गत 12 अप्रैल को संघ शताब्दी के अवसर पर होशियारपुर (पंजाब) में ‘प्रमुखजन गोष्ठी’ आयोजित हुई। इसमें शिक्षा, सामाजिक सेवा, प्रबंधन, उद्योग, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक क्षेत्र से जुड़े प्रमुखजन की उल्लेखनीय सहभागिता रही। लगभग 300 गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक महत्वपूर्ण वैचारिक संगोष्ठी का स्वरूप प्रदान किया।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य श्री इंद्रेश कुमार। उन्होंने भगत सिंह, सुखदेव थापर, शिवराम राजगुरु तथा अशफाक उल्ला खां जैसे महान क्रांतिकारियों का स्मरण करते हुए उनके त्याग और राष्ट्रनिष्ठा को प्रेरणास्रोत बताया। सामाजिक समरसता पर बल देते हुए उन्होंने छुआछूत को सामाजिक एवं मानसिक रोग बताया और इसे समाप्त करने के लिए जन-जागरूकता का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि नशा शरीर, मन और बुद्धि को नष्ट करता है, अतः नशा मुक्त भारत के निर्माण हेतु सभी को आगे आना होगा। वर्तमान वैश्विक संघर्ष की स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारत के बुद्धिजीवियों को विश्व में शांति और सद्भाव स्थापित करने की जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘पंच परिवर्तन’ केवल वैचारिक विषय नहीं, बल्कि एक जीवन पद्धति है, जिसे अपनाकर समाज में स्थायी एवं सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में जिज्ञासा समाधान सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित प्रमुखजन ने अपने प्रश्न मुख्य वक्ता के समक्ष रखे और उनका संतोषजनक समाधान प्राप्त किया। डी.ए.वी. कॉलेज मैनेजिंग कमेटी, होशियारपुर के अध्यक्ष और मुख्य अतिथि डॉ. अनूप कुमार ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्रदान करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में चरित्र निर्माण और राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने का सशक्त साधन है। अंत में जिला संघचालक श्री अशोक चोपड़ा ने सभी अतिथियों एवं शिक्षाविदों का धन्यवाद ज्ञापन किया तथा सभी को राष्ट्रोत्थान के कार्य में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। -प्रमोद कौशल

















