अखिलेश यादव सहित कई नेताओं में मुस्लिम आरक्षण की मांग अलग से की है। इसके जवाब में अमित शाह ने कहा कि आप अपनी सारी टिकटें मुस्लिम उम्मीदवारों को दे दीजिये। ये तथाकथित धर्मनिर्पेक्ष दल मुस्लिमों के लिए बढ़ चढ़कर बात करते हैं, मगर जब टिकट देने की बात आती हैं तो ये दल मुस्लिमों को पिछले पायदान पर डाल देते हैं।
इन दलों द्वारा चुनावों में अपनी पार्टी के द्वारा दी गई उम्मीदवारी पर बात करें तो स्थिति बिलकुल विपरीत दिखती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 63 उम्मीदवारों में से सिर्फ चार मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया, जो कुल उम्मीदवारों की संख्या का 6.3% था। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अपने 347 उम्मीदवारों में से महज 56 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जो कुल उम्मीदवारों का सिर्फ 16.14 प्रतिशत ही था।
RJD का वोट बैंक है MY
बिहार की राष्ट्रीय जनता दल जिसका वोट बैंक ही मुस्लिम और यादव रहा है। राजद ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 24 उम्मीदवारों में से सिर्फ दो मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया जो कुल उम्मीदवारों का 8.3% प्रतिशत है। 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद ने 143 उम्मीदवारों में से सिर्फ 18 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था। यह कुल उम्मीदवारों का 12.59 प्रतिशत है। कांग्रेस पार्टी भी मुस्लिमों के लिए बड़ी बड़ी बातें करती है, मगर जब उनके लिए टिकट देने या कोई संवैधानिक पद देने की बात आती है तो पार्टी बगलें झाँकने लगती है।
कांग्रेस का मुस्लिमों के साथ भेदभाव
असम में कांग्रेस पार्टी द्वारा मुस्लिमों के साथ किये गए राजनीतिक भेदभाव पार्टी की पोल खोलने के लिए काफी है। कांग्रेस पार्टी अपने सांसद रकीबुल हुसैन के साथ किये गए राजनीतिक बेईमानी के लिए लम्बे समय तक याद किया जाएगा। रकीबुल हुसैन ने 2024 के लोकसभा के चुनाव में असम के धुबरी लोकसभा सीट से असम के बड़े मुस्लिम नेता बदरुद्दीन अजमल को देश में सर्वाधिक 1012476 मतों से हराया था। रकीबुल हुसैन के जीत का अंतर कांग्रेस पार्टी के एक तिहाई से अधिक 34 सांसद के जीत के अंतर से भी अधिक था।
मगर कांग्रेस पार्टी किसी मुस्लिम नेता को कोई बड़ा पद नहीं देती है। इतने बड़े अंतर से जीतने के बावजूद भी रकीबुल हुसैन को लोकसभा में पार्टी का नेता, उपनेता या व्हिप नियुक्त नहीं किया गया। सांसद बनने से पूर्व हुसैन असम विधानसभा में पार्टी के उपनेता थे। गाँधी परिवार ने अपने विश्वश्त गौरव गोगोई को महज 144393 मतों से जीतने के बावजूद भी पार्टी का उपनेता लोकसभा में बनाया मगर इसके सात गुना अधिक मतों से इतने बड़े नेता को हराने के बाद भी कांग्रेस पार्टी उनको नज़रअंदाज कर रही है।
मुस्लिमों ने कांग्रेस को पहचान लिया है
लेकिन अब मुस्लिम वर्ग में भी इसका प्रतिकार होना शुरू हो गया है। लोकसभा चुनाव के बाद अब मुस्लिम वर्ग ने इन दलों से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। इसका सबसे अच्छा उद्धरण खुद रकीबुल हुसैन के द्वारा खाली किये गए सीट सामगुरी सीट पर ही देखने को मिला जब उपचुनाव में उनके पुत्र तंज़ील हुसैन बड़े मतों के अंतर से यह सीट हार गए।
मुंह की खा रही कांग्रेस
लोकसभा बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी मुँह की खा रही है। इसके अलावा महाराष्ट्र स्थानीय निकायों के चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने ना सिर्फ कांग्रेस पार्टी बल्कि समाजवादी पार्टी को भी गहरा झटका दिया है। महाराष्ट्र के धुले लोकसभा सीट पर 20 मई 2024 के दिन हुए मतदान में मालेगांव सेंट्रल विधानसभा सीट का परिणाम और 20 नवंबर 2024 को विधानसभा सीट के लिए हुआ मतदान मुस्लिम मतदाताओं के बदलते रुख को परखने के लिए एक उद्धरण है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मालेगांव सेंट्रल विधानसभा की सीट पर मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस पार्टी को आईना दिखाया है।
मालेगांव सेंट्रल विधानसभा की सीट का लोकसभा और विधानसभा में परिणाम 20 मई को हुए लोकसभा चुनाव
20 नवंबर को हुए विधानसभा चुनाव
AIMIM-ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन व इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ़ महाराष्ट्र में 20 मई को हुए लोकसभा चुनाव में मालेगाव सेंट्रल विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी को कुल पड़े मतों का 96.73 मिल वहीं छह महीने बाद 20 नवंबर को हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को महज 3.13 प्रतिशत मत मिला।
भारत का मुस्लिम समाज अब समाजवादी पार्टी, कांग्रेस पार्टी सहित तमाम ऐसे दलों की असली नीयत को पहचानते हुए अब अन्य दलों को मतदान करना शुरू कर दिया है।

















