भारत-नेपाल सीमा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बिहार सरकार ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। 21 मार्च को जिला समाहरणालय, किशनगंज में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने साफ शब्दों में निर्देश दिया कि सीमा पर किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ड्रग्स तस्करी, मानव तस्करी, नकली नोट और साइबर अपराध जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई का खाका खींचते हुए उन्होंने अधिकारियों को “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाने को कहा।
बैठक में डीजीपी विनय कुमार, पूर्णिया प्रमंडल के आयुक्त, अपर मुख्य सचिव गृह विभाग अरविंद चौधरी, डीजी विवेकानंद, किशनगंज के जिलाधिकारी विशाल राज, पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार, अररिया के एसपी जितेन्द्र सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक का फोकस साफ था। सीमा पार से फैल रहे अपराध नेटवर्क को जड़ से खत्म करना।
मुख्य सचिव ने पिछले निर्देशों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को दो टूक संदेश दिया कि बॉर्डर पर “पूर्ण सख्ती” ही एकमात्र विकल्प है। खास तौर पर ड्रग्स और नारकोटिक्स की तस्करी पर उन्होंने गंभीर चिंता जताई और पुलिस को इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए आक्रामक अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नो-मेंस लैंड पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण तत्काल हटाया जाए और इसकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। मजहबी अतिक्रमण के मुद्दे पर भी सरकार का रुख संतुलित लेकिन सख्त दिखा। मुख्य सचिव ने कहा कि बॉर्डर पर बने अतिक्रमित मजहबी ढांचों को हटाने की कार्रवाई संवेदनशीलता और स्थानीय संस्कृति को ध्यान में रखते हुए ही की जाए, ताकि कानून व्यवस्था प्रभावित न हो लेकिन अवैध कब्जे भी समाप्त हों। नेपाल में हाल के घटनाक्रम और पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों को देखते हुए उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया। “हर हाल में कानून-व्यवस्था कायम रहनी चाहिए,” यह कहते हुए उन्होंने सीमा पर चौकसी बढ़ाने पर जोर दिया।
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साइबर अपराध की समीक्षा
डीजीपी विनय कुमार ने समीक्षा के दौरान साइबर अपराध को लेकर भी चेताया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में साइबर ठगी के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, इसलिए इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करना बेहद जरूरी है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सिविल सोसाइटी और प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाकर सूचना तंत्र को धारदार बनाने पर उन्होंने जोर दिया। मानव तस्करी, ड्रग्स सप्लाई चेन और नकली नोट गिरोहों पर भी डीजीपी ने कड़ा एक्शन प्लान तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, “सिर्फ कार्रवाई नहीं, नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना लक्ष्य होना चाहिए।”
बैठक के दौरान किशनगंज और अररिया के जिलाधिकारियों ने अपने-अपने जिलों की प्रगति रिपोर्ट प्रेजेंटेशन के जरिए रखी। मुख्य सचिव ने भारत-नेपाल सीमा पर क्षतिग्रस्त पिलरों को तय समय सीमा के भीतर दुरुस्त कराने का निर्देश देते हुए कहा कि सीमा की स्पष्ट पहचान सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों ने भी जमीनी स्तर पर आ रही चुनौतियों और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को बैठक में रखा, जिस पर सरकार ने त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया। कुल मिलाकर, इस हाई-लेवल बैठक ने साफ कर दिया है कि अब भारत-नेपाल सीमा पर अपराध के हर नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार की तैयारी है। प्रशासनिक और पुलिस महकमे को सख्त निर्देश मिल चुके हैं। अब देखना यह है कि जमीनी स्तर पर यह सख्ती कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से नजर आती है।

















