मजदूरों के प्रदर्शन के बहाने हिंसा के जरिए एनसीआर को हिंसा की आग में झुलसाने की खौफनाक साजिश का खुलासा हो चुका है। मुख्य आरोपी आदित्य को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने खुलासा किया है कि मई 2026 तक दिल्ली एनसीआर में अराजकता फैलाने की साजिश रची गई थी।
ये साजिश आदित्य आनंद और रूपेश राय ने कई मजदूर संगठनों के साथ मिलकर रची थी। ये संगठन मजदूर बिगुल दस्ता, नौजवान भारत सभा, एकता संघर्ष समिति, दिशा स्टूडेंट संगठन और भारतीय क्रांतिकारी मजदूर पार्टी हैं। आदित्य, रूपेश, मनीषा, सृष्टि और आकृति जैसे लोग कामगार और मध्यम वर्ग के परिवारों से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनकी बैठकें नोएडा के सेक्टर-2 फेज-2 में एक फ्लैट में होती थीं, जहां रणनीति बनाई जाती थी।
आदित्य को एसटीएफ ने दबोचा
रविवार को नोएडा पुलिस और STF ने आदित्य आनंद को गिरफ्तार कर लिया। वह सेक्टर-37 अरुण विहार में एक सेवानिवृत्त कर्नल के घर किराए पर रहता था। उसके कमरे से पुलिस को कई संदिग्ध चीजें मिलीं – साजिश से जुड़े दस्तावेज, नोटबुक, नक्शे, साहित्य, डिजिटल डिवाइस और गैजेट्स। इनमें प्रदर्शन करने की पूरी रूपरेखा लिखी हुई थी। पुलिस ने आदित्य को कोर्ट में पेश किया। जल्द ही उसे और रूपेश को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।
आदित्य आनंद एक नामी कंपनी में 1.25 लाख रुपये महीना सैलरी पर नौकरी करता था। पुलिस को जांच में पता चला कि नोएडा में रहने के दौरान उसका पुलिस वेरिफिकेशन या किरायेनामा सही तरीके से नहीं कराया गया था। उसके खिलाफ पहले कोई केस दर्ज नहीं था, लेकिन अब हिंसा से जुड़े 13 मामलों में उसे आरोपी बनाया जाएगा। पुलिस हरियाणा और बिहार पुलिस से भी इस मामले में जानकारी ले रही है।
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मजदूरों के आंदोलन को बनाया हिंसक
जांच में यह भी सामने आया कि इन लोगों ने मजदूर आंदोलनों के दौरान हिंसा भड़काने की कोशिश की। एटीएस अब आदित्य और रूपेश के पाकिस्तान हैंडलर्स तथा हाल में गिरफ्तार चार आतंकियों से संभावित लिंक की जांच कर रही है। आतंकियों ने रेकी की थी, वाहनों में आग लगाने की तस्वीरें पाकिस्तान भेजी थीं और हिंसा के दौरान झूठी पोस्ट करके लोगों को भड़काने का काम किया था। पुलिस को आशंका है कि ये सब मिलकर देश में कोई बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे।
नोएडा पुलिस इन पांचों संगठनों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। अधिकारियों ने कहा है कि हिंसा में शामिल सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अगर बाहर से फंडिंग मिलने की बात साबित हुई तो उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाएंगे। ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत भी कार्रवाई हो सकती है। पुलिस की अब तक की जांच से यह बात निकलकर आई है कि नोएडा की हिंसा में पढ़े-लिखे युवा और विभिन्न संगठनों का एक नेटवर्क सक्रिय था, जो मजदूर प्रदर्शनों का फायदा उठाकर अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा था।

















