खाड़ी युद्ध के कारण दुनियाभर में तेल सप्लाई का संकट खड़ा हो गया है। ये संकट न केवल एशियाई देशों में है, बल्कि इससे यूरोपीय देशों में भी तेल की किल्लत हो गई है। हालात ये हैं कि यूरोप में जेट फ्यूल की सप्लाई सिर्फ छह हफ्तों की बची है, क्योंकि ईरान से जुड़े युद्ध की वजह से तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई जल्दी बहाल नहीं हुई, तो कुछ दिनों में उड़ानें रद्द होने लगेंगी।
क्या है पूरा मामला?
फरवरी के आखिर में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ। इसके जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया, जो खाड़ी इलाके से तेल निर्यात का बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है। पिछले हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर हुआ था, लेकिन बातचीत रुक गई। पाकिस्तान की मध्यस्थता में अप्रत्यक्ष बातें अब भी चल रही हैं।
अभी तक यूरोप में जेट ईंधन की पूरी तरह कमी नहीं आई है। युद्ध शुरू होने से पहले जो शिपमेंट्स निकल चुके थे, वे पहुंचते रहे। आखिरी कार्गो भी अब यूरोप पहुंच गए हैं। लेकिन सामान्य दिनों में एयरपोर्ट्स और एयरलाइंस के पास करीब छह हफ्तों का स्टॉक रहता है। युद्ध लंबा खिंचने की वजह से अतिरिक्त रिजर्व खत्म हो रहा है। दूसरे सप्लायर्स के पास इतनी क्षमता नहीं है कि खाड़ी की जगह पूरी भर सकें।
फ्लाइट्स पर असर
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बिरोल का कहना था, “यूरोप में शायद छह हफ्ते या इतना ही जेट ईंधन बचा है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खुला, तो जल्द ही हमें सुनने को मिलेगा कि शहर ए से शहर बी की कुछ फ्लाइट्स जेट फ्यूल न होने की वजह से कैंसल हो गईं।” एयरपोर्ट्स काउंसिल इंटरनेशनल यूरोप ने भी पिछले हफ्ते ईयू के एनर्जी और ट्रांसपोर्ट कमिश्नर्स को चिट्ठी लिखी थी। उसमें कहा गया था कि अगर होर्मुज से सप्लाई नहीं शुरू हुई, तो तीन हफ्तों में कमी आ सकती है।
कुछ एयरलाइंस पहले से ही कदम उठा रही हैं। केएलएम ने अगले महीने 160 फ्लाइट्स कम करने का फैसला किया है। यह उसकी कुल शेड्यूल का 1 प्रतिशत से भी कम है। ये ज्यादातर यूरोप के अंदर की व्यस्त रूट्स हैं – जैसे एम्सटरडम के शिफोल से लंदन और डसेलडॉर्फ। इन रूट्स पर पैसेंजर्स को आसानी से दूसरी फ्लाइट्स में शिफ्ट किया जा सकता है। वजह महंगा जेट फ्यूल है, जिससे कुछ उड़ानें घाटे की हो गई हैं। ईयू और यूके में एयरलाइंस दो हफ्ते पहले नोटिस देकर शेड्यूल बदल सकती हैं।
कीमतों पर असर
ब्रेंट क्रूड ऑयल की फ्यूचर्स कीमतें युद्ध से पहले की तुलना में 30 प्रतिशत से ज्यादा ऊंची बनी हुई हैं। जेट फ्यूल महंगा होने से पेट्रोल, गैस और बिजली की कीमतें भी बढ़ रही हैं। बिरोल ने कहा कि कुछ जगहों पर यह असर ज्यादा गहरा होगा। जितना लंबा यह सिलसिला चलेगा, ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ और महंगाई पर उतना बुरा असर पड़ेगा।
















