अलावा नए बनी हुमायूँ कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी शामिल है। एआईयूडीएफ और आईयूएमएल ने अपनी मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी सार्थकता पहले साबित कर चुकी है। वहीं आम जनता उन्नयन पार्टी पार्टी के लिए यह पहला मौका था।

विगत असम विधानसभा में मुस्लिम विधायकों की संख्या 31 थी जो इस बार घटकर 22 रह गई है। ये सभी 22 विधायक विपक्षी खेमे के है। एआईयूडीएफ के दो विधायक निर्वाचित हुए हैं जो मुस्लिम वर्ग से हैं। कांग्रेस पार्टी के 19 विधायक निर्वाचित हुए हैं जिनमें 18 मुस्लिम वर्ग के हैं। कांग्रेस पार्टी का सिर्फ एक गैर मुस्लिम विधायक आरक्षित सीट से निर्वाचित हुआ है। शेष एक मुस्लिम विधायक तृणमूल कांग्रेस पार्टी से निर्वाचित हुआ है। असम में विपक्ष के 24 विधायकों में 22 मुस्लिम हैं। मुस्लिम वर्ग ने अजमल की पार्टी से किनारा करते हुए कांग्रेस पार्टी के लिए मतदान किया है। दूसरे शब्दों में मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा के खिलाफ सबसे बड़े और मजबूत दल को अपना मत दिया है। मुस्लिम मतदाताओं का दिमाग पूरी तरह से भाजपा को हराने पर टिका है। लोकसभा चुनाव में भी मुस्लिमों ने अजमल की पार्टी से दूरी बना लिया था। अजमल देश में सर्वाधिक 1012476 मतों से अपने परंपरागत सीट धुबरी से चुनाव हार गए थे। अजमल की पार्टी लोकसभा के चुनाव में एक भी सीट पर प्रथम पायदान पर नहीं आ सकी थी।

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम विधायकों की संख्या पिछले विधानसभा की अपेक्षा कम हुई है। बंगाल में उत्तरी हिस्से के मुस्लिम मतदाताओं और दक्षिणी हिस्से में मुस्लिम मतदाताओं के मतदान के विकल्प में काफी अंतर है। जहाँ उत्तर बंगाल के मुस्लिम मतदाताओं की पहली पसंद कांग्रेस पार्टी और आम जनता उन्नयन पार्टी है। वहीं दक्षिणी हिस्से में मुस्लिम मतदाताओं की एकमात्र पसंद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी है। पिछले चुनाव में उत्तर बंगाल के भी मुस्लिम मतदाताओं ने विकल्पहीनता के कारण ममता बनर्जी को मतदान किया था, मगर इस बार इस इलाके के मुस्लिम मतदाताओं ने फिर से कांग्रेस, वाम दल और हुमायूँ कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के लिए मतदान किया है। पश्चिम बंगाल में 40 सीटों पर 39 मुस्लिम विधायक निर्वाचित हुए हैं। हुमायूँ कबीर दो जगहों से निर्वाचित हुए हैं। अतएव 39 मुस्लिम विधायक चुने गए है। कांग्रेस पार्टी के दो विधायक चुने गए हैं जो मुस्लिम वर्ग से है। आम जनता उन्नयन पार्टी से दो सीटों पर कबीर जीते हैं। इंडियन सेक्युलर फ्रंट एक सीट जीतने के साथ ही चार सीटों पर दूसरे पायदान पर रही है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में इस बार पिछले विधानसभा की अपेक्षा कम से कम 40 मुस्लिम विधायक निर्वाचित हुए हैं। 2021 में 44 मुस्लिम विधायक निर्वाचित हुए थे। तृणमूल कांग्रेस के मुस्लिम विधायकों की संख्या 34 है, जबकि पिछले विधानसभा में यह संख्या 43 थी। विगत विधानसभा में सिर्फ एक गैर तृणमूल कांग्रेस विधायक था जो इस बार बढ़कर 6 हो गया है। इनमें आम जनता उन्नयन पार्टी और कांग्रेस पार्टी के दो-दो, माकपा और इंडियन सेक्युलर फ्रंट के एक-एक विधायक शामिल हैं।

केरल में मुस्लिम लीग का रहा है दबदबा

केरल में शुरूआती दौर से ही इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग मुस्लिम मतदाताओं का मत प्राप्त करती आ रही है। कांग्रेस पार्टी से गठबंधन के बाद यूडीएफ गठबंधन को मुस्लिम मतदाताओं का पूर्ण समर्थन मिलता आ रहा है। केरल में 35 मुस्लिम विधायक निर्वाचित हुए हैं जो कुल संख्या बल का 25 प्रतिशत है। इनमें इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग सबसे अधिक 26 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करके 22 सीटों पर जीत दर्ज़ की थी। इस पार्टी के जीते सभी विधायक मुस्लिम हैं। पिछले विधानसभा में विपक्षी और इस बार सत्ता में आई यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के 35 में 30 मुस्लिम विधायक चुने गए हैं। इनमें कांग्रेस के 8 और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के 22 विधायक चुने गए हैं। विगत विधानसभा में सत्तारूढ़ और वर्तमान में विपक्ष में गई माकपा के चार और इसके सहयोगी भाकपा के एक मुस्लिम विधायक चुने गए हैं।

इसे भी पढ़ें: लखनऊ में ‘सौरभ सिंह’ बनकर हिंदू लड़कियों को फंसाता था शोएब, मोबाइल खुलते ही सामने आए चौंकाने वाले राज 

तमिलनाडु में चुने गए 9 मुस्लिम विधायक

तमिलनाडु में 9 मुस्लिम विधायक निर्वाचित हुए हैं। इनमें तमिलगा वेत्री कड़गम और द्रमुक के तीन-तीन, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का दो, कांग्रेस का एक मुस्लिम विधायक निर्वाचित हुआ है। कांग्रेस पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को केरल की तरह ही तमिलनाडु में मुस्लिम मतदाताओ को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पूरे जोर शोर से बढ़ावा दे रही है। तमिलनाडु की रामनाथपुरम लोकसभा की सीट आईयूएमएल लगातार दो बार से कांग्रेस पार्टी के समर्थन से जीत रही है। रामनाथपुरम सीट भी अब केरल के पोन्नानी और मल्लपुरम की तरह ही आईयूएमएल का गढ़ बनती जा रही है।

अब 30 सदस्यीय केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एक ही उम्मीदवार द्रमुक पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज किया है। ये दक्षिण कराईकल से ए एम् एच नज़ीम ने जीत हासिल की है।

Topics: मुस्लिम विधायककेरलमुस्लिम लीगपांच राज्य विधानसभा चुनाव मुस्लिम
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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