पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जंगल महल में भाजपा बड़ी बढ़त बनाती दिख रही है। इस क्षेत्र के चार जिलों पुरुलिया, बांकुरा, झारग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर भाजपा के बंगाल में राजनीतिक उछाल में अहम भूमिका निभाने जा रहे हैं। इन चारों जिलों में कुल 40 विधानसभा की सीट हैं। भाजपा को इस इलाके में जनजातीय और कुर्मी वर्ग का जोरदार समर्थन मिलता दिख रहा है। इस इलाके में जनजातीय (वनवासी) समाज लगभग 6 से 8 प्रतिशत है, वहीं कुर्मी समाज की आबादी लगभग एक तिहाई ( 30 प्रतिशत) के करीब है। इन दोनों वर्गों का भाजपा को समर्थन पार्टी को राज्य में सत्ता की दहलीज तक पहुंचाता दिख रहा है। इस इलाके में भाजपा अपने चुनावी अभियान को अच्छे से तैयार कर रही है।
जंगल महल इलाका एक समय वाम दलों का मजबूत गढ़ था और माओवादी हिंसा यहां की आम घटना थी। मगर 2011 के बाद इस इलाके के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव हुआ है। अब इस इलाके से वाम दलों का सफाया हो चुका है, वहीं अब भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच इस इलाके में राजनीतिक आधिपत्य की लड़ाई चल रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव में इस इलाके में भाजपा काफी आगे दिख रही है।

2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस इलाके में 16 सीटों पर जीत दर्ज की थी। मगर इस बार भाजपा लगभग सभी सीटों पर तृणमूल कांग्रेस से काफी आगे दिख रही है। भाजपा इस बार सभी सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। वह इस इलाके के समस्या को काफी संजीदगी से सामने ला रही है। ममता सरकार की इस इलाके पर समुचित धयान नहीं देने के कारण तृणमूल कांग्रेस के प्रति बड़ी नाराजगी है।
इस इलाके में पेय जल का अभाव , माफिया का दबदबा विशेषकर रेत खनन में काफी बड़े पैमाने पर व्याप्त हैं। इस इलाके के अनुसूचित जनजाति की जमीन पर गैर-कानूनी कब्जा, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में भ्रष्टाचार के साथ इंजीनियरिंग और शिक्षा के क्षेत्र में वनवासी समाज के युवाओं के लिए रोजगार के मौकों की कमी के कारण जंगल महल के लोग परेशान हैं। भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता घर-घर जाकर बड़े पैमाने पर लोगों से मिलकर उनकी समस्यायों के समझ कर उनके समाधान के लिए प्रयासरत हैं।

















