भारत रणनीतिक मोर्चे पर अपनी स्थिति को लगातार मजबूत करता जा रहा है। इसी क्रम में चीन से सटे हिमालयी क्षेत्र में बड़ी परियोजना पर काम को शुरू किया गया है। इसके तहत भारत शिंकु ला टनल दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सुरंग बनाने जा रहा है। इस सुरंग को 15,800 फीट की ऊंचाई पर बनेगी और हिमाचल प्रदेश को लद्दाख से जोड़ेगी। इसकी मदद से साल भर सड़क कनेक्टिविटी बनी रहेगी, खासकर सर्दियों में जब बर्फ और भूस्खलन रास्ते बंद कर देते हैं।
15,800 फीट की ऊंचाई पर बनेगी सुरंग
यह सुरंग 15,800 फीट (करीब 4,815 मीटर) की ऊंचाई पर बनी होगी, जो मौजूदा किसी भी मोटरेबल सुरंग से ज्यादा ऊंची होगी। शिंकु ला दर्रे के नीचे बनाई जा रही यह टनल 4.1 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब वाली होगी। यानी दो समानांतर ट्यूब होंगी, जिनमें ट्रैफिक दोनों तरफ से चलेगा। निर्माण कार्य 26 जुलाई 2024 को शुरू हुआ था। इसे अगस्त 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 1,681 करोड़ रुपये है।
कहां बन रही है यह टनल?
शिंकु ला टनल हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी को लद्दाख की जंस्कार घाटी से जोड़ेगी। यह निमू-पदम-दारचा सड़क का हिस्सा है। सुरंग का एक छोर हिमाचल में और दूसरा लद्दाख के पदुम घाटी में होगा। इससे मनाली से लेह की दूरी करीब 60 किलोमीटर कम हो जाएगी। साथ ही, सर्दियों में भी लद्दाख पहुंचना आसान हो जाएगा। फिलहाल कई इलाके सर्दियों में महीनों तक कटे रहते हैं।
कौन बना रहा है यह टनल?
इसका निर्माण बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) कर रहा है। यह ‘प्रोजेक्ट योजक’ के तहत आता है। BRO की जिम्मेदारी है कि सीमा क्षेत्रों में रणनीतिक सड़कें और सुरंगें बनाई जाएं।
सुरक्षा के लिए खास इंतजाम
टनल में हर 500 मीटर पर क्रॉस-पैसेज बनाए गए हैं। ये छोटी सुरंगें मुख्य ट्यूबों को जोड़ती हैं। इनका इस्तेमाल आपात स्थिति में निकासी या रखरखाव के लिए किया जा सकेगा। टनल में लंबवत वेंटिलेशन सिस्टम होगा, जिसमें कम बिजली खर्च होने वाले फैन लगाए जाएंगे।
क्या फायदा होगा?
एक बार यह सुरंग बन जाएगी तो सशस्त्र बलों और सामान की आवाजाही आसान और तेज हो जाएगी, खासकर चीन सीमा के पास। लद्दाख के दूर-दराज के इलाकों, जैसे जंस्कार घाटी के 15 गांवों में साल भर संपर्क बना रहेगा। इससे वहां की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और स्थानीय लोगों की जिंदगी बेहतर होगी।











