
पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से के 8 जिलों के 54 सीटों पर विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी बड़ी जीत दर्ज़ करने की और अग्रसर हैं. पश्चिम बंगाल में यह इलाका भाजपा के लिए सबसे अहम हैं. भाजपा उत्तर बंगाल क्षेत्र में अपने प्रदर्शन के बदौलत राज्य में अगली सरकार का दरवाजा खोलना चाहती हैं. जंगल महल और उत्तर बंगाल में भाजपा को अपने को 2019 में लोकसभा चुनाव में जिस प्रकार का विधानसभावार प्रदर्शन किया था उसे इस बार भी दोहराकर भाजपा अपनी योजना को साकार करना चाहती हैं.
उत्तर बंगाल में 2019, 2021 और 2024 के चुनावों में भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस पार्टी को बड़ा और गहरा झटका दिया था. यह इलाका 2011 और 2016 में तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ था जिससे भाजपा ने 2019 में तोड़ दिया था. 2011 में तृणमूल कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस पार्टी ने मिलकर इस इलाके कुल 54 सीटों में 33 सीटों पर जीत दर्ज़ किया था. इसमें कांग्रेस पार्टी 17 सीटों पर और तृणमूल कांग्रेस पार्टी 16 सीटों पर जीत दर्ज़ किया था. वही 2016 में तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस पार्टी से अलग होकर जन आंदोलन पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा और अपने सीटों की संख्या को 16 से बढाकर 24 कर लिया.
2016 में उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पार्टी गठबंधन से जन आंदोलन पार्टी से हरका बहादुर छेत्री कलिम्पोंग विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर भाजपा गठबंधन के गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के सरिता राय से 11,431 मतो से चुनाव हार गए थे. इस इलाके से 2016 में भाजपा नीत एनडीए गठबंधन ने गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़कर कुल पांच सीटों पर जीत दर्ज़ किया था. भाजपा ने 2016 में अलीपुरदुआर जिले के मदारीहाट विधानसभा और मालदा जिले की वैष्णवनगर विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज़ किया था. वही भाजपा की सहयोगी गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने कलिम्पोंग सीट के अलावे दार्जीलिंग जिले की दार्जीलिंग और कुर्सियांग विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज़ किया था.
उत्तर बंगाल पर भाजपा की निगाह 2009 के लोकसभा चुनाव से ही टिकी थी. 2009 लोकसभा चुनाव में भाजपा का पुरे देश में 1991 के बाद सबसे न्यूनतम प्रदर्शन हुआ था और पार्टी महज 116 सीट जीती थी. उस चुनाव में भी भाजपा के जसवंत सिंह इस इलाके के दार्जीलिंग लोकसभा सीट से 2.53 लाख मतो के अंतर से चुनाव जीते थे. फिर 2014 में भाजपा के सुरेन्द्रजीत सिंह अहलूवालिया ने भी लगभग दो लाख के बड़े मतो के अंतर् से चुनाव जीता था. भाजपा ने 2009 और 2014 में दार्जीलिंग लोकसभा की सीट के परिणामों से यह अंदाजा लगा लिया था की उत्तरी हिस्से के मार्फत ही पार्टी पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रवेश कर सकती हैं.
2019 के लोकसभा के चुनाव में इस इलाके के आठ लोकसभा की सीटों में सात सीटों पर जीत दर्ज़ किया था. 2019 के लोकसभा के चुनाव में भाजपा इस इलाके के केवल एक सीट मुस्लिम बाहुल्य मालदा दक्षिण लोकसभा सीट पर हारी थी. 2019 के लोकसभा के चुनाव में इस इलाके के कुल 54 विधानसभा की सीटों में 37 सीट पर भाजपा बढ़त बनाने में कामयाब हुई थी वही तृणमूल कांग्रेस पार्टी 13 सीटों पर ही बढ़त बना सकी थी. शेष चार सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने बढ़त बनाया था. वही तृणमूल कांग्रेस पार्टी 39 सीटों पर दूसरे पायदान पर रही थी और भाजपा 12 सीटों पर दूसरे पायदान पर थी. कांग्रेस पार्टी तीन सीटों पर दूसरे पायदान पर रही थी. 2024 के लोकसभा के चुनाव ने भाजपा 32 सीटों पर प्रथम पायदान पर रही थी वही तृणमूल कांग्रेस पार्टी 15 सीटों पर दूसरे पायदान पर रही थी. कांग्रेस पार्टी ने इन दोनों दलों के बीच अपना स्थान बनाते हुए 7 सीटों पर प्रथम पायदान पर रही थी.
कांग्रेस पार्टी की भी नज़र उत्तर बंगाल इलाके पर टिकी हैं. कांग्रेस इन दोनों दलों के बीच के लड़ाई में इस इलाके के तीन जिलों उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर और मालदा पर नज़र टिकी हुई है. इन तीन जिलों में कुल 27 विधानसभा की सीट हैं.. कांग्रेस पार्टी का विगत विधानसभा में एक भी विधायक नहीं था.
मुर्शिदाबाद में मुस्लिम बाहुल्य सागरदिघी विधानसभा सीट पर 2023 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी से जीते एकलौते विधायक बायरन बिस्वास को ममता बनर्जी ने अपने पार्टी में शामिल करवा लिया था. इस सीट पर 64 प्रतिशत मुस्लिम विधायक हैं. कांग्रेस पार्टी इन जिलों से अपना खाता खोलने के साथ ही बायरन बिस्वास प्रकरण में ममता बनर्जी से अपना हिसाब भी चुकता करना चाहती हैं.