भुवनेश्वर । ओडिया नववर्ष के शुभ अवसर पर पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में एक महत्वपूर्ण धार्मिक बदलाव किया गया है। अब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा नए निर्मित ‘रत्न पलंक’ पर विश्राम करेंगे। यह बदलाव मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था में एक विशेष अध्याय के रूप में देखा जा रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का केंद्र बनेगा।
इस पहल को पुरी श्रीमंदिर परंपरा और जगन्नाथ मंदिर समाचार के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधि-विधान के बाद शुरू होगा नया शयन अनुष्ठान
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी ने जानकारी दी कि सभी धार्मिक अनुष्ठानों के पूर्ण होने के बाद ही नए रत्न पलंकों का उपयोग शुरू किया जाएगा। दैनिक ‘शयन’ अनुष्ठान के तहत अब तीनों देवताओं को इन नए पवित्र पलंकों पर विराजमान किया जाएगा।
उन्होंने कहा- यह प्रक्रिया पूरी तरह परंपरागत विधि-विधान के अनुसार संपन्न की जा रही है, जिससे जगन्नाथ मंदिर अनुष्ठान की गरिमा बनी रहे।
विशेष शिल्पकला से तैयार किए गए रत्न पलंक
मंदिर प्रशासन के अनुसार, तीनों रत्न पलंकों का निर्माण विशेष शिल्पकला और पारंपरिक तकनीकों के साथ किया गया है। इन पर चांदी की परत चढ़ाई गई है, जो इन्हें और भव्य बनाती है। उपयोग से पहले इनका शुद्धिकरण और प्राण-प्रतिष्ठा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।
इस पहल को रत्न पलंक निर्माण और धार्मिक शिल्पकला के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
पुराने पलंकों को संग्रहालय में किया जाएगा संरक्षित
मंदिर प्रशासन ने बताया कि पुराने रत्न पलंकों को हटाया नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखते हुए मंदिर परिसर स्थित नीलाद्रि संग्रहालय में रखा जाएगा। इनकी अंतिम व्यवस्था को लेकर मंदिर प्रबंधन समिति की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। यह कदम मंदिर विरासत संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परंपरा और आधुनिकता का संतुलित संगम
इस पहल को परंपरा और आधुनिक शिल्पकला के सुंदर समन्वय के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा को बढ़ाता है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी समृद्ध करता है। इससे जगन्नाथ मंदिर आध्यात्मिक महत्व और अधिक मजबूत होगा।











