देहरादून: भारत में चीन निर्मित सीसीटीवी कैमरों को लेकर सावधानियां बरती जा रही है कि उनकी चिप से चीन आसानी से जासूसी कर सकता है, पिछले कुछ समय से इन सीसीटीवी कैमरों को बदले जाने की कवायद भी चल रही है। लेकिन, दूसरी ओर भारत के पड़ोसी राष्ट्र नेपाल ने अपनी सीमा से भारत पर निगरानी रखने के लिए चीन की मदद से ऐसे दूरबीन कैमरे लगा दिए हैं जो कि कई किमी तक भारत की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।
पाकिस्तान-बांग्लादेश ही नहीं, नेपाल भी बन रहा खतरा
गृह मंत्री अमित शाह ने अगले एक साल में पाकिस्तान बांग्लादेश सीमा को अभेद्य बनाए जाने की घोषणा की है, लेकिन खतरा नेपाल भारत की खुली सीमा पर भी कम नहीं है क्योंकि चीन नेपाल बॉर्डर से भारत पर नजर रख रहा है। उत्तराखंड में लीपूपास तक सड़क बनाये जाने से भारत की चीन सीमा तक सुरक्षा मजबूत होने से चीन ने नेपाल को आगे कर कूटनीति का दांव खेला है।
नए नक्शे बनाकर नेपाल की सरकार भारत को अब आंखे दिखा रही है। बात यहीं खत्म नहीं हो जाती, पिछले कुछ महीनों से नेपाल भारत सीमा पर चीन की कई और भी हरकतें सामने आई हैं, जिसमे नेपाल को एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
नेपाल ने लगाए चीनी थर्मल कैमरे
जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड से लगी भारत नेपाल पूरी सीमा पर नेपाल ने निगरानी के लिए थर्मल कैमरे लगा दिए हैं, जिसमे चीन उसे मदद कर रहा है। एक थर्मल कैमरे से भारत के भीतर वो दस किमी की गतिविधियों को कैद कर सकेगा। उत्तराखंड में करीब तीन सौ किमी की भारत नेपाल की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा है,भारत ने यहां सीमा सशस्त्र बल तैनात की हुई है। अब नेपाल भी इस सीमा पर अपनी चौकसी मजबूत करने जा रहा है। इसी क्रम में गड्ढा चौकी से धारचूला से आगे कालापानी इलाके तक नेपाल सशस्त्र प्रहरी की 106 बॉर्डर आउट पोस्ट बनाने जा रहा है। इनमें हर चौकी में 35 नेपाली सैनिक और एक निरीक्षक तैनात किया गया है।
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नाइटविजन थर्मल पॉवरफुल कैमरे से निगरानी
इन चौकियों में नाईट विजन थर्मल पावरफुल कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनकी सीधी निगरानी जुल्लाघाट में एक निगरानी रूम में होगी। खास बात ये है कि इन सभी पोस्ट पर लगने वाले थर्मल कैमरों के लिए, अत्याधुनिक तकनीक चीन द्वारा मुहैय्या करवायी गयी है। जानकारी के मुताबिक, कैमरों को संचालित करने के लिए इंटरनेट सिस्टम भी चीन द्वारा ही दिया गया है। इसके लिए बाकायदा दोनों देशों के बीच एक समझौता भी हुआ है।
भारत के लिए क्यों है चिता का विषय
भारत के लिए चिंता वाली बात ये हो गयी है कि भारत नेपाल की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी में चीन की घुसपैठ हो गई है एक डिवाइस भी भारत की सीमा की सभी सूचनाएं नेपाल के रास्ते चीन पहुंचने में सेकंड भी नहीं लगने हैं। यानि सीधे-सीधे चीन अपनी तकनीक के सहारे भारत पर निगरानी रखेगा। अब सवाल ये भी है कि नेपाल ने भारत के बजाय इस योजना पर काम करने के लिए चीन से ही क्यों मदद मांगी? माना जाता है कि इसमें नेपाल से ज्यादा चीन की रुचि है, क्योंकि वो किसी न किसी बहाने से भारत नेपाल खुली सीमा पर आकर बैठना चाहता है।
मालूम हो कि भारत नेपाल सीमा पर पिलर विवाद नो मैन्स लैंड पर नेपालियों के कब्जे के विवाद पहले से चर्चा के केंद्र में है।
उत्तराखंड से लगी भारत नेपाल सीमा पर चीन फिर से हरकत कर रहा है। नेपाल पूरी सीमा पर निगरानी के लिए थर्मल कैमरे लगा रहा है जिसमे चीन उसे मदद कर रहा है। एक थर्मल कैमरे से भारत के भीतर वो दस किमी की गतिविधियों को कैद कर सकेगा।
बीओपी भी स्थापित किया
नेपाल ने न सिर्फ बॉर्डर पर कैमरे लगाए हैं, बल्कि ताज़ा सीमा विवाद के बाद छंगरु में सीमा चौकी, जौलजीवी झूलाघाट के सामने लाली और पंचेश्वर बांध परियोजना स्थल के पास भी बीओपी स्थापित कर दी है। सवाल ये उठता है कि नेपाल को भारत से क्या खतरा हो गया जबकि भारत उसकी हर जरूरत को पूरा करता है। मालूम हो कि भारत नेपाल सीमा पर पिलर विवाद,नो मैन्स लैंड पर नेपालियों के कब्जे के विवाद पहले से चर्चा के केंद्र में है। भारत नेपाल खुली सीमा अब पहले की तरह सुरक्षित नहीं रही बॉर्डर को तारबाड़ से बांधना जरूरी समझा जा रहा है। जैसा कि बांग्लादेश पाकिस्तान भूटान की सीमा पर किया गया है।
परन्तु भारत सरकार इस बारे में अभी तक संजीदा नहीं हुई है हाल ही में नेपाल ने भारत से आने वाले वाहनों पर भारी कर (भन्सार) भी लगा दिए हैं, इसके अलावा नेपाल में भारतीय सामान लाने पर भी कर वसूला जिसे लेकर नेपाल में काम करने वाले भारतीयों में गुस्सा है। बहरहाल नेपाल में चीन किसी न किसी बहाने अपनी दखलंदाजी बढ़ा रहा है जो कि कूटनीतिक दृष्टि से भारत की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है।

















