ISIS Brides returning from Syria arrested । आईएसआईएस को खत्म हुए वैसे तो समय हो गया है और उसके कब्जे से कई लड़कियों को आजाद कराया गया है। मगर फिर भी ऐसी तमाम लड़कियां थीं, जो अपने आप ही इस जिहादी मानसिकता से प्रेरित होकर सीरिया गई थीं और इतिहास के उस काले अध्याय का हिस्सा बनी थी, जिसने हजारों लोगों को मौत की नींद केवल इसलिए सुला दिया था क्योंकि वे इस्लाम का पालन नहीं करते थे।
सीरिया से ऑस्ट्रेलिया वापसी : 13 नागरिकों में शामिल ‘ISIS दुल्हनें’ पुलिस की गिरफ्त में
जिन लोगों ने हजारों यजीदी लड़कियों को सेक्स स्लेव बनाकर रखा, उनके साथ मिलने के लिए कई लड़कियां यूरोप से तो कई और अन्य देशों से भी गई थीं। ऐसी ही कुछ महिलाएं ऑस्ट्रेलिया से भी थी और अब वे लौट चुकी हैं। ऑस्ट्रेलिया की पुलिस ने कहा था कि वे उनका इंतजार कर रही थीं और अब उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।
सीरिया के अलरोज शिविर में कई वर्षों से रह रहे 13 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ऑस्ट्रेलिया वापस गए हैं। इनमें चार महिलाएं हैं और नौ बच्चे हैं। इन्हें आईएसआईएस ब्राइड्स अर्थात दुल्हन कहा जाता है। सीरिया में वे इतने वर्षों से रह रही थीं।
कौन हैं वे चार महिलाएं
यह प्रश्न उठता है कि आखिर वे चार महिलाएं कौन हैं। चार महिलाओं में कवसार अब्बास सबसे बड़ी हैं। इसकी बेटियाँ जाहरा और जैनब भी लौटी हैं। कसवार और जैनब पर आरोप है कि उन्होनें लड़कियों को गुलाम बनाया था। और साथ ही एक पूर्व नर्सिंग स्टूडेंट जनाई सफर भी वापस आ गई है। अब्बास, जहरा और जैनब आठ बच्चों के साथ मेलबर्न लौटी हैं, तो वहीं जनई एक बच्चे के साथ सिडनी लौटी है। सफर 2015 में सीरिया गई थी और उसने एक आईएसआईएस लड़ाके से शादी की थी।
राजनीतिक वाद विवाद
इस घटना को लेकर अब राजनीतिक वाद-विवाद चालू हो गया है। जहां इसे लेकर सरकार का कहना है कि उसका कोई भी लेनादेना इस घटना से नहीं है उसने कोई भी कदम नहीं उठाया है और न ही उसने इन्हें लाने में पहल की है, मगर विपक्ष को इस पर विश्वास नहीं है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार का ही कदम है उन्हें वापस लाना। उनका कहना है कि सरकार ने ही किसी समूह के माध्यम से इन महिलाओं को वापस लाने की पहल की है, जो बहुत खतरनाक हैं। हालांकि ऐसा दावा किया जा रहा है कि कुछ महिलाओं के अनुसार उन्हे आईएसआईएस के साथ जुडने के लिए भरमाया गया, प्रोपोगैंडा किया गया मगर कई महिलाओं के लिए कहा गया कि उन्होनें अपने मन से आईएसआईएस की सक्रिय रूप से प्रोपोगैंडा, नियुक्ति के माध्यम से मदद की और इस आतंकी संगठन की सामाजिक संरचना को बनाए रखने में सहायता की।
यजीदी महिलाओं को बनाया गुलाम: कवसार अब्बास और जैनब पर मानवता के खिलाफ अपराध का आरोप
skynews के अनुसार आईएसआईएस क्राइम के एक पूर्व संयुक्त राष्ट्र इन्वेस्टिगेटर ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों का 2023 में एक यज़ीदी महिला से संपर्क हुआ था, जिसने आरोप लगाया था कि उसे मिस अब्बास के शौहर ने गुलाम बनाया था।
दूसरी महिला, तैसीर ने आरोप लगाया कि उसे एक साल तक उसी घर में गुलाम बनाकर रखा गया और अब्बास के शौहर ने उसके साथ कई बार रेप किया। हालांकि अब्बास के शौहर ने इन आरोपों से इनकार किया था।
और अब कवसार अब्बास ऑस्ट्रेलिया वापस आई है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इन महिलाओं के पुराने बयान भी साझा किये हैं।
बिना पछतावे की वापसी: “सड़कों पर नग्न महिलाएं”, जनाई सफर के पुराने बयानों ने मचाया हंगामा
जनई सफर के विषय में यह कहा जा रहा है कि उसे कभी भी इस्लामिक स्टेट के अधीन रहने पर कोई भी पछतावा नहीं है। और उसने यह भी कहा था कि वह ऑस्ट्रेलिया वापस कभी भी नहीं आएगी और साथ ही उसने यह भी कहा था कि वह नहीं चाहती थी कि उसका बेटा ऑस्ट्रेलिया में बड़ा हो क्योंकि वहां “सड़कों पर नग्न महिलाएं हैं।
जो वीडियो वायरल हुआ है, उसके अनुसार उसने वर्ष 2019 में कहा था कि यह उसका निर्णय था कि वह उस जगह से लौट आए जहां पर सड़कों पर महिलाएं नंगी घूमती हैं।
सफर को मेलबर्न पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया गया है। thetimes के अनुसार 32 वर्षीय सफर को इस्लामिक स्टेट समूह के साथ जुडने के कारण औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है। सफर पर आरोप था कि उसने किसी घोषित संघर्ष क्षेत्र में घुसने या रहने और आतंकवादी संगठन का सदस्य होने का अपराध किया है और उसकी जमानत भी खारिज हो गई। वह 15 जुलाई को अपनी अगली सुनवाई तक जेल में रहेगी।
महिलाओं को सेक्स स्लेव बनाने वाली कवसार अब्बास और उसकी बेटी जैनब को भी मेलबर्न पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया है और वे अभी जमानत की सुनवाई तक जेल में ही रहेंगी। thetimes के अनुसार 54 वर्षीय अब्बास पर आरोप है कि वह 2014 में अपने पति और दो बच्चों के साथ सीरिया गई थी, और फिर एक यज़ीदी महिला को गुलाम के तौर पर खरीदने में शामिल थी। कुल मिलाकर, उस पर मानवता के खिलाफ चार अपराधों का आरोप है।
उसकी बेटी ज़ैनब, 31, पर भी सीरिया जाने के बाद जानबूझकर एक महिला गुलाम को अपने घर में रखने का आरोप है।
चौथी महिला पर न ही कोई आरोप है और न ही गिरफ्तार किया गया है।
आतंक की ‘सामाजिक संरचना’ और घर वापसी पर शुरू हुआ बड़ा राजनीतिक विवाद
इन चारों ही महिलाओ के वापस ऑस्ट्रेलिया आने पर बहसें हो रही हैं और यह कहा जा रहा है कि आतंकी समूह से जुड़े ब्रिटिश परिवार की देश वापसी सरल हो सकती है।
दरअसल सीरिया में जो डिटेन्शन शिविर है, उसे वहाँ की सरकार बंद करना चाहती है, जहां पर इन लोगों को रखा गया है और वहाँ पर रुके लोगों को उनके अपने देश भेजा जा रहा है।
इस पर इनका विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि अपने मन से आतंकी समूह में जुडने गए लोगों को देश में वापस क्यों बुलाया जाए? क्या ये लोग यहाँ पर आतंक नहीं फैलाएंगे?
ऐसे तमाम प्रश्न इन चार महिलाओं और उनके साथ आए बच्चों से उठ रहे हैं, परंतु उत्तर सहज ही संभव नहीं है।

















