बद्रीनाथ धाम जाएं तो इन बद्री तीर्थ स्थलों के भी करें दर्शन 
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बद्रीनाथ धाम जाएं तो इन बद्री तीर्थ स्थलों के भी करें दर्शन 

सप्तबद्री एवं कल्पेश्वर केदारनाथ की यात्रा आसानी से हो सकती है

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Apr 27, 2026, 11:52 am IST
inउत्तराखंड, यात्रा
बद्रीनाथ धाम

बद्रीनाथ धाम

चमोली। श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं। अगर आप इस बार बद्रीनाथ धाम के दर्शन करने जा रहे हैं तो आसपास अन्य बद्री तीर्थ स्थलों के भी दर्शन करें। इससे सप्तबद्री यात्रा पूर्ण हो जाएगी। अगर आप पैदल ज्यादा नहीं भी चल सकते हैं तो भी कोई बात नहीं, आपको कही भी ज्यादा चढ़ाई नहीं करनी। बस कहीं 50 -60 सीढ़ियां चढ़ना-उतरना हैं तो कही करीब 300 से 400 मीटर सामान्य सा चढ़ना है।

इस यात्रा में न केवल सप्त बद्री के दर्शन होंगे बल्कि पंच केदार में से एक केदार के आपको दर्शन हो जाएंगे।

बद्रीनाथ : ऋषिकेश से बद्रीनाथ बीच में ही कुछ बद्री मंदिर आते हैं ,पर हम शुरुवात बद्रीनाथ के मुख्य मंदिर से करते हैं जो कि भारत के चार धामों में से एक है। नर -नारायण पर्वत के बीच यह मंदिर बना हुआ है। हिन्दू धर्म का एक सबसे बड़ा धाम है। इसलिए इसके बारे में सबको पता है। बद्रीनाथ से सुबह जल्दी वापसी करें और आगे बताये हुए कार्यक्रम के हिसाब से दर्शन करते हुए जाएं। जब आपके बद्रीनाथ दर्शन हो जाते हैं तो आप वापस जोशीमठ की तरफ ही बढ़ते हैं तो ऋषिकेश की तरफ लौटने वाले इसी रास्ते पर ही एक बद्री मंदिर है, जो है योग ध्यान बद्री।

योग ध्यान बद्री : बद्रीनाथ से केवल 15 किलोमीटर ही आप चलेंगे कि मुख्य रोड पर ही पांडुकेश्वर नामक क्षेत्र में योग ध्यान बद्री मंदिर आ जायेगा। यहां पैदल ही कुछ सीढ़ियां उतरकर पहाड़ी से निचे बने गांव में जाना होगा। पांडवों के पिता पाण्डु की मृत्यु यहीम हुई थी। पाण्डु को अंतिम दिनों में इसी जगह भगवान विष्णु ने दर्शन दिए थे। यहां दो प्राचीन मंदिर के दर्शन आप करेंगे ,जो ASI द्वारा संरक्षित हैं। समय : एक घंटा

नरसिंह बद्री : यह मंदिर योग ध्यान बद्री से आगे बढ़ने पर जोशीमठ के मुख्य बाजार में मिलेगा। यहां विष्णु भगवान् के चौथे अवतार भगवान नरसिंह की पूजा होती है …. यहां जो मूर्ति है उसका एक हाथ क्षीण होता जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि जब यह हाथ धड़ से अलग हो जायेगा तब नर-नारायण पर्वत आपस में मिल जायेंगे और फिर बद्रीनाथ धाम का रास्ता बंद हो जायेगा , तब उनकी पूजा की जायेगी भविष्य बद्री में। समय : तीन घंटे ,जोशीमठ से जोशीमठ।

भविष्य बद्री : जोशीमठ से इसका मार्ग थोड़ा अलग पड़ेगा। जोशीमठ से 16 किलोमीटर दूर निति घाटी में बना हुआ है। मंदिर की समुद्रतल से ऊंचाई 2800 मीटर है और गाड़ी को कुछ जगह कठिन चढ़ाई भी मिलेगी। यहां आपको कुछ 300 -400 मीटर पैदल चलना होगा ,लेकिन यह मंदिर आपको सातों बद्री में सबसे शांत और सुकून भरा लगेगा। चारों तरफ बर्फीली पहाड़ियां ,बड़े बड़े पेड़ ,दूर-दूर तक कोई नहीं सिवाय इस मंदिर के। यहां की मूर्ति धीरे धीरे जमीन से प्रकट होती जा रही हैं जो भविष्य में नर नारायण पर्वत की घटना के बाद पूर्ण प्रकट हो जायेगी। समय : आधा घंटा

वृद्ध बद्री : भविष्य बद्री से फिर जोशीमठ आइये। जोशीमठ से ऋषिकेश की तरफ मात्र 7 किलोमीटर बढ़ेंगे कि दायीं तरफ एक बोर्ड नजर आ जायेगा, जिस पर इस मंदिर का नाम लिखा होगा। यहाँ भी आपको कुछ 100 -150 सीढियाँ चढ़नी-उतरनी होंगी। यहाँ भगवान विष्णु की मूर्ति वृद्ध रूप में हैं क्योंकि इसी जगह उन्होंने नारद मुनि को वृद्ध रूप में दर्शन दिए थे। यहां से आगे बढ़कर आप “हेलंग” जाकर रात रुक जाए। समय : आधा घंटा

ध्यान बद्री एवं कल्पेश्वर केदारनाथ :हेलंग से आपको सुबह जल्दी उर्गम घाटी की तरफ जाना होगा। यह रास्ता काफी टूटा-फूटा और ख़राब मिलता है, यहां एक्सपर्ट ड्राइवर ही गाड़ी चलायें। क्योंकि कई जगहों पर गाड़ी के घुमाव और साथ में चढ़ाई बहुत दुर्गम तरह की मिलेगी। यह जगह सबसे कठिन मानी जाती है। लेकिन इसी एक ही जगह पर ध्यान बद्री और और कल्पेश्वर केदार के दर्शन हो जाएंगे। यहां विष्णु भगवान की मूर्ति ध्यान अवस्था में हैं। समय : 5 से 6 घंटे

आदिबद्री : आप वापस हेलंग आ जाएं और कर्णप्रयाग तक पहुंचे। कर्णप्रयाग से 18 किलोमीटर दूर स्थित हैं आदिबद्री। यह प्रथम बद्री हैं ,यहाँ मंदिरों का एक समूह हैं। पैदल नहीं चलना होगा। कहते हैं बद्रीनाथ से पहले विष्णु भगवान की पूजा इसी जगह बद्री के रूप में होती थी। समय :आधा घंटा

अब आप वापस कर्णप्रयाग पहुंच कर सीधे ऋषिकेश की तरफ आगे बढ़ सकते हैं। इसी तरह आपकी सप्तबद्री एवं एक केदारनाथ की यात्रा आसानी से हो सकती है। उत्तराखंड देव भूमि है, यहां हर पहाड़ी पर देव स्थल हैं और आज नहीं सदियों से यहां पूजा होती चली आ रही है।

Topics: सप्तबद्रीध्यान बद्रीनरसिंह बद्रीभविष्य बद्रीचारधाम यात्राकेदारनाथबद्रीनाथ धामआदिबद्रीकर्णप्रयाग
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