गाँधी परिवार और कांग्रेस पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से एक बहुत बड़ा राजनीतिक निशाना साधा है। गाँधी परिवार ने अधीर रंजन चौधरी और प्रदेश कांग्रेस के कंधे पर सवार होकर 2027 के शुरुआत में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए एक बड़ा राजनितिक खेल खेला है। राहुल गाँधी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को बड़ा संकेत दे दिया है। कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम बाहुल्य इलाकों मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जिलों में ही अपनी पूरी ताकत लगाया है। इन जिलों में कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम मतदाताओं को तृणमूल कांग्रेस पार्टी से अलग करके ममता बनर्जी को बड़ा झटका देने का प्रयास किया है।
2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा के शानदार प्रदर्शन के बाद अखिलेश यादव ने कांग्रेस पार्टी से अपने को किनारा कर लिया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी का अनुसरण करते हुए आम आदमी पार्टी का समर्थन किया था। यह कांग्रेस पार्टी को नागवार गुजरा था क्योंकि दिल्ली में कांग्रेस पार्टी भी अपनी पूरी ताकत से चुनावी मैदान में थी। कांग्रेस पार्टी लगातार दो विधानसभा चुनाव 2015 और 2020 में एक भी सीट नहीं जीतने के बाद 2025 में दिल्ली में अपना खाता खोलने के लिए लालायित थी मगर ममता बनर्जी और अखिलेश यादव ने कांग्रेस पार्टी के मंसूबे पर पानी फेर दिया। पश्चिम बंगाल के विधानसभा के चुनाव के पूर्व यह स्पष्ट हो गया था कि अखिलेश यादव ममता बनर्जी को अपना समर्थन करेंगे।
कांग्रेस की परेशानी की वजह
कांग्रेस पार्टी 2024 के लोकसभा के चुनाव में सपा के अत्यधिक उत्तम प्रदर्शन से काफी परेशान है और पार्टी को उम्मीद है कि 2024 में जिस प्रकार से सपा ने कांग्रेस पार्टी को 17 लोकसभा की सीट लड़ने के लिए दिया था। वैसा सीटों का आवंटन 2024 के प्रदर्शन के कारण इस बार सपा नहीं करेगी। अतएव कांग्रेस पार्टी अभी से ही अखिलेश यादव और सपा पर दबाव बनाने के लिए चाल चलना शुरू कर दिया है।
उत्तर प्रदेश में है कांग्रेस की दयनीय स्थिति
कांग्रेस पार्टी की स्थिति उत्तर प्रदेश में काफी दयनीय है। पार्टी ने 2022 के विधानसभा में अपने बूते 399 सीटों पर चुनाव लड़कर 387 सीटों पर जमानत जब्त करवा चुकी है। महज दो सीट जीती थी और चार सीटों पर दूसरे पायदान पर रही थी। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने 2022 में उत्तर प्रदेश में 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 58 सीटों पर कांग्रेस पार्टी से आगे रही थी। इसके अलावा 62 विधानसभा की सीटों पर कांग्रेस पार्टी नोटा से भी पीछे रही थी। 2022 के विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी अमेठी लोकसभा सीट के अंतर्गत आनेवाली चार विधानसभा की सीटों और राय बरेली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत तीन विधानसभा की सीटों पर कांग्रेस पार्टी की जमानत जब हो गई थी।
अतएव अखिलेश यादव 2024 लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी की चुनाव दर चुनाव मिल रही बुरी हार के मद्देनज़र सीट का आवंटन 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रदर्शन के आधार पर करेगी ना कि 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन के आधार पर जब कांग्रेस पार्टी ने 39 सीटों पर बढ़त बनाई थी।
ममता के बहाने अखिलेश को कांग्रेस का इशारा
गाँधी परिवार और कांग्रेस पार्टी ने ममता बनर्जी के बहाने अखिलेश यादव को साफ़ इशारा दिया है कि अगर उसे 2024 में प्रदर्शन के आधार पर 2027 में सीट आवंटन नहीं करेगी तो पश्चिम बंगाल की तरह ही ममता बनर्जी का राह रोकने में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ेगी। पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने ममता बनर्जी के खिलाफ बयानबाजी करने का कोई भी मौका नहीं गवाया है। उम्मीद के अनुसार उत्तर बंगाल के अनेक मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर ममता बनर्जी को कांग्रेस पार्टी के कारण हार का सामना करना पड़ सकता है। संभव है कि कांग्रेस पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सके मगर तृणमूल कांग्रेस पार्टी को कई सीट कांग्रेस के कारण भाजपा के हाथों खोना पड़ सकता है।

















