नोएडा हिंसा : उद्योगों पर वामपंथी विषदंत
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होम विश्लेषण

#नोएडा हिंसा : उद्योगों पर वामपंथी विषदंत

नोएडा के औद्योगिक गलियारों में भड़की हिंसा महज मजदूरों का असंतोष नहीं थी, यह शहरी नक्सलियों द्वारा सुनियोजित तरीके से कराया गया। इसकी पटकथा पहले ही लिख दी गई थी

Written byमृदुल त्यागीमृदुल त्यागी
Apr 25, 2026, 02:31 pm IST
in विश्लेषण, उत्तर प्रदेश
हिंसा के दौरान की गई आगजनी और इस मामले का सरगना आदित्य आनंद

हिंसा के दौरान की गई आगजनी और इस मामले का सरगना आदित्य आनंद

नोएडा में 13 अप्रैल को कथित मजदूर हिंसा मामले की ये रिपोर्ट पढ़ने से पहले एक बात दिमाग में बैठा लीजिए। यह सिर्फ समाचार नहीं है। यह चेतावनी है। चेतावनी यह कि जंगलों में दम तोड़ रहा नक्सलवाद अब औद्योगिक शहरों में घुस आया है। यह भी कि मुसलमान, किसान के बाद अब मजदूरों को भड़काकर आग लगाने की साजिश है। दुनिया की सबसे तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था की जड़ों को ‘यूनियनिज्म’ के नाम पर खोखला करने का षड्यंत्र है। अर्बन नक्सल का ऐसा गिरोह, जो देश को उद्योगविहीन और कामगार को बेरोजगार करने का खतरनाक खेल रच रहा है। इस पूरे सिलसिले में फैन्सी से नाम हैं। इन नामों के पीछे छिपे नक्सली चेहरे हैं। डाटा जुटाने, भ्रामक प्रचार और भड़काऊ झूठी खबरों का ऐसा जाल है, जिससे देश को, हर नागरिक को सावधान होना होगा।

नोएडा में चरणबद्ध ढंग से यह साजिश रची गई, अंजाम दी गई। मायने आग लगाई गई। हम उन मुखौटों के पीछे भी झांकेंगे, जहां आपको नक्सली वामपंथ का वो विषधर नजर आएगा, जो देश की खुशहाली को डसने के लिए फुंकार रहा है। वामपंथ एक रक्तबीज है। पूरा देश देख रहा है, हर्षित भी है कि दंडकारण्य में नक्सलवाद की काली रात ढल रही है। विकास और बाकी देश से जुड़ाव का सूर्योदय हो रहा है, ऐसे में नक्सलवाद के रक्तबीज ने नया रूप ले लिया है। पहले इसने वनवासियों और सुदूर इलाके में रहने वाली आबादी को सशस्त्र क्रांति के झूठ में बलि का बकरा बनाया, अब कामगारों की बारी है। अब आगे जो है, एक-एक शब्द गौर से पढ़िए, और सोचिए, कितने साल तक योजना बनाई गई, कैसे उसे जमीन पर उतारा गया।

पहला चरण

इस पूरी हिंसा का मास्टरमाइंड आदित्य आनंद है। एनआईटी जमशेदपुर से बीटेक डिग्रीधारी यह अर्बन नक्सल अपने सर्किल में रस्टी (है न बिल्कुल वामपंथी फ्लेवर वाला) के नाम से जाना जाता है। वह अल्ट्रा लेफ्ट या सरल शब्दों में कहा जाए, तो नक्सली संगठन मजदूर बिगुल दस्ता से जुड़ा है। यह मजदूर बिगुल दस्ता एक ऐसे खतरनाक हिंसक नक्सली संगठन का सजावटी सा नाम है, जो मजदूरों को संपूर्ण क्रांति (यानी जहां काम करते हो, उसी जगह को उजाड़ डालो) का सपना दिखाता है। आदित्य आनंद को नक्सली कमान की तरफ से मजदूरों को क्रांतिकारी तरीके से एकजुट करने की जिम्मेदारी दी गई थी। वह पांच साल से गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा जैसे सघन औद्योगिक इलाकों में सक्रिय है। इसका पहला निशाना नोएडा था, मजदूर बिगुल दस्ते की तरफ से हरी झंडी मिलने के बाद यह जून 2025 में नोएडा में शिफ्ट हो गया। इसका संपर्क वामपंथी विचारधारा वाली सभी ट्रेड यूनियनों से था। इस साजिश के लिए फेज-2 को चुना गया। पिछले आठ महीने में आदित्य आनंद ने इस इलाके की सभी फैक्ट्रियों, उनमें काम करने वाले कामगारों का पूरा डाटा इकट्ठा किया। किस फैक्ट्री में क्या काम होता है, कितनी तनख्वाह, कितने समय में कितनी तनख्वाह बढ़ी, बोनस आदि मिलता या नहीं, जैसी जानकारियां इकट्ठा कीं।

यूट्यूबर और पत्रकार भी गिरफ्तार

दूसरा चरण

आदित्य आनंद और बाकी गुर्गों के पास इस बात का पुख्ता इनपुट था कि कामगारों के बीच वेतन बढ़ोतरी को लेकर सुगबुगाहट है। नोएडा और बाकी औद्योगिक क्षेत्रों में सालाना वेतन वृद्धि हमेशा मार्च के अंत में होती है और यह अप्रैल की तनख्वाह में कामगारों को प्राप्त होती है। पिछले एक साल से वैश्विक हालातों के चलते निर्माण इकाइयां अलग किस्म के प्रेशर में थीं और इस वामपंथी गिरोह को अच्छे से इस बात की जानकारी थी कि अप्रैल में यह असंतोष चरम पर होगा। 31 मार्च और 1 अप्रैल को हिंसा भड़काने की योजना को अंतिम रूप दिया गया। इसके लिए मजदूर बिगुल दस्ते के अहम ओहदेदार रूपेश राय, आदित्य आनंद, मनीषा चौहान आदि ने नोएडा के सेक्टर 37 स्थित अरुण विहार के एक कमरे में बैठक की। इस बैठक में अर्बन नक्सलियों के पांच संगठन मजदूर बिगुल दस्ता, दिशा संगठन, आरडब्लूपीआई, नौजवान भारत सभा और एकता संघर्ष समिति के पदाधिकारी शामिल हुए। ये सब संगठन हिंसक कम्युनिस्ट विचारधारा की पार्टियों के मुखौटे हैं। इसमें तय किया गया कि इस समय कामगारों की वेतन वृद्धि की मांग की आड़ में हिंसा भड़काई जाए। इसके लिए अलग-अलग संगठनों और लोगों को अलग-अलग दायित्व दिए गए। इसी में हिंसा को अमली जामा पहनाने के लिए व्हाट्सएप और अन्य ऐप का इस्तेमाल करने के तरीकों पर फैसला हुआ। इस बैठक में तय किया गया कि यह हिंसा की आग पूरे नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में फैलानी है। इसमें इस बात पर भी विचार हुआ कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर पुलिस की प्रतिक्रिया क्या होगी, और उसका मुकाबला कैसे करना है।

तीसरा चरण

यह 1 से 10 अप्रैल तक चला। हरियाणा सरकार ने कामगारों के न्यूनतम वेतन में 35 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की। इस घोषणा के बाद ये सारे संगठन और इसके पदाधिकारी सक्रिय हो गए। रात दो बजे कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए। क्यूआर कोड जनरेट किया गया। इसके जरिए आदित्य आनंद ने कामगारों का जो डाटा जुटाया था, उसका इस्तेमाल किया गया। हर ग्रुप में क्यूआर कोड के जरिए 800 सदस्यों को जोड़ा गया। हर ग्रुप का अलग नाम रखा गया। ऐसा इसलिए कि अगर एक ग्रुप का राजफाश हो, तो दूसरा काम करता रहे। वर्क्स मूवमेंट जैसे नाम इन ग्रुप्स को दिए गए। इन सभी ग्रुप्स में भड़काऊ मैसेज और भड़काऊ भाषण शेयर किए गए। इस आग को भड़काने के लिए आदित्य आनंद ने खुद कई प्रदर्शनों में भड़काऊ भाषण दिए। अभी तक एसटीएफ और नोएडा पुलिस 18 से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप की पहचान कर चुकी है। कामगारों को बड़ी तादाद में सड़क पर उतारने के लिए मदरसन, रिचा इंडस्ट्री जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयों के वर्कर्स को चिह्नित किया गया। आग लगाने के लिए बाहरी लोग बुलाए गए। इसका खुलासा इसी बात से हो जाता है कि गिरफ्तार किए गए 65 लोगों में से 45 स्थानीय कामगार थे ही नहीं। ये दिल्ली, लखनऊ, फरीदाबाद आदि जगहों से बुलाए गए थे।

चौथा चरण

इस लंबी तैयारी को 13 अप्रैल को अमली जामा पहनाया गया। व्हाट्सएप ग्रुप्स द्वारा संदेश भेजकर सेक्टर 60, 63, 84 और 110 में वेतन वृद्धि की मांग के लिए कामगारों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बुलाया गया। प्रदर्शन में भीड़ जुटते ही नक्सली कामगार संगठनों ने पूरे आंदोलन को हाईजैक कर लिया। भड़काऊ भाषण दिए गए। भीड़ में शामिल इन संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पत्थरबाजी और वाहनों व संपत्ति में आगजनी शुरू कर दी। हिंसक प्रदर्शन करते हुए सड़कें जाम कर दी गईं। जबरन फैक्ट्रियां बंद करा दी गईं। बिल्कुल सुनियोजित तरीके से रूपेश राय, आदित्य आनंद, मनीषा चौहान आदि इस हिंसा को संचालित कर रहे थे। इसी दौरान व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए अलग-अलग इलाकों में पुलिस फायरिंग और कामगारों की मौत की झूठी सूचनाएं प्रसारित होना शुरू हो गईं। हिंसा की आग और भड़क गई।

पांचवां चरण

13 अप्रैल को ही इस पूरी साजिश का पाकिस्तानी कनेक्शन भी सामने आ गया। दो एक्स (ट्विटर) हैंडल-@Proudindiannav (आरुषि तिवारी प्राउड इंडियन) और @Mir_Ilyas_INC (मीर इलयास आईएनसी) भी एक्टिव हो गए। इन दोनों हैंडल से झूठे समाचार फैलाए गए कि “पुलिस फायरिंग में 14-20 मौतें”, “जेन-जी प्रदर्शनकारी मारे गए”। ये अकाउंट 3 महीने पहले ही वजूद में आए थे। एक्स से मांगी गई रिपोर्ट और पुलिस की तकनीकी जांच में पाया गया कि ये वीपीएन के जरिए पाकिस्तान से चलाए जा रहे थे। पूरे मामले में यह भी एक और खतरनाक पहलू है। अर्बन नक्सल अब पाकिस्तान की मदद से देश में आग लगाना चाहते हैं।

छठा चरण

इस मामले में रूपेश राय और मनीषा चौहान को घटना के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया गया। आदित्य आनंद फरार था, जिसे एसटीएफ और नोएडा पुलिस ने 18 अप्रैल को तिरुचिरापल्ली स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में कुल 13 एफआईआर दर्ज हुई हैं। 300 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। खास बात यह है कि दिल्ली के यूट्यूबर हिमांशु ठाकुर और लखनऊ से कथित पत्रकार सत्यम वर्मा को गिरफ्तार किया गया है। ये दोनों मजदूर बिगुल दस्ता से जुड़े थे। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “कुछ हिंसक वामपंथी संगठन और अर्बन नक्सल का नेटवर्क मजदूर आंदोलन को हाईजैक करके हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहा है। मजदूरों के हित किसी सूरत में प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। उनकी रक्षा की जाएगी, लेकिन किसी नक्सली संगठन को इसकी आड़ में हिंसा नहीं फैलाने दी जाएगी।” जरा पहचान लें।

ये कौन से संगठन हैं, जिन्होंने मजदूरों के कंधे पर रखकर बंदूक चलाई है।

मजदूर बिगुल दस्ता

इस पूरे प्रकरण में इस संगठन की मुख्य भूमिका है। इसका कर्ता-धर्ता रूपेश राय है। इसी संगठन से जुड़े आदित्य आनंद ने पूरी जमीनी जानकारी एकत्रित की। यह संगठन मजदूरों के बीच उनका हितैषी बनकर काम करता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य मजदूरों को क्रांति का सपना दिखाकर हिंसा के रास्ते पर लाना है। हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी से पता चला कि यूट्यूबर या पत्रकार का वेश धरकर इसके सदस्य भड़काऊ कंटेंट तैयार करते हैं। यह संगठन भाकपा-माले का आनुषांगिक संगठन माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार यह हिंसक वामपंथी संगठन है। इसकी गतिविधियां गुरुग्राम, फरीदाबाद आदि कई औद्योगिक शहरों में ट्रैक की गई हैं।

दिशा स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन

यह अर्बन नक्सलियों का छात्र मुखौटा है। इसका काम छात्रों और युवाओं को एकजुट करना है। नेपाल और बांग्लादेश में हालिया तख्तापलट की घटनाओं के बाद नक्सली इस संगठन पर खासा ध्यान दे रहे हैं। इसका काम हर मुद्दे पर जेन-जी को भड़काने का हर संभव प्रयास करना है। यह आरक्षण, शिक्षा नीति, छात्रवृत्ति और अन्य सामाजिक मुद्दों पर समाज में युवाओं के बीच असंतोष पैदा करने की नीति पर काम कर रहा है। नोएडा हिंसा की प्लानिंग के दौरान इस पूरे मामले को जेन-जी से जोड़ने का प्रयास किया गया। इसके लिए आदित्य आनंद ने दिशा के सत्तर से अधिक सदस्यों से संपर्क किया था। इसके कई पदाधिकारी नोएडा हिंसा की प्लानिंग की बैठकों में शामिल थे। पुलिस की जांच में पता चला है कि दिशा के ही उकसावे पर कुछ छात्र इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे।

रिवोल्यूशनरी वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया

यह भी क्रांति के नाम पर मजदूरों को भड़काने वाला अर्बन नक्सल संगठन है। यह संगठन माओवादी विचारधारा से प्रेरित है। इसका मानना है कि हिंसा ही समस्याओं का समाधान है। औद्योगिक क्षेत्रों में यह यूनियन गतिविधियों के माध्यम से मजदूरों के बीच सक्रिय है। यह भी नोएडा हिंसा की साजिश में शामिल था। आरडब्लूपीआई के पदाधिकारी बैठकों में शामिल रहे। इसने भी अपने प्रभाव के जरिए कामगारों को प्रदर्शन के लिए एकत्रित किया।

नौजवान भारत सभा

यह युवाओं के बीच सक्रिय अर्बन नक्सल संगठन है। यह संगठन कई कम्युनिस्ट गुटों से जुड़ा हुआ है। पूरी तरह से वामपंथी विचारधारा को फॉलो करता है। हिंसा में विश्वास है, लेकिन मुखौटा क्रांतिकारी भगत सिंह का लगाए हुए है। यह बेरोजगारी, असमानता, शिक्षा के बाजारीकरण और सामाजिक न्याय जैसे मसलों को मुद्दा बनाकर नौजवानों को भड़काता है। इस संगठन पर आरोप है कि इसने नोएडा हिंसा में युवा मजदूरों को भड़काने का काम किया। पुलिस इसे भी बड़े नक्सली नेटवर्क का हिस्सा मान रही है।

एकता संघर्ष समिति

यह एकता और संघर्ष के नाम पर मजदूरों को जोड़ने वाला अर्बन नक्सली संगठन है। यह वामपंथी विचारधारा के अन्य संगठनों से गठबंधन करके काम करता है। यह स्थानीय स्तर पर कामगारों के जो मुद्दे हैं, उन्हें हवा देता है। नोएडा में यह खासतौर पर सक्रिय है। अक्सर विरोध प्रदर्शनों का आयोजन करता है। पुलिस का मानना है कि यह भी अन्य संगठनों के साथ इस हिंसा की साजिश में शामिल था।

Topics: #रिवोल्यूशनरी_वर्कर्स_पार्टी#एकता_संघर्ष_समिति#आदित्य_आनंदपाञ्चजन्य विशेष#रूपेश_राय#नोएडा_हिंसा#मनीषा_चौहान#अर्बन_नक्सल#वेतन_वृद्धि_विवाद#वामपंथी_साजिश#मजदूर_असंतोष#औद्योगिक_अराजकता#मजदूर_बिगुल_दस्ता#दिशा_छात्र_संगठन
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