अमेरिका ओर नाटो के बीच रिश्तों में आई खटास लगातार बढ़ती जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मनमानी। इसी क्रम में ट्रंप ने जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने की धमकी दी है। यह बात उन्होंने अपने ट्रूथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करके कही। उन्होंने लिखा कि उनकी सरकार जर्मनी में सैनिकों की संख्या कम करने की संभावना का अध्ययन और समीक्षा कर रही है। फैसला जल्द ही लिया जाएगा।
नाटो विवाद के चलते दी धमकी
यह धमकी NATO देशों के साथ बढ़ते विवाद के बीच आई है। हाल ही में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अमेरिका की ईरान के साथ चल रही बातचीत पर सवाल उठाए थे। मर्ज ने कहा था कि ईरानी बातचीत में बहुत चालाक हैं। वे अमेरिकी टीम को इस्लामाबाद बुलाते हैं और फिर बिना किसी नतीजे के वापस भेज देते हैं। ट्रंप ने मर्ज पर तंज कसते हुए कहा कि चांसलर को लगता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है। उन्होंने लिखा, “मर्ज को पता नहीं है कि वह क्या कह रहा है।” ट्रंप लंबे समय से NATO सहयोगियों पर आरोप लगाते आ रहे हैं कि वे अपनी रक्षा पर पर्याप्त खर्च नहीं करते और अमेरिका को “लूट” रहे हैं।
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नाटो से बाहर निकलने पर कर रहे विचार
इससे पहले 1 अप्रैल को ट्रंप ने कहा था कि वे NATO से पूरी तरह बाहर निकलने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। वजह बताई कि यूरोपीय देश ईरान के मुद्दे और हार्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में अमेरिका-इजराइल के साथ पूरा सहयोग नहीं कर रहे। उन्होंने कुछ सहयोगी देशों को “कायर” भी कहा था। फिलहाल जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की संख्या काफी बड़ी है। 2024 के आंकड़ों के मुताबिक जर्मनी में 35,000 से 50,000 के बीच अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। पूरे यूरोप में अमेरिका के 68,000 से ज्यादा सक्रिय सैनिक हैं, जिनमें जर्मनी सबसे बड़ा हिस्सा रखता है।
ट्रंप की इस पोस्ट से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल से बात की थी। दोनों ने ईरान और हार्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की आजादी पर चर्चा की। मर्ज ने ट्रंप की टिप्पणियों को हल्के में लिया। उन्होंने कहा कि ट्रंप के साथ उनका रिश्ता “जैसा पहले था, वैसा ही अच्छा” है। उन्होंने यह भी कहा कि हार्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से यूरोप को काफी नुकसान हो रहा है।
पुतिन से बातचीत का दावा
ट्रंप ने हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करने का भी जिक्र किया और यूक्रेन में “थोड़ी देर के लिए सीजफायर” की संभावना बताई। यह पूरा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और NATO देशों के रक्षा खर्च को लेकर चल रहा है। ट्रंप बार-बार कहते रहे हैं कि यूरोपीय देश अमेरिका पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं और खुद अपनी सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहे।
अभी अमेरिकी कानून के मुताबिक राष्ट्रपति अकेले NATO से बाहर नहीं निकल सकते। इसके लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है। लेकिन सैनिकों की संख्या घटाने जैसे कदम उठाकर गठबंधन को कमजोर किया जा सकता है।











