1 मई को खुलेगा रहस्यमयी लाटू देवता के कपाट, लोकगीतों से भक्तिमय हुआ क्षेत्र
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1 मई को खुलेगा रहस्यमयी लाटू देवता के कपाट, लोकगीतों से भक्तिमय हुआ क्षेत्र

लाटू देवता के मंदिर के कपाट आगामी 1 मई को दोपहर 1 बजे वैदिक मंत्रोच्चार, लाटू देवता के जयकारों के साथ आगामी 6 माह के लिए आम भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Mahak Singh
Apr 29, 2026, 12:59 pm IST
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मां भगवती नंदा के धर्म भाई लाटू देवता के मंदिर के कपाट आगामी 1 मई को दोपहर 1 बजे वैदिक मंत्रोच्चार, लाटू देवता के जयकारों के साथ आगामी 6 माह के लिए आम भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। जिसके बाद अनुष्ठान 6 महीने तक लाटू देवता की पूजा अर्चना कर सकते हैं। हर साल लाटू देवता मंदिर के कपाट बैसाख के महीने बुद्ध पूर्णिमा को खुलते हैं और 6 माह बाद मंग्शीर्ष पूर्णिमा को बंद कर दिए जाते हैं।

ये है वाण गांव

हिमालय की गोद में सीमांत जनपद चमोली के देवल ब्लॉक में 8 हजार फीट की ऊंचाई में बसा बेहद खूबसूरत हिमालय का अंतिम गाँव है वाण गाँव। लगभग 20 किमी की परिधि के भू भाग में बसा ये गांव ऐतिहासिक धार्मिक परंपराओं का इतिहास समेटे ये गांव अपनी अनमोल सांस्कृतिक विरासत को संजो रहा है। वाण गांव देवल ब्लॉक और नंदानगर ब्लॉक का सरहदी गांव है। हिमालयी महाकुंभ श्री नंदा देवी राजजात का अंतिम बसागत गांव और आखिरी पड़ाव है जहाँ आबादी है इसके बाद निर्जन पदाव शुरू हो जाते हैं। ये गांव मोनाल टॉप, रूपकुंड, बेदनी बुग्याल और आली बुग्याल का बेस कैंप भी है। यहां पर राजजात के समय लाखों पर्यटक यहां नमूने हैं। यहां देवताओं का देव नृत्य और महिलाओं का पारम्परिक लोकनृत्य आकर्षण का केंद्र होता है। लाटू मंदिर के कपाट खुलने पर यहाँ पर श्रद्धालुओं और महिलाओं द्वारा पारम्परिक परिधानों/आभूषणों में मां नंदा और लाटू देवता के लोकगीत और जागरों के संग झोडा, चांचणी लोकनृत्य हर किसी को संकलित कर देता है। यहां के लोग सालों से चली आ रही अपनी परंपराओं का पीढी दर पीढी बखूबी तैयार करते हैं। लाटू देवता के प्रति अपूर्ण आस्था की बानगी है कि सालभर दूर दूर से श्रद्धालुओं का इस मंदिर में तांता लगा रहता है।

ये है मान्यता

कहते हैं कि भक्त की एक ही पुकार पर भगवान दौड़े चले आते हैं, लेकिन भगोती नंदा के धर्मभाई एवं भगवान शिव के साले लाटू की माया ही निराली है। लाटू देवल क्षेत्र (चमोली) के ऐसे देवता हैं, जिनके दर्शन भक्त तो दूर, खुद पुजारी भी नहीं कर सकता। मंदिर के कपाट बैसाख के महीने पूर्णिमा को खुलते हैं और 6 माह बाद मंग्शीर्ष पूर्णिमा को बंद कर दिए जाते हैं। मंदिर के अंदर क्या है, किसी को नहीं मालूम। लाटू देवता पूरे पिंडर/दशोली(आंशिक) क्षेत्र के ईष्टदेव हैं। माना जाता है कि लाटू कन्नौज के गर्ग गोत्र के कान्यकुब्ज ब्राह्मण थे। जब शिव के साथ नंदा का विवाह हुआ तो बहिन को विदा करने सभी भाई कैलाश की ओर चल पड़े। इनमें लाटू भी शामिल थे। मार्ग में लाटू को इतनी तीस (प्यास) लगी कि वह पानी के लिए इधर-उधर भटकने लगे। इस बीच उन्हें एक घर दिखा और वो पानी की तलाश में इस घर के अंदर पहुंच गए। घर का मालिक बुजुर्ग था, सो उसने लाटू से कहा कि कोने में रखे मटके से खुद पानी पी लो। संयोग से वहां दो मटके रखे थे, लाटू ने उनमें से एक को उठाया और पूरा पानी गटक गए। प्यास के कारण वह समझ नहीं पाई कि जिसे वह पानी समझकर पी गए, असल में वह मदिरा थी। कुछ देर में मदिरा ने असर दिखाना शुरू कर दिया और वह उत्पात मचाने लगे। इसे देख नंदा नाराज हो गई और लाटू को कैद में डाल दिया। जहां भगवान लाटू कैद में रहे कालांतर में वही स्थान उनके मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ। पौराणिक लोकगीतों और जागरों में माना जाता है कि एक बार भगवती नंदा और उनके साथ कैलाश जानने वाले लोग वाण से आगे रणकधार से कैलाश जानने का रास्ता भटक जाते हैं जिसके बाद मां भगवती लाटू का स्मरण करती है और आगे जाने का रास्ता प्रशस्त हो पाता है। तत्पश्चात मां भगवती लाटू भगवान से आग्रह करती है कि जब भी 12 बरस में वो कैलाश को ज़ तो वाण से आगे लाटू भगवान ही कैलाश तक उनकी यात्रा की प्राप्ति करेगा। तब से लेकर आज तक वाण गांव से नंदा देवी राजजात यात्रा की प्राप्ति भगवान लाटू ही करते हैं।

होम स्टे और ब्लॉगरों का गांव

हिमालय की तलहटी में बसा वाण गांव भले ही सबसे दूरस्थ गांव हो लेकिन यहां के युवाओं ने प्रदेश और देश दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस गांव के सामाजिक सरोकारों से जुड़े युवा हीरा सिंह गढ़वाली ने सबसे पहले स्वरोजगार के लिए बिष्ट होम स्टे की शुरुआत की थी और आज इस गांव के मजदूरों ने होम स्टे बनाकर स्वरोजगार की उम्मीदों को पंख लगाए हैं। डिजिटल दौर में हिमालय के इस गांव के युवाओं ने ब्लॉगिंग के माध्यम से भी अपनी अलग पहचान बनाई है। गांव की ग्राम प्रधान नंदूली देवी खुद एक प्रसिद्ध ब्लॉगर और यूट्यूबर है। जबकि 2 दर्जन से भी ज्यादा युवा ब्लॉगिंग करते हैं। दूर दूर से स्वयंसेवकों अपनी मनोकामना लेकर लाटू के मंदिर में आते हैं। कहते हैं यहां से रकम मनोकामना जरूर पूरी होती है।

Topics: लाटू देवताNanda Devi Raj Jat YatraLatu Devta Temple Van VillageVan Village Chamoli UttarakhandRecognition of Latu DevtaMysterious Temple of HimalayasUttarakhand NewsUttarakhand Hindi NewsUttarakhand Latest News
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