अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध के बीच ईरान लगातार खाड़ी देशों में हमले कर रहा है। स्थिति को देखते हुए भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) एक ऐसे समझौते पर काम कर रहे हैं, जो लाखों भारतीय कामगारों को फुजैराह बंदरगाह के जरिए सुरक्षित निकालने में मदद करेगा। यह समझौता जल्द ही हस्ताक्षरित होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूरोप यात्रा के दौरान फुजैराह में हो सकता है।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई को यूरोप के लिए रवाना होंगे। उनका कार्यक्रम है- पहले फुजैराह स्टॉपओवर, फिर नीदरलैंड्स, उसके बाद स्वीडन, नॉर्वे और इटली। इस यात्रा में यह नया समझौता दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को और मजबूत बनाने वाला कदम होगा।
क्यों जरूरी है यह समझौता?
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से हाल ही में उड़ानें प्रभावित हुईं और हजारों भारतीय वहां फंस गए थे। अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन भविष्य में किसी भी समस्या के लिए तैयार रहना जरूरी है। फुजैराह बंदरगाह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिम में है, जो इस समय युद्ध का मुख्य चोक पॉइंट बन गया है। अगर हवाई यातायात बंद हो जाए या कोई बड़ी समस्या आए, तो UAE में काम करने वाले भारतीयों को जहाजों के जरिए निकाला जा सकता है। सरकार के हिसाब से यह व्यवस्था बहुत उपयोगी साबित होगी।
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UAE में करीब 43 लाख भारतीय काम कर रहे हैं। पूरे पश्चिम एशिया में करीब 1 करोड़ भारतीय हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोग होने की वजह से सुरक्षित निकासी की कोई ठोस योजना होना बहुत जरूरी है।
फुजैराह का महत्व
फुजैराह सिर्फ निकासी के लिए ही नहीं, बल्कि सामान लाने-ले जाने के लिए भी अहम है। युद्ध की वजह से दुबई बंदरगाह तक पहुंच बंद हो गई थी, इसलिए फुजैराह का इस्तेमाल बढ़ गया। खोर फक्कर दूसरे बंदरगाह का भी इस्तेमाल हो रहा है, जहां से सामान सड़क मार्ग से आगे भेजा जाता है। ईरान ने भी इसी वजह से फुजैराह को निशाना बनाया था। प्रधानमंत्री का यह दौरा UAE को भारत का समर्थन दिखाता है, क्योंकि UAE पर भी ईरान के हमले हुए हैं।
OPEC छोड़ चुका है UAE
इस बीच UAE ने OPEC से बाहर निकलने का फैसला किया है। सऊदी अरब के साथ कुछ मतभेद बताए जा रहे हैं। भारत के UAE के साथ अच्छे रिश्ते हैं, इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को इस स्थिति में फायदा हो सकता है। खासकर इसलिए क्योंकि सऊदी अरब एशियाई देशों से क्रूड ऑयल पर ज्यादा दाम लेता है। यह समझौता दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत आर्थिक, रक्षा और लोगों के स्तर पर संबंधों को और आगे ले जाएगा। फुजैराह पहले इंडिया मि़डिल ईस्ट यूरोप इकोनोमिक कॉरिडोर का भी संभावित शुरुआती पॉइंट था।

















