पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा जा रहा है। दशकों तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के वर्चस्व वाले इस राज्य में भगवा लहर ने पुरानी सभी राजनीतिक परंपराओं को ध्वस्त कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 महीने पहले जो भविष्यवाणी की थी, वह आज हकीकत में बदलती नजर आ रही है। रुझानों से स्पष्ट है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहली बार बंगाल की सत्ता के सिंहासन पर बैठने के बेहद करीब है।
बिहार से बंगाल तक के सफर की भविष्यवाणी
पिछले साल जब बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए (NDA) ने 243 में से 202 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की थी, तब दिल्ली में भाजपा मुख्यालय से प्रधानमंत्री मोदी ने एक भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा था कि जिस तरह गंगा नदी बिहार से होकर बंगाल पहुंचती है, उसी तरह बिहार की यह जीत बंगाल में भाजपा की विजय का मार्ग प्रशस्त करेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि बिहार की जनता ने जंगलराज के खिलाफ जो जनादेश दिया है, उसका असर पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल पर पड़ना निश्चित है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि बंगाल की जीत केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह दक्षिण भारत (केरल, तमिलनाडु) के कार्यकर्ताओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी। पीएम मोदी का वह भाषण आज सार्थक सिद्ध हो रहा है जहां भाजपा ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी बढ़त बनाई है।
पश्चिम बंगाल से आए लेटेस्ट रुझान
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता है। ताजा रुझानों ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने अब तक वहां 193 सीटों की भारी बढ़त बना ली है। वहीं टीएमसी यानि तृणमूल कांग्रेस 97 सीटों पर सिमटी दिख रही है। ये रुझान दिखाते हैं कि भाजपा न केवल बहुमत के आंकड़े को पार कर गई है, बल्कि वह एक मजबूत और स्थिर सरकार बनाने की ओर अग्रसर है। ममता बनर्जी की ‘ममता’ और ‘माटी-मानुष’ का नारा इस बार पीएम मोदी की ‘विकास’ और ‘परिवर्तन’ की लहर के सामने टिक नहीं सका।
टीएमसी के नेताओं ने क्या कहा था?
बता दें कि चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष और स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा के दावों को सिरे से खारिज कर दिया था। कुणाल घोष ने कहा था कि ‘बिहार का समीकरण अलग है और बंगाल का अलग। भाजपा का बंगाल में कोई स्थान नहीं है।’ उन्होंने दावा किया था कि टीएमसी 250 से अधिक सीटें जीतकर सत्ता में वापसी करेगी।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के मायने
हालांकि, आज के नतीजे कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। भाजपा ने बंगाल के ग्रामीण अंचलों, उत्तर बंगाल और मतुआ समुदाय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी पैठ इतनी मजबूत कर ली कि तृणमूल का अभेद्य किला ढह गया। भ्रष्टाचार के आरोप, संदेशखाली जैसी घटनाएं और सत्ता विरोधी लहर (एंटीइनकंबेबसी) ने भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने का काम किया।
बंगाल में भाजपा की जीत का मतलब है कि अब देश के पूर्वी हिस्से में उसका प्रभाव पूरी तरह स्थापित हो चुका है। यह जीत भाजपा की उस चुनावी मशीनरी की सफलता है जिसने जमीनी स्तर पर वर्षों तक काम किया। साथ ही ममता बनर्जी के लिए यह आत्ममंथन का समय है कि उनसे क्या गलती हुई वो कहां चूक गईं।

















