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धामी सरकार का फैसला: मदरसों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता जरूरी

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म! 30 जून 2026 के बाद 452 मदरसों की मान्यता समाप्त। धामी सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाया, NCERT पाठ्यक्रम अनिवार्य कर दिया।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by कुलदीप सिंह
May 1, 2026, 11:12 am IST
inउत्तराखंड
Uttarakhand Madarsa board abolished

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड खत्म करके उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन और नए शैक्षिक सत्र के लिए प्राधिकरण और उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेने की अनिवार्य शर्त के बाद राज्य में मदरसा शिक्षा व्यवस्था के खत्म होने की संभावनाएं बन गई हैं। देवभूमि में “मदरसे खत्म ही हो जाएंगे” इस बारे में चर्चाएं इस लिए तेज हो गई है कि शायद ही कोई मदरसा प्रबंध समिति उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड के नॉर्म्स को पूरा कर पाए।

धामी कैबिनेट ने कक्षा 8 तक के लिए जिला विद्यालय समिति को मान्यता का अधिकार दिया है जो कि किसी भी शिक्षण संस्थान के लिए पहले भी था और इंटर तक की मान्यता के लिए राज्य स्तरीय शिक्षा बोर्ड में आवेदन करना होगा। बड़ा सवाल ये है कि मस्जिदों और छोटे छोटे कमरों के निजी भवनों में चलने वाले मदरसों को मान्यता के आवेदन करने से पहले वो दस्तावेज जुटाने होंगे जो कि नियमानुसार चाहिए होंगे।

30 जून को खत्म हो जाएगी मदरसों की मान्यता

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड में कुल 452 मदरसे पंजीकृत हैं, जिनकी मान्यता 30 जून को खत्म हो जाएगी सरकार ने मदरसा बोर्ड को ही खत्म कर दिया है। राज्य में 192 मदरसे ऐसे थे जो कि केंद्र और राज्य सरकार से सहायता प्राप्त थे। वक्फ बोर्ड द्वारा 117 मदरसों को अपने यहां पंजीकृत किया हुआ है। पंजीकृत मदरसों में 46 हजार बच्चे पढ़ रहे थे। इन सभी मदरसों को अब 1 जुलाई से अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से संबद्धता और उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेनी होगी।

जानकारी के अनुसार, पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने जब एक सर्वे करवाया था, तब राज्य में 950 मदरसे चिन्हित हुए यानी तकरीबन 300 मदरसे बिना सरकार की अनुमति के चल रहे थे जिन पर सरकार ने पहले ही ताला जड़ दिया था। उल्लेखनीय यह भी है कि उत्तराखंड में बिहार, असम, यूपी, बिहार, झारखंड आदि राज्यों से मुस्लिम बच्चे लाकर मदरसों में पढ़ाए जा रहे थे, सर्वेक्षण के दौरान इनकी पहचान छुपाए जाने इनके फर्जी आधार कार्ड बनाए जाने और अन्य विषय भी सामने आए। इनका संज्ञान बाल संरक्षण आयोग ने भी लिया और राज्य सरकार को इसकी रिपोर्ट भेजी थी।

धामी सरकार ने अब मदरसों में कबीलाई शिक्षा को रोकने और उसकी जगह उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत निर्धारित NCERT पाठ्यक्रम पढ़ाए जाने का निर्णय लिया। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को देश में पहली बार उत्तराखंड में लागू किया गया है जिसमें अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को भी शामिल करते हुए सरकारी सहायता दिए जाने के रास्ते खोल दिए गए है जो कि भी तक केवल एक विशेष समुदाय को मिला करती थी।

परेशानी में मदरसा संचालक

उत्तराखंड में जो मदरसे संचालित है उन्हें अब शिक्षा बोर्ड से मान्यता के लिए अपने दस्तावेज जुटाने हैं। उत्तराखंड में जो मदरसे अभी चल रहे थे उनके पास नियम के अनुसार भूमि पर्याप्त नहीं है, जो है भी उसके दस्तावेज नहीं के बराबर है। उनके संस्थान पंजीकृत नहीं है उनके पास बीएड टीचर नहीं है, भवन में नॉर्म्स के अनुसार कमरे तक नहीं है। न ही खेल का मैदान है। नियम के अनुसार मदरसों के संचालकों को बैंक के खातों का विवरण, चंदा उगाही और आर्थिक स्रोत के भी ऑडिट करवाने होंगे।

स्मरण रहे कि मदरसे के संचालक न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि खाड़ी देशों से भी इस्लामिक शिक्षा दिए जाने पर आर्थिक सहायता लिया करते हैं। ऐसी भी जानकारी मिलती है कुछ मदरसा संचालक तो बच्चों की दीनी शिक्षा पर कम अपने ऐशो आराम पर ज्यादा खर्च किया करते थे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान

सीएम पी एस धामी कहते हैं उत्तराखंड में अवैध मदरसों बंद करा दिए गए हैं, मदरसा बोर्ड भी खत्म कर दिया गया है, अल्पसंख्यक समाज के बच्चे राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से शिक्षा लेंगे इसके लिए उन्हें अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता संबद्धता लेनी होगी। जो नहीं लेगा उस संस्थान पर ताले जड़ दिए जायेंगे।

अल्पसंख्यक विभाग सचिव

उत्तराखंड अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव डॉ पराग मधुकर धकाते बताते हैं शिक्षा का अधिकार सबके के लिए समान है हमारा प्रयास है कि हर बच्चे को एक समान शिक्षा मिले इसके लिए सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाया है, सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड की मान्यता लेकर बच्चों को पढ़ाई करानी होगी। यदि वो धार्मिक शिक्षा भी देते हैं तो उसके लिए स्लीव्स, प्राधिकरण की शिक्षा समिति तय करेगी। रहा साल नॉर्म्स का वो सबके लिए बराबर है जिसका अनुपालन कराया जाएगा।
इन स्थानों के विकास के लिए उनकी प्रयोग शालाओं के लिए, पुस्तकालयों के लिए सरकार सहयोग देने को तैयार है।

जिला विद्यालय समिति से मान्यता

कक्षा 1-8 तक के स्कूलों के लिए। UBSE से मान्यता सिर्फ 9-12 के लिए है। 1-8 तक का पूरा काम जिला शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय समिति देखती है।

किसे लेना है मान्यता?

1-5 कक्षा: प्राथमिक स्कूल
6-8 कक्षा: उच्च प्राथमिक स्कूल
अगर 1-8 एक साथ: प्राथमिक + उच्च प्राथमिक

जिला विद्यालय समिति से मान्यता के मुख्य नियम

A. जमीन का नियम

शहरी क्षेत्र: कम से कम 2000 वर्ग मीटर = 0.5 एकड़. खेल का मैदान अनिवार्य
ग्रामीण क्षेत्र: 1 एकड़ = 4000 वर्ग मीटर. पहाड़ी इलाके में 500 वर्ग मीटर तक रिलैक्सेशन
जमीन: स्कूल के नाम पर रजिस्ट्री होनी चाहिए। 30 साल की लीज भी चलेगी

B. बिल्डिंग का नियम

कमरे: 1-5 के लिए कम से कम 5 कमरे। 6-8 के लिए 8 कमरे
साइज: हर कमरा कम से कम 20×20 फीट= 400 वर्ग फीट
अन्य: स्टाफ रूम, लाइब्रेरी, टॉयलेट, हैंडपंप/पानी की टंकी, किचन शेड
सेफ्टी: फायर NOC+बिल्डिंग सेफ्टी सर्टिफिकेट। 3 मंजिल से ऊपर नहीं

C. स्टाफ का नियम

टीचर: 1-5 के लिए 1:30 अनुपात 6-8 के लिए 1:35
योग्यता: 1-5 के लिए http://D.El.Ed + TET पास. 6-8 के लिए http://B.Ed + TET पास
हेडमास्टर: 1-5 के लिए 5 साल अनुभव, 6-8 के लिए 8 साल

D. अन्य शर्तें

फीस: सरकार द्वारा तय सीमा से ज्यादा नहीं. SC/ST को फ्री
पाठ्यक्रम: NCERT/SCERT का पाठ्यक्रम अनिवार्य
बच्चे: 1-5 में कम से कम 50 बच्चे 6-8 में कम से कम 30 बच्चे
रिजर्वेशन: 25% सीटें RTE के तहत गरीब बच्चों के लिए फ्री

2. जरूरी दस्तावेज

1. सोसाइटी रजिस्ट्रेशन: 3 साल पुरानी। रिन्यू होनी चाहिए
2. जमीन के कागज: रजिस्ट्री, नक्शा, भू-उपयोग प्रमाण पत्र
3. NOC: ग्राम पंचायत/नगर निगम से
4. बिल्डिंग प्लान: इंजीनियर से पास
5. टीचर स्टाफ: TET पास प्रमाण पत्र, वेतन रजिस्टर
6. सुरक्षा: फायर NOC, बिल्डिंग सेफ्टी
7. बैंक गारंटी: 2 लाख की FDR DEO के नाम
8. प्रबंधन समिति: 9 सदस्य. 2 अभिभावक, 1 महिला, 1 SC/ST अनिवार्य

3. प्रक्रिया- स्टेप बाय स्टेप

Step 1: आवेदन

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में फॉर्म जमा कराना होगा। फॉर्म DEO ऑफिस या शिक्षा विभाग की वेबसाइट से मिलेगा।
फीस: 10,000 रुपये प्राथमिक, 15,000 रुपये उच्च प्राथमिक

Step 2: निरीक्षण

DEO की टीम स्कूल विजिट करेगी। जमीन, बिल्डिंग, स्टाफ चेक होगा। 1 महीने में रिपोर्ट आएगी।

Step 3: जिला विद्यालय समिति की बैठक

DEO की अध्यक्षता में समिति बैठेगी। इसमें MLA, DM का नॉमिनी, अभिभावक प्रतिनिधि होते हैं। अगर सब ठीक है तो प्रस्ताव पास हो जाएगा।

Step 4: NOC जारी

समिति से पास होने के बाद DEO “No Objection Certificate” जारी करता है। ये 3 साल के लिए वैध।

Step 5: मान्यता

NOC के बाद DEO “मान्यता प्रमाण पत्र” देता है। ये 3 साल के लिए। फिर रिन्यू कराना होगा।

4. 2024-25 के नए नियम

1. RTE 2009 अपडेट: अब 1-8 तक के सभी स्कूलों को “समग्र शिक्षा” के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य है। बिना मान्यता के स्कूल अवैध।

2. UDISE कोड: मान्यता मिलने के बाद UDISE कोड लेना होगा। बिना कोड के बच्चे परीक्षा नहीं दे पाएंगे।

3. ऑनलाइन सिस्टम: अब “उत्तराखंड स्कूल मान्यता पोर्टल” पर ऑनलाइन आवेदन। 30 दिन में निपटारा।

4. NEP 2020: जुलाई 2026 से “फाउंडेशनल स्टेज” = 3 साल प्री-प्राइमरी + 2 साल क्लास 1-2. 3-8 साल के बच्चों के लिए “बाल वाटिका” अनिवार्य।

5. क्या-क्या नहीं चलेगा? = मान्यता रद्द

1. बिना टीचर: 30 बच्चों पर 1 टीचर नहीं तो मान्यता रद्द
2. फीस ज्यादा: RTE के तहत 25% बच्चों से फीस नहीं ले सकते
3. बच्चे कम: 1-5 में 50 बच्चे नहीं तो मान्यता रद्द
4. NOC नहीं: ग्राम पंचायत से NOC नहीं तो मान्यता नहीं
5. पाठ्यक्रम बदलना: CBSE/ICSE का पाठ्यक्रम नहीं चला सकते. सिर्फ NCERT/SCERT

6. फीस कितनी?

प्राथमिक 1-5: 10,000 आवेदन + 2 लाख सिक्योरिटी
उच्च प्राथमिक 6-8: 15,000 आवेदन + 3 लाख सिक्योरिटी
रिन्यू: हर 3 साल में 5,000 + 50,000

पहाड़ में 500 वर्ग मीटर जमीन पर भी मान्यता मिल जाती है। 2023 में नियम बदला है।

Topics: उत्तराखंडमदरसाधामी सरकारउत्तराखंड मदरसा बोर्डमदरसा शिक्षा
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