दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और कांग्रेस पार्टी नीत धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन की बड़ी हार इन दलों के हिंदू विरोधी मानसिकता के कारण है. तमिलनाडु के मतदाताओं ने इस गठबंधन को हराकर सनातन धर्म के खिलाफ अनर्गल प्रलाप करने वालो दलों के बड़ा संदेश दिया है. तमिलनाडु में प्रगतिशील गठबंधन की बड़ी हार के कारण अब देश के अन्य हिस्सों के दल भी अब अपने हिन्दू विरोधी मानसिकता पर लगाम लगाएंगे.
जनता ने डीएमके को नकार दिया
प्रगतिशील गठबंधन को सत्तारूढ़ दल से सीधे तीसरे पायदान पर पहुंचाना जनता के द्वारा इस पार्टी को बड़ी सजा है. इस तरह की सजा जनता ने 2013 में दिल्ली में कांग्रेस पार्टी को दी थी. इस गठबंधन का दूसरा सबसे बड़ा दल कांग्रेस जिसने 28 सीटों पर चुनाव लड़ा वो वर्तमान के परिणाम के अनुसार महज चार सीटों पर आगे चल रहा है.
टीवीके को दिया जनमत
तमिलनाडु की जनता ने द्रमुक नीत धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन के बजाय उनके खिलाफ सबसे प्रमुख और मजबूत दल टीवीके को बड़ा जनमत देकर इस गठबंधन को अपने व्यवहार में सुधार लाने की सीमा रेखा खींच दी है. धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को भी गठबंधन में अधिक ताकत देने के खिलाफ अपना जनमत दिया है. यह गठबंधन विगत दो बार से तमिलनाडु के रामनाथपुरम लोकसभा सीट से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को उम्मीदवारी देकर इस पार्टी के पांव को केरल की तरह इस राज्य में भी मजबूत करने का भरसक प्रयास कर रहा था, जिसके खिलाफ भी जनता के मन मे बड़ा रोष था.
भाजपा नीत एनडीए दूसरे पायदान पर
वर्तमान परिणाम के रूपरेखा के अनुसार भाजपा नीत एनडीए टीवीके के खिलाफ दूसरे पायदान पर है. इसका सीधा मतलब है कि जनता ने इस गठबंधन को विरोधी दल के रूप में अपनी भूमिका का निर्वाह करने की जिम्मेदारी दी है. आने वाले समय में भाजपा नीत गठबंधन के लिए राज्य की राजनीति से द्रमुक को पूर्णतः समाप्त करके एक नई राष्ट्रवादी राजनीति की शुरुआत करने का सुनहरा अवसर जनता ने दिया है.

















