भारत ने रावी नदी पर 100% नियंत्रण कर लिया: शाहपुर कांडी बांध पूरा, पाकिस्तान बूंद-बूंद को तरसेगा
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होम भारत

भारत ने रावी नदी पर 100% नियंत्रण कर लिया: शाहपुर कांडी बांध पूरा, पाकिस्तान बूंद-बूंद को तरसेगा

भारत ने शाहपुर कांडी बांध पूरा कर रावी नदी पर पूरा नियंत्रण ले लिया है। सिंधु जल समझौता निलंबित होने के बाद अब रावी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान नहीं जाएगा। जानिए मोहरा प्रोजेक्ट और जम्मू-कश्मीर-पंजाब में सिंचाई के फायदे के बारे में।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Apr 24, 2026, 07:44 am IST
inभारत
Pakistan Indus water treaty

प्रतीकात्मक तस्वीर

आखिरकार भारत ने रावी नदी के पानी पर पूरा नियंत्रण कर लिया है। इससे पाकिस्तान को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। शाहपुर कांडी बांध के पूरा होने के बाद अब रावी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान की तरफ नहीं जा रहा है। इसका असर ये हो रहा है कि अब पाकिस्तान बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गया है।

क्या है सिंधु जल समझौता

सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। इसमें तीन पूर्वी नदियों—रावी, सतलुज और व्यास—का पानी भारत को मिला था, जबकि तीन पश्चिमी नदियों—सिंधु, झेलम और चेनाब—का ज्यादातर पानी पाकिस्तान को। इन पूर्वी नदियों से पहले पाकिस्तान को करीब 20 फीसदी पानी मिलता था। संधि के तहत भारत इन नदियों का इस्तेमाल कर सकता था, लेकिन कुछ पानी पहले पाकिस्तान की तरफ चला जाता था।

पहलगाम आतंकी हमले के एक साल बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। इसके बाद भारत ने इन नदियों पर अपना नियंत्रण बढ़ाने के काम तेज कर दिए। पिछले एक साल में तैयारियां पूरी हुईं, जिससे अब रावी नदी पर 100 प्रतिशत कंट्रोल हो गया है।

इसे भी पढ़ें: ट्रंप का सख्त आदेश: होर्मुज स्ट्रेट में माइन्स लगाने वाली किसी भी ईरानी नाव को गोली मार दो

शाहपुर कांडी बांध

पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर शाहपुर कांडी बांध बनकर तैयार हो गया है। यह बांध लंबे समय से बन रहा था, लेकिन पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच विवाद की वजह से देरी हुई। अब इसे पूरा कर लिया गया है। इस बांध के जरिए रावी नदी का पानी कठुआ और सांबा जिलों की तरफ मोड़ा जा रहा है। इससे पहले जो अतिरिक्त पानी माधोपुर हेडवर्क्स से नीचे पाकिस्तान की तरफ चला जाता था, वह अब रुक गया है। जम्मू-कश्मीर के जल संसाधन मंत्री जावेद अहमद राणा ने कहा था कि यह प्रोजेक्ट मार्च 2026 तक पूरा हो जाएगा। अब अप्रैल से यह क्षेत्र की सिंचाई के काम में आ रहा है।

इससे जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों में करीब 32,000 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी। पंजाब में भी 5,000 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन को फायदा होगा। पहले जो पानी बर्बाद होकर पाकिस्तान चला जाता था, अब उसका इस्तेमाल भारत अपनी जरूरतों के लिए कर रहा है।

मोहरा प्रोजेक्ट का असर

रावी के बाद अब मोहरा प्रोजेक्ट भी काम कर रहा है। यह जम्मू-कश्मीर में है और सिंधु बेसिन की नदियों—सिंधु, झेलम और चेनाब—पर काम का हिस्सा है। मोहरा मुख्य रूप से पानी स्टोर करने पर फोकस करता है, बिजली बनाने पर नहीं। पिछले साल से इन नदियों पर काम बढ़ा है। इससे पाकिस्तान की तरफ जाने वाला पानी पहले के मुकाबले काफी कम हो गया है। पहले करीब 80 फीसदी पानी बाहर जाता था, अब उसमें आधी कमी आई है। मोहरा प्रोजेक्ट सिंधु जल संधि निलंबित होने के बाद के कामों का हिस्सा है।

ये बदलाव पाकिस्तान के लिए पानी की समस्या बढ़ा रहे हैं। गर्मियों में पानी की कमी और गहरा सकती है। भारत अब अपनी नदियों के पानी को अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल कर रहा है, जिससे पाकिस्तान को पहले से कम पानी मिल रहा है।

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कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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