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‘जय श्रीराम’ और हर हर महादेव की गूंज के साथ तेज हुई किन्नर समाज की ‘घर वापसी’

विभिन्न हिस्सों से आए किन्नरों ने इस्लाम छोड़कर पुनः सनातन हिन्‍दू धर्म को अपनाते हुए ‘घर वापसी’ की घोषणा की।

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी
Apr 25, 2026, 12:40 pm IST
inमध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में किन्नर समाज ने की घर वापसी

मध्य प्रदेश में किन्नर समाज ने की घर वापसी

भारत की सनातन परंपरा सदियों से एक व्यापक जीवनदर्शन के रूप में स्थापित रही है, जहां प्रकृति, चेतना और ब्रह्म के बीच संतुलन को विज्ञान और आध्यात्म के संगम से समझाया गया है। पिछले एक वर्ष में किन्नर समाज के भीतर जो बदलाव देखने को मिल रहा है, वह आज बताता है कि “घर वापसी” के माध्यम से किन्नर समुदाय अपने को कितना अधिक पुन: अपनी जड़ों की ओर लौटने के लिए उत्‍साहित हैं। अब “अस्सलाम वालेकुम” की जगह “जय श्रीराम” और “राम-राम” अभिवादन उनकी नई पहचान बनते जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश के इटारसी स्थित त्रिशालानंद गार्डन में फिर एक बार अखिल भारतीय किन्नर सनातन सम्मेलन इस परिवर्तन की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए सात किन्नरों ने इस्लाम छोड़कर पुनः सनातन हिन्‍दू धर्म को अपनाते हुए ‘घर वापसी’ की घोषणा की।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुद्धिकरण प्रक्रिया

किन्‍नर जगतगुरु काजल ठाकुर के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और अभिषेक के माध्यम से शुद्धिकरण प्रक्रिया संपन्न हुई, जिसमें कि देशभर से आए लगभग 500 किन्नरों ने भाग लिया था। इस संबंध में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और अन्य क्षेत्रों से जुड़े किन्नर अखाड़े के नेताओं का दावा है कि अब किन्नर समाज में “सलाम” की जगह “राम-राम” और “जय श्रीराम” का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। यह बदलाव मानसिकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का संकेत है। जोकि उन्हें अपनी जड़ों के करीब ले जाता है और एक नई आत्मिक संतुष्टि प्रदान करता है।

मध्य प्रदेश के इटारसी में एक भव्य घर वापसी समारोह में, दबाव के चलते इस्लाम धर्म अपनाने वाले सात किन्नरों ने सनातन धर्म में वापसी की।

500 किन्नरों की उपस्थिति में, काजल मां ने उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की। pic.twitter.com/L6LYGTeIPo

— ocean jain (@ocjain4) April 25, 2026

महामंडलेश्वर की उपाधि: धार्मिक नेतृत्व का विस्तार

इस दौरान इटारसी सम्मेलन में सात किन्नरों को “महामंडलेश्वर” की उपाधि प्रदान की गई। इटारसी की पांचाली गुरु को नर्मदापुरम जिले का महामंडलेश्वर बनाया गया, जबकि शांति पिपरिया, डॉली नायक, बेला नायक, तमन्ना नायक और अंजलि नायक को भी इस सम्मान से विभूषित किया गया। यहां पांचाली गुरु ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह मूल रूप से ब्राह्मण परिवार से हैं, लेकिन उन्हें पहले डर और दबाव के कारण इस्‍लाम मजहब में परिवर्ति‍त कर दिया गया था। उनके शब्दों में, “जब मैं अपने मूल हिन्‍दू धर्म में लौटी, तो मुझे एक अलग ही शांति और गर्व का अनुभव हुआ। ऐसा लगा जैसे मैं अपनी पहचान को फिर से पा गई हूँ।”

गुरु काजल ठाकुर : “सनातन में सबका स्थान”

गुरु काजल ठाकुर ने का कहना है कि रामायण, महाभारत और गीता जैसे ग्रंथों में किन्नर समाज का सम्मानजनक उल्लेख मिलता है। उन्होंने स्पष्ट किया, “हमारा उद्देश्य भटके हुए किन्नरों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह सभी को स्वीकार करता है।”

धार्मिक नेतृत्व को पुनर्गठित कर रहा किन्नर समाज

महाशिवरात्रि 2026 के आसपास भोपाल के लालघाटी–वुडगार्डन क्षेत्र में एक विशाल सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें देशभर से आए किन्नरों ने वैदिक हवन और मंत्रोच्चार के साथ सनातन धर्म में वापसी की घोषणा की। इस कार्यक्रम में लगभग 500 किन्नर शामिल हुए। इसी दौरान किन्नर नेता हिमांगी सखी को “पहली किन्नर शंकराचार्य” घोषित किया गया। अन्य नेताओं को भी महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई, जिससे यह संकेत मिला कि किन्नर समाज अब अपने धार्मिक नेतृत्व को पुनर्गठित कर रहा है।

खंडवा: प्रतीकात्मक परिवर्तन का केंद्र

भोपाल के बाद खंडवा जिले का महादेवगढ़ मंदिर इस अभियान का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना। यहाँ किन्नर गुरु वाहिद अहमद, जिन्हें सितारा गुरु के नाम से जाना जाता था, ने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाया। वैदिक अनुष्ठान के बाद उनका नाम बदलकर “सीता” रखा गया।

इटारसी में भव्य घर वापसी! 🚩
मध्य प्रदेश में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम के तहत, दबाव में धर्म परिवर्तन करने वाले 7 किन्नरों ने पुनः सनातन धर्म अपनाया। 500 किन्नरों की उपस्थिति में, काजल माँ द्वारा उन्हें 'महामंडलेश्वर' की उपाधि से विभूषित किया गया। pic.twitter.com/WZFxfkynQk

— अश्विनी (@ashwinpc1302) April 25, 2026

 

मुलताई: सामूहिक वापसी का आयोजन

बैतूल जिले के मुलताई में ताप्ती नदी के उद्गम स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में 50 से अधिक किन्नरों ने घर वापसी की। इस आयोजन में मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र के किन्नरों ने भी भाग लिया। वैदिक शुद्धिकरण और अभिषेक के साथ यह कार्यक्रम एक बड़े सामाजिक संदेश के रूप में सामने आया।

इटारसी: श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी

इटारसी का सम्मेलन इस पूरे अभियान की निरंतरता को दर्शाता है। यहाँ सात किन्नरों की वापसी के साथ-साथ 500 किन्नरों की उपस्थिति ने इसे एक राष्ट्रीय स्तर का आयोजन बना दिया।

उत्तर प्रदेश: धीरे-धीरे फैलता प्रभाव

मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, विशेषकर प्रयागराज, में भी इस बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि के अनुसार, “किन्नर समाज में अब ‘सलाम’ की जगह ‘राम-राम’ का चलन बढ़ रहा है और धार्मिक बदलाव तेजी से हो रहा है।” उनके दावे के अनुसार, पिछले एक-दो वर्षों में लगभग 10,000 किन्नरों ने इस्लामिक रिवाजों को छोड़कर हिंदू जीवनशैली अपनाई है।

वहीं अब इस पूरे घटनाक्रम को अलग-अलग नजरियों से देखा जा रहा है। कुछ लोग इसे “घर वापसी” मानते हैं, तो कुछ इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण के रूप में देखते हैं। एक पक्ष यह भी है कि यह आंदोलन किन्नर समाज को मुख्यधारा में लाने का प्रयास है, जहाँ उन्हें धार्मिक और सामाजिक पहचान के साथ सम्मानजनक स्थान मिल सके।

किन्नर नेता हिमांगी सखी का कहना है कि भजन-कीर्तन, सामूहिक अनुष्ठान और पारंपरिक विधियों के साथ सम्‍पन्‍न हो रही “घर वापसी” यह संदेश देती है कि बदलाव आस्था और पहचान का उत्सव है। इस तरह के आंदोलनों का प्रभाव केवल किन्नर समाज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यापक सामाजिक संरचना पर भी पड़ता है। यही कारण है जोकि आज किन्नर समाज की मुख्यधारा में भागीदारी बढ़ रही है। फिर सरकार भी हमारे हित में अपने प्रयास कर ही रही है।

अपनी बात में हिमांगी सखी ये भी जोड़ती हैं कि “जय श्रीराम”, “राम-राम” और हर हर महादेव के साथ बदलता अभिवादन इस बात का संकेत है कि किन्नर समाज के भीतर एक नया अध्याय शुरू हो चुका है, जहाँ वे अपनी जड़ों, परंपराओं और आध्यात्मिकता के साथ एक नया रिश्ता बना रहे हैं। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि किन्नर समाज के भीतर चल रहा यह परिवर्तन भारतीय समाज के व्यापक विमर्श का हिस्सा बन चुका है; जहाँ आस्था, पहचान और परंपरा तीनों नए सिरे से परिभाषित हो रहे हैं।

 

Topics: घर वापसीसनातन धर्मराम-रामइस्लाम त्यागाकिन्नरों की घर वापसीमध्य प्रदेश इटारसीकिन्नर सम्मेलनकाजल गुरु
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
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