पश्चिम बंगाल का मतदान सिर्फ प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक नया मानक तैयार किया है। पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव में 92.93% के रिकॉर्ड मतदान के कारण चर्चा में है। पश्चिम बंगाल में विगत 2021 के विधानसभा के चुनाव में 81.56% मतदान हुआ था। 2026 में 2021 के अपेक्षा 11.37% ज्यादा मतदान है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अत्यधिक मतदान के बाद ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पार्टी काफी असहज है। उन्हें हारने का डर सता रहा है। ममता बनर्जी को याद है कि 2011 में इन्हीं परिस्थितियों में वाम दलों के सरकार की विदाई हुई थी और तृणमूल कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी थी। 2011 में पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड मतदान हुआ था। उसी तरह 2026 में भी रिकॉर्ड मतदान ने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को परेशान कर दिया है।

पश्चिम बंगाल के इतिहास में 2026 के पूर्व सर्वाधिक मतदान का रिकॉर्ड 2011 विधानसभा चुनाव में था। 2011 में पश्चिम बंगाल में 84.33 फीसदी मतदान हुआ था। विदित हो कि 2011 में अत्यधिक मतदान के कारण 34 वर्षों का वाम दलों की सरकार का अंत हुआ और ममता बनर्जी की सरकार बनी थी। अतएव 2026 का रिकॉर्ड मतदान भी वर्तमान सरकार के अंत और भाजपा सरकार के शुरुआत का संकेत दे रहा है।
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SIR के कारण 2021 के मुकाबले कम मतदाता थे
विदित हो कि इस चुनाव में एसआईआर के कारण विगत 2021 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 51,63,738 कम मतदाता थे। इसके बावजूद भी मतदान अधिक होना वर्तमान सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक लहर का स्पष्ट इशारा है। वर्ष 2021 की तुलना में इस बार 51.63 लाख मतदाता कम होने के बावजूद पिछली बार की तुलना में 36.65 लाख लोगों ने ज्यादा मतदान हुआ तब जबकि किसी भी पक्ष ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है।
भारत के राजनीतिक इतिहास में ऐसे अनेकों उद्धरण है, जब अधिक मतदान के कारण सत्तारूढ़ दल चुनाव हार जाती है। यद्यपि यह नियम भाजपा और एनडीए शाषित राज्यों पर कम ही लागू होता है। मगर इस बार पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के सरकार के खिलाफ एक प्रकार का जनता में रोष शुरुआत से ही परिलक्षित था। भाजपा ने 2021 के विधानसभा चुनाव में राज्य में वाम दलों और कांग्रेस पार्टी का सफाया करके मुख्य विपक्षी दल बनाने में सफलता अवश्य प्राप्त किया था मगर इस बार भाजपा अपने सूक्ष्म रणनीति से सरकार बनाने की ओर अग्रसर है।












