किसी समय में विश्व के फैशन का केंद्र बना पेरिस इन दिनों माडेस्ट फैशन वीक को लेकर चर्चा में है। माडेस्ट फैशन वीक, अर्थात ऐसे वस्त्रों का संकलन और प्रदर्शन, जो माडेस्ट अर्थात शालीन हैं। और शालीन भी ऐसे कि जिन्हें ढीला ढाले रूप में पहना जा सके, शरीर पूरी तरह से ऊपर से नीचे तक ढका रहे। पेरिस में इस माडेस्ट फैशन वीक का आगाज और समापन हुआ।
अंतरराष्ट्रीय डिजाइनर्स की भागीदारी
इसमें इंडोनेशिया, तुर्की, नाइजीरिया और कई और देशों से डिजाइनर इसमें शामिल थे। माडेस्ट फैशन मे ऐसी पोशाकें होती हैं, जो बाहों, टांगों, और यहाँ तक कि अक्सर बालों को भी ढाकती हैं और मूल रूप से ये मुस्लम महिलाओं के लिए हैं।
बढ़ता हुआ बाजार और वैश्विक विस्तार
मीडिया के अनुसार यह इनदिनों उभरता हुआ बाजार है और जो वर्तमान में 400 बिलियन डॉलर का है। और यह अब अपने बाजार में विस्तार चाहता है। ये फैशन वीक मुस्लिम देशों में अक्सर होते रहते हैं। परंतु फ्रांस में होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह फ्रांस ही है, जहां पर बुर्के और हिजाब पर सार्वजनिक जीवन में प्रतिबंध है। जहां पर बुरकिनी पर भी प्रतिबंध है और स्कूल्स में बच्चों के लिए भी हिजाब पर प्रतिबंध है।
फ्रांस में आयोजन पर उठे सवाल
ऐसे में यह रोचक हो जाता है कि बुर्के और हिजाब पर प्रतिबंध वाले देश में जहां पर यह विचार हो कि धार्मिक जीवन को सार्वजनिक स्थलों से दूर रखना चाहिए, वहाँ पर इस प्रकार की पोशाकों का फैशन वीक मना, जिसका मूल लक्ष्य ही मुस्लिम महिलाएं हैं।
हिजाब को फैशन के रूप में प्रस्तुत करना
जिस हिजाब पर प्रतिबंध है, उसे फैशन के रूप में परोसा गया। यह होटल ले मरोइस में हुई थी। अब इस पर बहस छिड़ी हुई है कि आखिर पेरिस में यह आयोजन क्यों हुआ और इसका विरोध क्यों नहीं हुआ? हालांकि हिजाब को फ्रांसीसी कल्चर के अनुसार प्रस्तुत किया गया, ऐसा डिज़ाइनर्स का कहना था। बीबीसी के अनुसार इस माडेस्ट फैशन वीक कराने वाले मुख्य संगठन की प्रमुख ओजलेम साहिन ने पेरिस को यूरोप में अग्रणी माडेस्ट फैशन की राजधानी कहा।
फ्रांस में मुस्लिम आबादी
गौरतलब है कि फ्रांस में लग्भग से 7.5 मिलियन मुसलमान रहते हैं।
फैशन वीक की थीम और कलेक्शन
इस फैशन वीक की थीम प्रकृति थी। इस फैशन वीक मे तुर्की की डिजाइनर हिकरान ओनल ने फ्लोरल ड्रेस पहना था और रोमांस को अपने कलेक्शन की थीम बताया था। ऑस्ट्रेलिया में भी माडेस्ट ड्रेसेस का ब्रांड है, और इसका नाम है असियां! इसे आइसा हसन ने शुरू किया है। उसका भी कहना था कि उसने ऑस्ट्रेलिया की विरासत के अनुसार ही अपनी ड्रेसेस डिजाइन की हैं।
ब्रांड्स और स्ट्रीट वियर ट्रेंड
फ्रांस के भी कई ब्रांडस इसमे शामिल थे, जैसे कि सौतूरा एवं नूर टर्बनस! इसमें इन्होनें कथित रूप से जेन जेड के लिए ड्रेस पेश की थीं। ये स्ट्रीट वियर थीं और यह ऐसे माडेस्ट ड्रेस इन दिनों लड़कियां पहनती हैं। असियां की तरह नूर टर्बनस ने भी अपने कलेक्शन में हिजाब को मुख्य स्थान दिया था।
बुरकिनी कलेक्शन और विवाद
तुर्किए के स्विम वियर ब्रांड मेयोवेरा ने बुरकिनी के भी कलेक्शन दिखाए। बुरकिनी का अर्थ होता है – बुर्का और बिकनी! अर्थात तैरने के लिए वह पोशाक जिसमें चेहरे को छोड़कर सारा शरीर ढका हुआ होता है। इसे फैशन शो में दिखाया गया, मगर यह फ्रांस में पहले से ही प्रतिबंधित है।
समर्थन और विरोध
जहां एक तरफ इसे लेकर हिजाब पहनने वाली महिलाओं में खुशी है कि उनके हिजाब को कम से कम फैशन में शामिल करके उन्हें बेहतर महसूस कराया जा रहा है तो वहीं सोशल मीडिया पर इस फैशन वीक का विरोध हो रहा है।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
लोग यह प्रश्न उठा रहे हैं कि आखिर कैसे यह फैशन वीक हो सकता है, जब फ्रांस में हिजाब सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबंधित है? टॉमी रॉबिन्सन ने भी एक्स पर लिखा कि देश में हिजाब पर प्रतिबंध और इस तथ्य के बावजूद कि यह पोशाक महिलाओं और लड़कियों के दमन का माध्यम है, फिर भी पेरिस ने इस सप्ताह मोडेस्ट फैशन वीक करवाया, जिसमें कई पोशाकों पर हिजाब का प्रयोग किया गया था। उन्होनें लिखा कि जहां इस्लामिक देशों में लड़कियों को हिजाब न पहनने को लेकर मार डाला जा रहा है, तो वहीं पश्चिमी लिबरल इसे “मोडेस्ट कहते हैं?
फ्रांस के फैशन पर सवाल
लोग इस फैशन शो को फ्रांस का पतन कह रहे हैं। लोगों का कहना है कि आखिर क्यों इस्लामिक मोडेस्टी का प्रदर्शन करती हुई मॉडेल्स इस फैशन शो में सामने आईं? और यह कराया ही क्यों गया? और वह भी पेरिस में? जहां से फैशन की शुरुआत कही जाती है?
सोशल मीडिया प्रतिक्रियाएं
एक यूजर ने लिखा कि पेरिस, जो फ्रांसीसी नज़ाकत का प्रतीक है, अब धीरे-धीरे फैलते इस्लामीकरण का मंच बन गया है। कल जहाँ मिनीस्कर्ट और आज़ादी थी, वहीं आज बुर्का और ‘आकर्षक’ गुलामी है!”
यह पतन बेहद चौंकाने वाला है।
यूजर की टिप्पणी
जीन हैशे नामक यूजर ने लिखा कि आखिर क्यों शोषण और उत्पीड़न के इस प्रतीक को धीरे-धीरे स्वीकार्यता मिल रही है?
What am I looking at? Don’t tell me I know. The slow but certain creep of turning oppression into acceptability.
“Modest Fashion Week” has been held in Paris.
This is “covering women up week” and it is a very dangerous route.
“Modest” implies those of us who don’t cover our…
— Jean Hatchet (@JeanHatchet) April 24, 2026
अंतिम सवाल
लोग कह रहे हैं कि जहां एक तरफ ईरान में लड़कियां इस कारण मारी जा रही हैं कि वे अनिवार्य हिजाब का विरोध कर रही हैं तो वही पेरिस में माडेस्ट फैशन वीक में लड़कियों के सिर ढकी ड्रेस दिखाई जा रही है। ऐसा क्यों हो रहा है?
निष्कर्ष
शायद इस प्रश्न का उत्तर किसी के पास नहीं है, कि केवल इस्लामिक मोडेस्टी के अनुसार इस प्रकार का फैशन शो क्यों हुआ?

















