राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने हाल ही में गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक महत्वपूर्ण भाषण दिया। उन्होंने कहा कि भारत इस समय “ऐतिहासिक बदलाव” के दौर से गुजर रहा है, जहां सुरक्षा केवल सेना या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की भी जिम्मेदारी है।
जनशक्ति और मनोबल ही असली ताकत- उन्होंने समझाया कि किसी भी देश की ताकत सिर्फ उसकी सेना, हथियार या पैसे से नहीं मापी जा सकती। असली ताकत उस देश के लोगों की इच्छाशक्ति और देश के प्रति उनकी निष्ठा होती है। अगर लोगों का इरादा मजबूत हो, तो बड़ी से बड़ी चुनौती को भी हराया जा सकता है। डोभाल ने इतिहास के उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिका और सोवियत संघ जैसे शक्तिशाली देश भी अफगानिस्तान और वियतनाम जैसे क्षेत्रों में पूरी तरह सफल नहीं हो सके। इसका कारण उनकी सैन्य कमजोरी नहीं थी, बल्कि वहां के लोगों का मजबूत प्रतिरोध और आत्मविश्वास था। इससे यह साबित होता है कि किसी भी संघर्ष में मानव मनोबल बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा में नागरिक भागीदारी और युवाओं की भूमिका- उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल युद्ध या सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है। इसमें कई चीजें शामिल होती हैं, जैसे कूटनीति, तकनीक, संसाधन और मानव शक्ति। लेकिन इन सभी से भी ऊपर सबसे महत्वपूर्ण चीज देश के नागरिकों की एकजुटता और देशभक्ति है। डोभाल ने युवाओं की भूमिका को बहुत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आने वाला समय युवाओं का है, इसलिए उन्हें अनुशासन, चरित्र और मानसिक रूप से मजबूत होना चाहिए। सुरक्षा क्षेत्र में काम करने के लिए केवल ज्ञान या ताकत नहीं, बल्कि टीमवर्क और मजबूत मनोबल भी जरूरी होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा क्षेत्र में सफलता और असफलता बहुत महत्वपूर्ण होती है। यहां या तो जीत होती है या हार, बीच का कोई रास्ता नहीं होता। इसलिए इसमें पूरी लगन और जिम्मेदारी के साथ काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत में आज राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। यह बदलाव सिर्फ सरकार की वजह से नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी से संभव हो रहा है।

















