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बड़ी आस, बड़ा जनादेश

लगभग 34 साल तक वाममोर्चा सरकार ने और 15 वर्ष तक तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों को बसाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इन दोनों दलों से परेशान वहां के हिंदुओं ने भाजपा को दो तिहाई से भी अधिक बहुमत इस आस के साथ दिया है कि नई सरकार मजबूती के साथ पश्चिम बंगाल की रक्षा करेगी

Written byलेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)लेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)
May 11, 2026, 02:41 pm IST
in विश्लेषण, पश्चिम बंगाल
जीत का उत्सव मनातीं भाजपा की महिला कार्यकर्ता

जीत का उत्सव मनातीं भाजपा की महिला कार्यकर्ता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा को भारी जनादेश मिलना हमारे देश के जीवंत लोकतंत्र में एक और बड़ा मील का पत्थर है। दोनों चरण में लगभग 93 प्रतिशत के रिकॉर्ड मतदान ने स्पष्ट रूप से टीएमसी के 15 वर्ष के शासन के तहत कुशासन से बदलाव का संकेत दिया। लेकिन 200 से अधिक सीटों के साथ भारी जीत सुशासन, आर्थिक विकास और घुसपैठ के समाधान के लिए एक स्पष्ट जनादेश देती है। राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से, पश्चिम बंगाल में भाजपा की डबल इंजन सरकार की बाहरी और आंतरिक सुरक्षा चिंताओं से निपटने में प्रमुख रणनीतिक भूमिका होने वाली है।

असम में भारी जीत के साथ-साथ भाजपा कमोबेश ब्रिटिश काल के बंगाल प्रांत के दायरे में आने वाले पूरे क्षेत्र में शासन करती नजर आती है। ब्रिटिश शासन के दौरान, बंगाल प्रांत या बंगाल प्रेसीडेंसी सबसे बड़ी प्रशासनिक इकाइयों में से एक थी। बंगाल प्रांत पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, असम और वर्तमान बांग्लादेश तक फैला था। आज के पूर्वोत्तर भारत का एक बड़ा हिस्सा उस समय असम का हिस्सा था। झारखंड को छोड़कर इन सभी राज्यों में भाजपा या एनडीए सत्ता में है। इस क्षेत्र में काफी मात्रा में एकरूपता है। इसलिए, डबल इंजन की सरकार न केवल विकास पथ को आगे बढ़ाती है, बल्कि कई सुरक्षा चिंताओं का भी ध्यान रखती है।

भारत में नक्सलवाद के लगभग उन्मूलन के बाद घुसपैठ से खतरा अगला बड़ा सुरक्षा खतरा है। घुसपैठ का खतरा भारत के लिए प्रमुख सुरक्षा निहितार्थों के साथ एक मूक खतरा है। घुसपैठ के आर्थिक निहितार्थ सर्वविदित हैं, खासकर जब यह मौजूदा राजकोषीय संसाधनों पर गंभीर दबाव डालता है। घुसपैठ में निहित सुरक्षा खतरे ने पहले ही राजनीतिक रंग प्राप्त कर लिया है। पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत इस विमर्श को विराम देगी कि घुसपैठ का नक्सलवाद की तरह ही इसके राष्ट्रव्यापी सुरक्षा खतरे में तब्दील होने का खतरा है। इसलिए नक्सलवाद को खत्म करने के बाद भारत में घुसपैठ के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई में पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार का बहुत बड़ा योगदान होगा।

पश्चिम बंगाल में रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए (फाइल चित्र)

घुसपैठ का खतरा

पिछले पांच वर्ष में, भारत ने घुसपैठियों के खिलाफ अपनी ‘डिटेक्ट, डिटेन और डिपोर्ट’ नीति को तेज कर दिया है। फिलहाल स्थानीय राजनीतिक संरक्षण के कारण सफलता दर कम है। स्पष्ट रूप से बांग्लादेश और म्यांमार से आने वाले घुसपैठियों का पता लगाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, क्योंकि ऐसे घुसपैठिए भारत के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा कर सकते हैं। टीएमसी सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर 569 किलोमीटर पर तारबंदी करने के लिए जमीन आवंटित नहीं की थी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तत्काल बाड़ लगाने के लिए इस भूमि का जल्द अधिग्रहण करने का वादा किया है। भारत को पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे राज्यों में घुसपैठ के प्रति एक विचारणीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है। बिहार, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में घुसपैठियों की काफी संख्या है।

असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जनसांख्यिकीय बदलाव की चुनौती एक जुड़ा हुआ मुद्दा है। असम में अब मुस्लिम आबादी 40 प्रतिशत से अधिक है, जबकि 1951 में यह 25 प्रतिशत थी। अनुमान है कि जनसंख्या वृद्धि की इस दर से असम 2041 तक मुस्लिम बहुल हो सकता है। उत्तर बंगाल में संवेदनशील सिलीगुड़ी गलियारे के पास मुस्लिम आबादी में वृद्धि हुई है। यह भी ध्यान देना चाहिए कि बांग्लादेश की सीमा से लगे अधिकांश निर्वाचन क्षेत्र मुस्लिम—बहुल हो गए हैं, चाहे वह असम, पश्चिम बंगाल या बिहार में हों। बांग्लादेश में अधिकांश सीमावर्ती निर्वाचन क्षेत्रों में जमात-ए-इस्लामी ने जीत हासिल की है। इस प्रकार ऐसे सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ते कट्टरपंथ की अतिरिक्त चुनौती भी है।

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार भारत-बांग्लादेश संबंधों को दोनों देशों के लिए अधिक फायदेमंद बना सकती है। भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में नई बीएनपी सरकार के साथ एक सतर्क शुरुआत की है। भारत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में नया उच्चायुक्त नियुक्त किया है। अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि के साथ, श्री त्रिवेदी तीस्ता जल बंटवारे, जल प्रबंधन और बांग्लादेश के साथ व्यापार संपर्क जैसे लंबित मुद्दों को अंतिम रूप देने के लिए बेहतर स्थिति में होंगे। संवेदनशील बांग्लादेश सीमा पर सीमा प्रबंधन को अब तेज किया जा सकता है। साथ ही, घुसपैठियों को वापस भेजने के संवेदनशील मुद्दे को दृढ़ता से संभालने की आवश्यकता है।

पलायन रोकने की आवश्यकता

प्रधानपमंत्री मोदी ने अपने विजय भाषण में यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के मूल निवासियों के पलायन को रोकने की आवश्यकता है।ऐसे अधिकांश लोग दूसरे राज्यों में चले गए, क्योंकि पश्चिम बंगाल ने उन्हें बहुत कम रोजगार के अवसर प्रदान किए। इस तरह के पलायन ने पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में घुसपैठियों की वृद्धि को भी बढ़ावा दिया। इसलिए, बंगाली आबादी को उनके मूल आवास में बसाने के लिए संतुलन बनाने की आवश्यकता है। एक बार जब पश्चिम बंगाल में सुशासन और त्वरित आर्थिक सुधार के संकेत मिलते हैं, तो मूल निवासी जल्दी से अपनी जड़ों की ओर लौट आएंगे। इस तरह के कदम से पश्चिम बंगाल की आंतरिक सुरक्षा की गतिशीलता भी मजबूत होगी।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए भारी जनादेश राज्य और पूर्वोत्तर क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का एक संकेत भी है। ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ की अवधारणा को शुरुआत में ही कुचल दिया जा सकता है। डबल इंजन की सरकार का लाभ भारत के अधिकांश ईस्ट और नॉर्थ ईस्ट को मिलता है। इसलिए, क्षेत्र की आंतरिक और बाहरी कमजोरियों की पहचान करने और अनिश्चित वैश्विक वातावरण में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए यह सबसे उपयुक्त समय है।

Topics: डबल इंजन सरकारडिटेक्टपाञ्चजन्य विशेषनक्सलवाद उन्मूलनकट्टरपंथपलायन रोकनासिलीगुड़ी कॉरिडोरआर्थिक सुधारसीमा प्रबंधनविकास और सुशासनभारी जनादेशघुसपैठ की समस्यापश्चिम बंगालरोहिंग्या घुसपैठिराष्ट्रीय सुरक्षासीमा पार जमात-ए-इस्लामी
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