हरिद्वार । विश्व प्रसिद्ध तीर्थनगरी हरकी पौड़ी एवं उत्तरी हरिद्वार क्षेत्र में विगत कुछ वर्षों में निर्मित कुछ संरचनाएं, दुकानों वोट एवं व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्थानीय नागरिकों, संत समाज एवं सामाजिक संगठनों के बीच व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है।
विभिन्न सामाजिक प्रतिनिधियों द्वारा यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या इन निर्माणों एवं गतिविधियों का संचालन नगर निगम/नगर पालिका के प्रचलित बायलॉज, क्षेत्रीय नियमन एवं तीर्थस्थल की पारंपरिक मर्यादाओं के अनुरूप है अथवा नहीं।
जानकारी के मुताबिक पिछले स्थानीय निकाय चुनाव की वोटर लिस्ट में मुस्लिम समुदाय के नाम भी वोटर लिस्ट में दर्ज देखे गए ,जिसे लेकर सनातन समाज में रोष देखा जा रहा है।
तीर्थनगरी की पारंपरिक मर्यादा: विशेष धार्मिक क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों की जांच की मांग
सामाजिक संगठनों का कहना है कि हरिद्वार केवल एक नगर नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जहां की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान को बनाए रखना प्रशासन एवं समाज दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
विशेष रूप से हरकी पौड़ी एवं उत्तरी हरिद्वार क्षेत्र को लंबे समय से विशेष धार्मिक क्षेत्र के रूप में देखा जाता रहा है, जहां नगर निकायों द्वारा समय-समय पर व्यापार, निर्माण एवं गतिविधियों के संबंध में विभिन्न दिशा-निर्देश एवं बायलॉज लागू किए गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी भी प्रकार के व्यावसायिक संचालन अथवा चुनावी वोट गतिविधियां निर्धारित नियमों के विपरीत हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि नगर निगम, मेला प्रशासन एवं जिला प्रशासन इस विषय में स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करें ताकि अनावश्यक भ्रम एवं विवाद की स्थिति समाप्त हो सके।
संत समाज की 5 बड़ी मांगें : प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त नीति जारी करने की अपील
- हरकी पौड़ी एवं उत्तरी हरिद्वार क्षेत्र में रहने वाले सभी गैर हिंदू लोगों के वोट और उनके निवास स्थान के निर्माण की वैधानिक जांच कराई जाए।
- नगर निगम/पालिका बायलॉज एवं क्षेत्रीय नियमों का सार्वजनिक रूप से परीक्षण कर उनकी अनुपालना सुनिश्चित की जाए।
- तीर्थनगरी की सांस्कृतिक एवं धार्मिक गरिमा बनाए रखने हेतु स्पष्ट नीति जारी की जाए।
- किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पाए जाने पर निष्पक्ष एवं विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
- इस विषय को सामाजिक सौहार्द एवं संवैधानिक मर्यादा के अंतर्गत समाधान की दिशा में आगे बढ़ाया जाए।
सामाजिक प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय विशेष के विरुद्ध वैमनस्य उत्पन्न करना नहीं, बल्कि हरिद्वार की प्राचीन धार्मिक पहचान, परंपराओं एवं स्थानीय नियमों की रक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी पक्षों से शांति, कानून व्यवस्था एवं सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील भी की।

















