देहरादून । उत्तराखण्ड बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष डा0 गीता खन्ना द्वारा मदरसा बोर्ड के समाप्त होने के बाद नए शैक्षणिक सत्र के प्रारम्भ होने पर देहरादून के आजाद कालोनी स्थित के मदरसे का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में आयोग के सचिव, डा0 शिव कुमार बरनवाल व डा0 निशात इकबाल, बाल मनोवैज्ञानिक उपस्थित रही।
निरीक्षण में सामने आई गंभीर अनियमितताएं
निरीक्षण के दौरान बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुडी कई गम्भीर अनियिमित्ताए प्रकाश में आयी, जो कि अत्यंत चिंताजनक है।
बच्चों के रहने और सोने की व्यवस्था पर सवाल
डॉ खन्ना ने बताया कि बच्चों हेतु अस्वच्छ बिस्तरों की व्यवस्था प्रकाश में आई है, जिन्हें बच्चों को मजबूरन सोने हेतु प्रयोग में लाना पडता है। भीषण गर्मी के बावजूद भी बच्चों को रजाई का प्रयोग करना पड रहा है, जो दर्शाता है कि मदरसे द्वारा बच्चों के रहन-सहन पर घोर लापरवाही का सूचक है।
बच्चे के लिये जहां सोने की व्यवस्था की गई है वहीं एक चैकी रखी हुई जिसमें वह पढाई करते है। आधा दिन बीत जाने के उपरान्त भी बच्चे कमरों में सोते हुये पाये गये, जबकि वह पढाई का समय होता है।
शैक्षिक स्तर और संरचना में कमी
उन्होंने बताया कि मदरसे में शैक्षिक स्तर का आंकलन किया गया, जहां गम्भीर असंतुलन प्रकाश में आया। बडी उम्र का छात्र छोटी कक्षा में अध्ययन करता हुआ पाया गया। मदरसे का भवन और आधारभूत संरचना भी संतोषजनक नहीं पायी गई।
मदरसे में कक्षायें बिलकुल भी हवादार नहीं थी। पर्याप्त वेंटिलेशन का अभाव देखा गया। स्वच्छता का भी ध्यान नहीं रखा गया है, जिस कारण बच्चों के स्वास्थ्य में प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की सम्भावना है।
शिक्षकों की कमी और अनियमितता
उन्होंने आगे कहा कि मदरसे प्रबन्धन द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा दो शिक्षकों को नियुक्त किया गया है, जिसमें से एक शिक्षक उपस्थित नही थे। उसने दुरभाष पर वार्ता में उनके द्वारा अवगत कराया गया कि वह पैशे से वकील है, किन्तु उन्हें जब भी समय मिलता है वह बच्चों को हिन्दी, अग्रेजीं व मैथ्स पढाने मदरसे पहुंच जाते है। मदरसे में अन्य कोई विशेष शिक्षक नही देखा गया। मदरसे में कुछ बच्चे बिहार से भी आकर पढाई कर रहे है, जो कि प्रश्नगत है। मदरसे मे कुछ बच्चे मेहुंवाला के भी दिखाई दिये।
शिक्षण सामग्री का अभाव
उन्होंने बताया कि मदरसे में शिक्षण सामग्री का भी अभाव देखा गया। छात्रों के लिये मदरसे में गणित, अंग्रेजी और हिन्दी जैसे विषयों की किताब नहीं पायी गई उनके द्वारा बताया गया कि मदरसें मे मुख्य रूप से कुरान शरीफ की शिक्षा प्रदान की जाती है।
कुछ मजहबी पुस्तकें अलमारी में रखी हुइ थी, किन्तु उन्हें पवित्र बताते हुये व सामान्य प्रयोग की न होने का कहकर दिखाई नही गई।
शिक्षा पर लापरवाही के संकेत
शिक्षण साम्रगी, किताबों का अभाव देखकर प्रतीत होता है कि मदरसे द्वारा बच्चों के शिक्षण पर विशेष ध्यान नही दिया जा रहा है, जो कि उनके शैक्षणिक भविष्य के साथ पूर्णतः खिलवाड है।
रसोई व्यवस्था और साफ-सफाई की स्थिति
मदरसे की रसोई व्यवस्था का भी निरीक्षण किया गया, जहां साफ सफाई की अत्यंत कमी देखी गई। उपस्थित रसोईये द्वारा अवगत कराया गया कि वहा रोजाना लगभग 65 लोगों का भोजन तैयार किया जाता है।
उन्होंने बताया इसके अतिरिक्त मदरसे के संचालन सम्बन्धी दस्तावेजों को भी दिखाये जाने हेतु कहा गया, जो कि नही दिखाये गये, जिस कारण मदरसे के संचालन की वैधता भी संदेह के घेरे में है।
मदरसे में उपस्थित कर्मचारियों द्वारा बच्चों को रखने और शिक्षण कार्य संचालित करने के लिये आवश्यक अनुमति है अथवा नही के दस्तावेज भी प्रस्तुत नही किये गये।
पंजीकरण और वैधता पर सवाल
संस्थान यू-डाईज में रजिस्टर है तो उसके अनुरूप पाठयक्रम और व्यवस्थाओं के अनुसार संचालन क्यों नही किया जा रहा है और यदि संस्थान यू-डाईज में पंजीकृत नही है तो बिना पंजीकरण के संस्थान को किस प्रकार संचालित किया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान मदरसा प्रबन्धन द्वारा संतोषजनक अभिलेख प्रस्तुत नही किये गये, जिससे यह स्पष्ट नही हो सका कि मदरसा पूर्व में मदरसा बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत था अथवा नही।
नियमों की अनदेखी और गंभीर चिंताएं
अंत में डा. गीता खन्ना ने कहाकि सरकारी नियम क़ानून की ऐसी अनदेखी दुर्भाग्यपूर्ण है और बाहर से बच्चों का आना ह्यूमन ट्रैफ़िकिंग का मामला भी देखना होगा हॉस्टल चलाने के नियम के अनुसार ही बच्चे रहने चाइयें और ग़रीब बच्चों के लिए बहुत से सरकारी आवासीय सुविधाएँ हैं।
मुख्यधारा से वंचित ये बच्चे कल राष्ट्र निर्माण में कैसे भागीदार बनेंगे।

















