Nepal: गृह मंत्री Gurung सरकार से बाहर, एक महीने में दो मंत्रियों का इस्तीफा! Balen Govt की स्थिरता पर मंडराने लगे बादल
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Nepal: गृह मंत्री Gurung सरकार से बाहर, एक महीने में दो मंत्रियों का इस्तीफा! Balen Govt की स्थिरता पर मंडराने लगे बादल

गुरुंग की विपक्षी नेतओं की गिरफ्तारी की कार्रवाई ने विपक्ष को नाराज किया था, और अब उनके इस्तीफे से सरकार की छवि पर असर पड़ने की पूरी संभावना है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Apr 23, 2026, 02:33 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
सुदान गुरुंग (File Photo)

सुदान गुरुंग (File Photo)

नेपाल में बालेन शाह सरकार को कुर्सी संभाले अभी महीना भर भी नहीं हुआ कि दो मंत्री इस्तीफा देकर सरकार से बाहर आ चुके हैं। ताजा मामला युवा गृह मंत्री सुदान गुरुंग के इस्तीफे का है। उन्होंने 22 अप्रैल 2026 यानी कल अपने पद से इस्तीफा दिया है। उन्हें कार्यभार संभाले एक महीने से कम वक्त हुआ था। प्रत्यक्षत: तो गुरुंग ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में निवेश से जुड़े सवालों और अन्य मामलों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया है। उन्होंने लिखा, “मेरे लिए नैतिकता पद से बड़ी है और जनता का विश्वास उससे भी बड़ा। सार्वजनिक जीवन स्वच्छ होना चाहिए, नेतृत्व जवाबदेह होना चाहिए।”

यह बालेन सरकार के दूसरे मंत्री का इस्तीफा है, जो मार्च 2026 के अंत में सत्ता संभालने के बाद से जारी अस्थिरता को दर्शाता है। गुरुंग ने अपने इस्तीफे की जो भी वजह बताई हो, कुछ आलोचकों का कहना है कि मामला इससे कहीं अधिक लगता है। उधर विपक्षी दलों ने गुरुंग के विरुद्ध वित्तीय गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग करके सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार सरकार एक जांच समिति गठित करने का मन बना चुकी है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह (बाएं) को अब गृह मंत्रालय संभालना पड़ेगा, जो सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का संवेदनशील विभाग है

उल्लेखनीय है कि युवा और Gen Z के चहीते Sudan Gurung ने 27 मार्च को शीतल निवास, काठमांडू में पदभार ग्रहण किया था। प्रधानमंत्री की प्रेस सलाहकार दीपा दहल ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और फिलहाल गृह मंत्रालय का प्रभार वह खुद संभालेंगे। गुरुंग 38 वर्षीय युवा नेता हैं, जो हाल ही में चर्चा में आए थे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और उनके गृह मंत्री रमेश लेखक को सितंबर 2025 में जेन जी के विरोध प्रदर्शनों में कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। यह कार्रवाई बालेन शाह सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी छवि को मजबूत करने का प्रयास थी।

बालेन का उदय और सरकार की पृष्ठभूमि
रैपर से राजनेता बने 35 साल के बालेन शाह ने अपनी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के दम पर पिछले महीने संसदीय चुनाव में भारी जीत हासिल की थी। तीन साल पुरानी यह पार्टी भ्रष्टाचार नियंत्रण, अच्छी सरकार और पारदर्शिता के वादों पर सत्ता में आई है। काठमांडू के तीन साल के मेयर कार्यकाल में शाह ने कई सुधार कार्यक्रमों से लोकप्रियता हासिल की थी, जैसे सड़कें साफ रखना, कचरा प्रबंधन और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना। चुनाव के बाद जारी उनकी पार्टी के 100-सूत्रीय सुधार एजेंडे में भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख रखा गया है। इस महीने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अगुआई में पांच सदस्यीय आयोग गठित किया गया है, जो राजनेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की जांच करेगा।

इस्तीफा देने के बाद सिंह दरबार से बाहर आते गुरुंग

बालेन सरकार शुरुआत से ही चुनौतियां का सामना करती आ रही है। इस महीने की शुरुआत में श्रम मंत्री दीपक कुमार साह को पद से हटाया गया था। आरएसपी ने आरोप लगाया था कि उन्होंने अपनी पत्नी को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के निदेशक मंडल में नियुक्ति दिलाने के लिए पद का दुरुपयोग किया था। बता दें कि ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक में 180 देशों में नेपाल 109वें स्थान पर है, और ये बात सरकार के एजेंडे को चुनौती देती है।

सुदान गुरुंग के इस्तीफे की वजह और प्रभाव
गुरुंग ने इस्तीफे में निवेश संबंधी सवालों का जिक्र किया, लेकिन विस्तार से कुछ नहीं बताया है। उन्होंने कहा कि इन सवालों की जांच होनी चाहिए। यह इस्तीफा संपत्ति जांच आयोग के गठन के ठीक बाद आया, जो संयोग नहीं लगता। गुरुंग की विपक्षी नेतओं की गिरफ्तारी की कार्रवाई ने विपक्ष को नाराज किया था, और अब उनके इस्तीफे से सरकार की छवि पर असर पड़ने की पूरी संभावना है। प्रधानमंत्री शाह को अब गृह मंत्रालय संभालना पड़ेगा, जो सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का संवेदनशील विभाग है।

सरकार की स्थिरता पर सवाल
राजनीतिक विशेषज्ञ नेपाल की इस नई सरकार की स्थिरता पर चिंता जता रहे हैं। काठमांडू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. भीम भट्टराई कहते हैं, ”बालेन शाह की सरकार युवा ऊर्जा से भरी है, लेकिन एक महीने में दो मंत्रियों का जाना स्थिरता के लिए खतरे की घंटी है। भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडा अच्छा है, लेकिन आंतरिक जांच के नाम पर गुटबाजी न हो। आरएसपी जैसी नई पार्टी को गठबंधन और अनुभव की कमी महसूस हो रही है।” भट्टराई के अनुसार, ओली की गिरफ्तारी ने नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल को एकजुट कर दिया है, जो संसद में अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं।

युवा और Gen Z के चहीते सुदान गुरुंग ने 27 मार्च को शीतल निवास, काठमांडू में पदभार ग्रहण किया था।

इस मुुद्दे पर राजनीतिक विश्लेषक इशा नेपाल ने कहा, “सुदान गुरुंग का इस्तीफा नैतिकता के पलड़े पर तोला लगता है, लेकिन यह सरकार की कमजोरी भी दिखाता है। शाह का मेयर कार्यकाल स्थानीय प्रभाव वाला था, राष्ट्रीय स्तर पर चुनौतियां अलग होती हैं। ट्रांसपेरेंसी इंडेक्स में सुधार के लिए संस्थागत बदलाव चाहिए, न कि सिर्फ इस्तीफे। इस सरकार के लिए अगले छह महीने महत्वपूर्ण होंगे, अगर आयोग प्रभावी रहा, तो सरकार मजबूत हो सकती है, वरना अस्थिरता बढ़ेगी।”

पूर्व राजदूत विनय शर्मा का मत है, ”यह सरकार ‘रैपर पॉलिटिक्स’ की परीक्षा है। युवा नेतृत्व आकर्षक है, लेकिन निवेश के सवालों से बचना होगा। नेपाल की राजनीति की जड़ों तक भ्रष्टाचार है; शाह को विपक्ष से समझौता करना पड़ सकता है। एक महीने में दो इस्तीफों से गठबंधन की संभावना बढ़ गई है।” शर्मा ने चेतावनी दी कि अगर ओली समर्थक सड़क पर उतरे, तो सरकार की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।

नेपाली अर्थशास्त्री डॉ. श्वेता राणा (File Photo)

नेपाली अर्थशास्त्री डॉ. श्वेता राणा ने आर्थिक नजरिए से विश्लेषण किया, ”सरकार की अस्थिरता निवेशकों को डराएगी। नेपाल की जीडीपी वृद्धि 4 प्रतिशत के आसपास है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता से पर्यटन और रेमिटेंस प्रभावित होंगे। शाह को सुधारों पर फोकस रखना चाहिए, न कि केवल जांच पर।”

आगे हैं और चुनौतियां
बालेन सरकार को अब नया गृह मंत्री चुनना होगा, जो भरोसेमंद हो। संपत्ति आयोग की रिपोर्ट तय करेगी कि कितने नेता जांच के दायरे में आएंगे। उधर विपक्ष ओली की रिहाई और जांच की मांग कर रहा है। नेपाल की राजनीति में अस्थिरता आम बात है, पिछले दशक में 13 प्रधानमंत्री बदले हैं। लेकिन शाह की युवा अपील और सोशल मीडिया उपस्थिति सरकार के लिए फायदेमंद हो सकती है।

विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि अगर शाह आंतरिक कलह रोक सके और सुधार लागू कर सके, तो सरकार शायद दो साल चल सकती है। अन्यथा, मध्यावधि चुनाव की नौबत आ सकती है। नेपाल को स्थिर सरकार चाहिए, जो भूकंप, बाढ़ और आर्थिक चुनौतियों से निपटे।

Topics: kps olibalen shahबालेन शाहसुदान गुरुंगgurungनेपालcorruptionnepalkathmanduresignationnepali congress
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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