गांधी परिवार की लम्बे समय से अपने पार्टी के नेताओं का कन्धा इस्तेमाल करके निशाना लगाने की आदत रही है। इसी नीति का शिकार पश्चिम बंगाल में अधीर रंजन चौधरी हो रहे हैं। गांधी परिवार अधीर रंजन चौधरी के बहाने ममता बनर्जी का किला ढहाने की कोशिश में है। उसे आने वाले समय में सबसे ज्यादा राजनीतिक खतरा ममता बनर्जी से है। इंडी गठबंधन के नेता जैसे अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव सहित कई नेता ममता बनर्जी को गठबंधन का नेतृत्व सौंपने की वकालत कर चुके हैं। अतएव गांधी परिवार का प्रयास है कि ममता बनर्जी को अगर राज्य विधानसभा चुनाव में कमजोर कर दिया जाए तो उन्हें गठबंधन में कोई चुनौती देने वाला नहीं बचेगा।
इस कारण कांग्रेस ने गत लोकसभा में पार्टी के नेता रहे अधीर रंजन चौधरी को उम्मीदवार बनाकर अपने को मजबूत करने के लिए कम बल्कि ममता बनर्जी को कमजोर करने की रणनीति अपनाई है। राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल में तीन चुनावी सभा की हैं और अन्य दलों से अधिक ममता बनर्जी पर राजनीतिक हमले किए हैं। इस परिवार को इसलिए भी ममता बनर्जी से नाराजगी है क्योंकि वह गांधी परिवार को सजदा नहीं करती हैं। अभी हाल ही में दिल्ली विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने कांग्रेस पार्टी के बदले आम आदमी पार्टी को अपना समर्थन जारी किया था। ममता बनर्जी के कारण अखिलेश यादव सहित कई दलों ने आम आदमी पार्टी को समर्थन कर दिया था। इस कारण गांधी परिवार के निशाने पर ममता बनर्जी हमेशा ही रहती हैं।
सागरदिघी का भी हिसाब लेना है
गांधी परिवार को ममता बनर्जी से सागरदिघी का भी राजनीतिक हिसाब चुकता करना है। मुर्शिदाबाद के सागरदिघी विधानसभा सीट से कांग्रेस के निर्वाचित एकमात्र विधायक बायरन बिस्वास को ममता बनर्जी ने अपने पार्टी में शामिल करा लिया और कांग्रेस पार्टी को फिर से राज्य विधानसभा में शून्य पर लाकर बाहर कर दिया।
गांधी परिवार अपने राजनीतिक सुविधा के मुताबिक ही किसी भी नेता का इस्तेमाल करता है। यही अधीर रंजन चौधरी 2024 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी और गांधी परिवार दोनों के निशाने पर थे। यह परिवार राहुल गांधी को बड़ी भूमिका देने के लिए अधीर रंजन चौधरी को चुनाव हरवाना चाहता था, वही ममता बनर्जी अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के कारण अधीर रंजन चौधरी को हराना चाहती थीं। इसी वास्ते ममता बनर्जी ने गुजरात से क्रिकेटर युसूफ पठान को अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ बहरामपुर से चुनाव लड़वाकर अपना यह लक्ष्य पूरा किया। अगर अधीर रंजन चौधरी लोकसभा का चुनाव जीत जाते तो उन्हें विपक्ष के नेता की कुर्सी सौंपने की नैतिक जिम्मेदारी कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार की होती। इस कारण कांग्रेस पार्टी का कोई भी बड़ा नेता लोकसभा चुनाव में चौधरी के पक्ष में प्रचार करने नही आया था।
बंगाल में कांग्रेस की स्थिति कमजोर
राज्य में कांग्रेस पार्टी की स्थिति दिन पर दिन कमजोर ही होती जा रही हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त मोर्चा के तहत कम्युनिस्ट दलों के साथ गठबंधन कर 92 सीटों पर चुनाव लड़कर 79 सीटों पर जमानत जब्त करवा ली थी। जहां 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस दो लोकसभा की सीट जीतने के साथ 14 विधानसभा की सीटों पर बढ़त बनाने में कामयाब हुई थी, वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी सिर्फ एक ही सीट जीत सकी और महज 10 विधानसभा की सीटों पर बढ़त बनाने में कामयाब रही थी। 2019 के लोकसभा चुनाव के अपेक्षा 2024 में कांग्रेस पार्टी का ग्राफ गिर गया। इसका कारण गांधी परिवार का अधीर रंजन चौधरी के प्रति दोहरा नजरिया भी था।

















