अमेरिका की स्वतंत्रता के 250वें वर्ष (2026) के उपलक्ष्य में कई भव्य कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है अमेरिका। उससे पहले व्हाइट हाउस में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला। ‘नेशनल डे ऑफ प्रेयर’ के अवसर पर व्हाइट हाउस के प्रांगण में पहली बार गूंजे हिंदू शांति पाठ ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह क्षण न केवल धार्मिक विविधता का प्रतीक बना बल्कि बदलते अमेरिका की एक नई तस्वीर भी पेश कर रहा है।
व्हाइट हाउस में शांति और एकता का संदेश
स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के एक स्वयंसेवक ने इस विशेष प्रार्थना का को पूरा किया। कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने उपस्थित लोगों से ‘अपनी आंखें बंद करने और हाथ जोड़ने’ का आग्रह किया तो पूरा वातावरण एक आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथों से लिए गए इस शांति पाठ में ब्रह्मांड के हर तत्व के लिए शांति की कामना की गई। स्वयंसेवक ने प्रार्थना करते हुए कहा, ‘आकाश और अंतरिक्ष में शांति हो। पृथ्वी पर, जल में और सभी जीवों के लिए शांति हो। प्रकृति और पर्यावरण में शांति बनी रहे।’
उन्होंने कामना की कि स्वर्ग की शांति पूरे ब्रह्मांड में फैल जाए। प्रार्थना में न केवल बाहरी शांति, बल्कि व्यक्तिगत शांति पर भी जोर दिया गया- ‘हम सभी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से शांत और सुखी रहें। प्रार्थना का समापन ‘ॐ शांति शांति शांति सुशांति भवतु…’ के पवित्र उच्चारण के साथ हुआ जिसका बाद में उपस्थित लोगों के लिए अंग्रेजी में अनुवाद भी किया गया।
BAPS और रोबिन्सविले का विशेष जुड़ाव
प्रार्थना का नेतृत्व करने वाले स्वयंसेवक ने रोबिन्सविले, न्यू जर्सी स्थित BAPS फेलोशिप और अपने आध्यात्मिक गुरु हरि मोहन स्वामी महाराज की ओर से व्हाइट हाउस का आभार व्यक्त किया।
BAPS पब्लिक अफेयर्स ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि उन्हें व्हाइट हाउस के ‘नेशनल डे ऑफ प्रेयर’ समारोह में भाग लेकर सम्मानित महसूस हो रहा है।
संगठन ने आगे कहा कि ऐसे क्षण यह दिखाते हैं कि कैसे ‘आस्था, सेवा और साझा मूल्य हमारे समुदायों को मजबूत करना जारी रखते हैं।’
धार्मिक विविधता और 250 साल की आजादी
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब संयुक्त राज्य अमेरिका 2026 में अपनी स्वतंत्रता के 250 वर्ष पूरे करने जा रहा है। अमेरिका की इस ऐतिहासिक यात्रा में यह हिंदू प्रार्थना समावेशिता का एक बड़ा संदेश देती है। प्रार्थना के वीडियो ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त सुर्खियां बटोरी हैं। दुनिया भर के यूजर्स ने इसे अमेरिका की सार्वजनिक घटनाओं में बढ़ती धार्मिक विविधता और प्रतिनिधित्व का प्रतिबिंब बताया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संदेश
इस अवसर पर राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अपना संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की आस्था की परंपरा देश के इतिहास और पहचान से गहराई से जुड़ी हुई है। ट्रंप ने अमेरिकी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान प्रार्थना की भूमिका का जिक्र करते हुए इसे देश की ऐतिहासिक नींव का केंद्रीय हिस्सा बताया।
हिंदू धर्म में ‘शांति पाठ’ केवल शब्दों का समूह नहीं बल्कि एक दर्शन है। व्हाइट हाउस जैसी जगह पर इसका उच्चारण होना कई मायनों में महत्वपूर्ण है।
1. यह प्रार्थना ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरी दुनिया एक परिवार है) के विचार को मजबूती प्रदान करती है।
2. प्रार्थना में प्रकृति और जल की शांति की बात करना आधुनिक समय के पर्यावरणीय संकटों के बीच अत्यंत प्रासंगिक है।
3. अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीय-अमेरिकियों के लिए यह उनकी संस्कृति और आस्था को मिली एक बड़ी मान्यता है।
4. व्हाइट हाउस में गूंजा ‘ॐ शांति’ का यह स्वर केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था बल्कि यह बदलते वैश्विक परिदृश्य में प्राचीन भारतीय ज्ञान की स्वीकार्यता का प्रमाण था।

















