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होम विश्लेषण

#टीसीएस जिहाद : कॉरपोरेट भेड़िये

अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों में ऐसे कुछ लोगों को षड्यंत्रपूर्वक घुसाया गया जो सफेद कॉलर की आड़ में कन्वर्जन, शारीरिक उत्पीड़न जैसे कारनामे कर रहे थे। इन्हें विदेश से मदद और समर्थन मिलने की बात आई है सामने

Written byअरुण कुमार सिंहअरुण कुमार सिंह
Apr 27, 2026, 08:51 am IST
in विश्लेषण, महाराष्ट्र
आरोपियों को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस

आरोपियों को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस

महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा समूह की आई.टी. कंपनी टी.सी.एस. में कार्यरत कुछ हिंदू कर्मचारियों को लेकर अब तक जो बातें सामने आई हैं, वे फिर से एक गहरे षड्यंत्र की ओर संकेत कर रही हैं। वहां के कुछ कर्मचारियों के ही अनुसार, “नमाज पढ़ने और गो-मांस खाने के बाद ही उनके वेतन में वृद्धि की गई।” यह दुस्साहस टी.सी.एस. में कार्यरत उन मुसलमान अधिकारियों ने किया, जिनके पास अपने मातहतों के वेतन में वृद्धि करने का अधिकार था। यानी टी.सी.एस. जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी मेंं काम करने वाले कुछ मुसलमान भी कठमुल्लों की तरह जिहादी मानसिकता से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। इसलिए लोग इसे ‘कॉरपोरेट जिहाद’ कह रहे हैं।

इस मामले की जांच विशेष जांच दस्ता (एस.आई.टी) कर रहा है। एस.आई.टी. ने शिकायतें दर्ज कराने के लिए एक हेल्पलाइन जारी की थी। उसमें अब तक 20 से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार कम से कम 4 महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। सूत्रों का कहना है कि हेल्पलाइन पर आई कई शिकायतें कार्यस्थल पर उत्पीड़न और धार्मिक भावनाएं आहत होने से जुड़ी हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि लोग शिकायत तो दर्ज करा रहे हैं, लेकिन खुद सामने आकर पुलिस के सामने अपना बयान दर्ज नहीं करा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए बयान दर्ज कराना जरूरी है। ऐसा न होने से जांच धीमी चल
रही है।

ऐसे खुलीं परतें

टी.सी.एस. के नासिक कार्यालय में कार्यरत एक युवती ने सबसे पहले 25 मार्च को अपने कार्यस्थल पर सहकर्मियों द्वारा यौन-शोषण और उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए देवलाली कैंप पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। उसके अनुसार ये घटनाएं 2022 से 2026 तक घटीं और इनमें यौन दुर्व्यवहार के साथ-साथ उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य भी शामिल थे।

पिछले दिनों रमजान के दौरान इस लड़की के माता-पिता को उसके बदलते व्यवहार की जानकारी हुई। उसने अचानक जींस और शर्ट को छोड़कर सलवार-कुर्ता पहनना शुरू किया। हिजाब भी पहनने लगी। यही नहीं, रमजान के दौरान वह ‘रोजा’ भी रखने लगी। उसके इस बदले व्यवहार से माता-पिता परेशान हुए। उन्होंने अपनी बेटी से बातचीत की और उसे विश्वास में लेकर सब कुछ समझने का प्रयास किया। बेटी की बातों से उन्हें समझ में आया कि यह तो लव जिहाद का मामला है। इसके बाद उस लड़की ने पुलिस में मामला दर्ज कराया। टी.सी.एस. जैसी कंपनी की एक कर्मचारी ऐसी शिकायत करे, इससे पुलिस भी चौंक गई। पुलिस ने इसे गंभीर मामला मानते हुए जांच शुरू की।

पुलिस का गुप्त अभियान

समाचारों के अनुसार जब पुलिस के सामने पहली बार शिकायत आई तो पुलिस के अधिकारी चौंक गए। इसके बाद पुलिस विभाग ने एक गुप्त अभियान चलाया। एक योजना के अंतर्गत कुछ महिला पुलिस-कर्मियों को टी.सी.एस. में नौकरी दिलवाई गई। उन पुलिस-कर्मियों ने कई दिनों तक कंपनी में कार्य किया और आरोपियों की हरकतों को देखा और उनके विरुद्ध प्रमाण इकट्ठा किए। इसके साथ ही पुलिस ने अन्य कर्मचारियों से आगे आने की अपील की। इसका असर हुआ और कई अन्य लोगों ने भी शिकायतें दर्ज कराईं। उनके आधार पर नौ एफ.आई.आर. दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने 3 अप्रैल को आसिफ अंसारी, शफी शेख, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, तौसिफ अत्तर और दानिश शेख को गिरफ्तार किया। इन लोगों की मददगार और कंपनी में कार्यरत महिला कर्मचारी निदा खान फरार है।
‘कॉरपोरेट में यह सब चलता है’

जैसे-जैसे आरोपियों से पूछताछ आगे बढ़ रही है नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। आरोपी कंपनी में कार्यरत आठ हिंदू महिला कर्मचारियों, जिनमें से दो विवाहिता हैं, का यौन शोषण, अश्लील हरकतें और गलत व्यवहार कर रहे थे। यही नहीं, उन पर मुसलमान बनने का दबाव भी डाल रहे थे। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ितों ने कंपनी के संचालक से शिकायत भी की थी, लेकिन उसने आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की। उल्टा यह कहा गया, ‘कॉरपोरेट में यह सब चलता है।’

मस्जिदों में विशेष प्रशिक्षण

खबरों के अनुसार कंपनी में जो मुसलमान कर्मचारी इस गंदे काम में लगे थे, उन्हें इस काम के लिए मस्जिदों में विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। उन्हें यह बताया गया था कि कैसे हिंदू लड़कियों को अपने जाल में फंसाना है, और उनका धर्म कैसे बदलना है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गिरोह को चलाने के लिए कंपनी के मानव संसाधन विभाग के प्रमुख को पैसे का लालच देकर अपने साथ रखा गया था। यह भी कहा जा रहा है कि एक षड्यंत्र के तहत ही निदा खान को एच. आर. विभाग में नौकरी दिलाई गई थी। इस षड्यंत्र की शुरुआत 2021 में हो गई थी।

खिलाया गो-मांस

कंपनी में कार्यरत मुसलमान कर्मचारी उन हिंदू कर्मचारियों को चिहिन्त करते थे, जो किसी कारणवश परेशान और अकेले रहते थे। यह गिरोह भोजन के समय ऐसे कर्मचारियों को साथ में बैठाता था और बकरे के मांस के नाम पर उन्हें गो-मांस परोसता था। इसके साथ ही गिरोह के लोग उनके सामने हिंदू धर्म की बुराई करते थे और इस्लाम की तारीफ। ये लोग अपने विश्वासपात्र हिंदू कर्मचारियों को कुरान पढ़ने देते थे। साथ ही कहते थे कि इस्लाम अपना लोगे तो कंपनी में अव्छी तरक्की मिलेगी, वेतन बढ़ेगा…। इस गिरोह ने इन सब काम के लिए एक व्हाट्सअप समूह बनाया था। इसमें उन हिंदू महिला कर्मचारियों को भी रखा गया था, जिन्हें किसी ने किसी प्रकार से इन लोगों ने अपने प्रभाव में ले लिया था। इस गिरोह ने हिंदू महिला कर्मचारियों के अश्लील तस्वीर बना ली थी और उनके जरिए उन्हें डरा-धमका कर गलत काम के लिए बाध्य किया जाता था। जिन कर्मचारियों ने उनकी एक नहीं सुनी, उन्हें किसी न किसी बहाने प्रताड़ित किया गया। इस कारण कई हिंदू कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी थी।

आरोपियों पर ये हैं आरोप

  •  रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी एक हिंदू महिला कर्मचारी को परेशान कर रहे थे। पीड़िता के मना करने के बाद भी उन दोनों ने उसके व्यक्तिगत जीवन में हस्तक्षेप किया, उस पर निगरानी रखी और गंदी बातें कर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उस पीड़िता के साथ यह सब चार महीने से हो रहा था।
  •  दानिश शेख, तौसीफ अत्तर और निदा खान पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने और महिला—कर्मियों की धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप है। तौसीफ अत्तर ने विवाह का झांसा देकर युवती से संबंध बनाए, दानिश ने दफ्तर में अश्लील हरकतें कीं। यह मामला जुलाई, 2022 से फरवरी 2026 तक का है।
  • तौसीफ अत्तर पर आरोप है कि वह महिला कर्मचारियों से निजी जीवन पर अश्लील प्रश्न पूछता था और उनसे गंदी हरकतें करता था। यही नहीं, वह हिंदू महिला—कर्मियों के सामने हिंदू देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी करता था। यह मामला 2025 में मई से दिसंबर तक का हैै।
  • शाहरुख, दानिश, रजा और तौसीफ पर आरोप है कि इन लोगों ने हिंदू धर्म का अपमान किया और एक हिंदू महिला कर्मचारी को नमाज पढ़ने के लिए बाध्य किया। यह हरकत 2022 से ही चल रही थी।
  • रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर महिला—कर्मियों को घूरने, गलत इरादे से छूने और निजी जीवन पर अश्लील टिप्पणी करने का आरोप है। शिकायत के बाद भी कंपनी के संबंधित अधिकारी ने इन लोगों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की। रजा और शाहरुख मई, 2023 से ही ऐसी हरकतें कर रहे थे।
  • शफी शेख पर आरोप है कि वह बैठक के दौरान महिला—कर्मियों का अपमान करता था और उन्हें बुरी नजर से देखता था। तौसीफ ने तो एक पीड़िता के वैवाहिक जीवन में बच्चों की अनुपस्थिति के बारे में बहुत ही शर्मनाक टिप्पणी की और जबरन नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की। शफी शेख चार साल से ऐसा कर रहा था।
  •  आरौप है कि शफी शेख और आसिफ अंसारी ने हिंदू महिला कर्मचारियों पर अश्लील टिप्पणियां कीं और उन्हें गलत तरीके से छुआ। तौसीफ पर आरोप है कि उसने महिला—कर्मियों के साथ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। यह मामला दो वर्ष पुराना है।
  •  शफी शेख, तौसीफ अत्तार, शाहरुख कुरैशी, आसिफ अंसारी और रजा मेनन पर आरोप है कि इन लोगों ने एक हिंदू महिला कर्मचारी का पीछा किया, उसके साथ गलत हरकतें कीं और बुरी नजर से छूने का प्रयास किया। ऐसा एक वर्ष से हो रहा था।
  • रजा मेमन और शफी शेख एक हिंदू महिला कर्मचारी के पीछे एक साल पड़े थे। शफी शेख ने उसके सामने शादी करने का प्रस्ताव रखा, जबकि रजा मेमन ने उसके शरीर के बारे में अश्लील टिप्पणियां कीं और उसके शरीर को छूने का प्रयास किया। ऐसा एक साल से हो रहा था।

विहिप ने दी चेतावनी

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बजरंग बागड़ा। साथ में हैं (बाएं से) विनोद बंसल एवं सुरेन्द्र गुप्ता

विश्व हिंदू परिषद के महासचिव श्री बजरंग बागड़ा ने व्यापार और उद्योग से जुड़े शीर्ष निकायों से कॉर्पोरेट जगत में काम कर रही महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने फिक्की, सीआईआई, एसोचैम, आईसीसी, बीसीसी, पीएचडीसीआईआई, नैसकॉम जैसे संगठनों को पत्र लिख कर यह अपील की। उन्होंने कॉर्पोरेट जगत से अनुरोध किया है कि वह महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल का वातावरण बना कर राष्ट्र को प्रगति की नई ऊंचाइयों तक ले जाए।

श्री बागड़ा ने 20 अप्रैल को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में चेताया कि अगर कॉर्पोरेट जगत की नीतियों और उनके क्रियान्वयन में सुधारात्मक कदमों की कमी पाई गई, तो विहिप सभी उपलब्ध संवैधानिक उपायों को अपनाने के लिए विवश होगी। विहिप पूरी निष्पक्षता के साथ ऐसे मामलों पर पैनी नजर रखेगी कि क्या कदम उठाए गए हैं या नहीं उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में व्यापार और उद्योग के शीर्ष निकायों को कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील मामले पर ध्यान देकर उचित कदम उठाने चाहिए। बागड़ा ने उद्योग और व्यापार संगठनों का ध्यान टीसीएस में चल रहे कन्वर्जन के बड़े षड्यंत्र की ओर दिलाते हुए कहा कि ‘शिकारी’ की भूमिका में एक विशेष समुदाय से जुड़े कुछ पुरुष कर्मचारियों ने दूसरे समुदाय की महिला कर्मचारियों के साथ ही पुरुष कर्मचारियों को भी अपना निशाना बनाया। श्री बागड़ा ने कहा कि ये किसी व्यक्तिगत कट्टरपंथी द्वारा किए गए अपराधों के अलग-थलग मामले नहीं हैं, बल्कि सुनियोजित, वित्तपोषित और पेशेवर ढंग से योजनाबद्ध तरीके से सामूहिक षड्यंत्र के मामले हैं। श्री बागड़ा ने यह भी कहा कि विश्व हिंदू परिषद राष्ट्र, संस्कृति और समुदाय के हितों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है। कॉर्पोरेट जगत की ऐसी गंभीर असावधानी, संलिप्तता और चूकों की अनदेखी नहीं की जा सकती। परिषद कार्मिक नीतियों, कार्यप्रणालियों और व्यवहार में तत्काल प्रभावी सुधार की अपेक्षा करती है।

विरोध प्रदर्शन

टी.सी.एस. में हुए हिंदू विरोधी इस षड्यंत्र का विरोध भी जमकर हो रहा है। कई हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने नासिक में विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि ऐसे षड्यंत्रकारियों को कड़ी सजा मिले। यही नहीं, आईटी यूनियन संगठन ‘नैसेंट इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (एन.आई.टी.ई.एस.) ने श्रम और रोजगार मंत्रालय में टी.सी.एस. के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई। इनका असर भी हुआ है। टी.सी.एस. ने सभी आरोपियों को नौकरी से निकाल दिया है। यह भी कहा है कि कंपनी ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी।

इस बीच श्रम विभाग ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है। नासिक जिले के श्रम उपायुक्त विकास माली का कहना है, “इस घटना ने तेजी से विकसित हो रहे नासिक के आईटी क्षेत्र में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यस्थल के वातावरण पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।”

इस प्रश्नचिह्न को दूर करना पुलिस और टी.सी.एस. के अधिकारियों का काम है। अच्छी बात यह है कि एस.आई.टी इस मामले की गहन जांच कर रही है। अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच के केंद्र में निदा खान नामक एक महिला कर्मचारी भी है, जो अभी फरार है। उम्मीद है कि इस मामले की हर तरह से जांच होगी और जो भी दोषी पाए जाएगे, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।

Topics: देवलाली कैंपएफ.आई.आर. (FIR)गुप्त अभियानपाञ्चजन्य विशेषबहुराष्ट्रीय कंपनीटीसीएस जिहादटी.सी.एस. (TCS)कॉरपोरेट जिहादएस.आई.टी
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
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