श्री जगन्नाथ मंदिर में बड़ा बदलाव! अब ‘रत्न पलंक’ पर शयन करेंगे भगवान
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श्री जगन्नाथ मंदिर में बड़ा बदलाव! अब ‘रत्न पलंक’ पर शयन करेंगे भगवान

पुरी जगन्नाथ मंदिर में ओडिया नववर्ष पर बड़ा धार्मिक बदलाव— भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अब नए ‘रत्न पलंक’ पर करेंगे शयन। जानें इस परंपरा और अनुष्ठान का महत्व

Written byShivam DixitShivam Dixit
Apr 14, 2026, 07:09 pm IST
in भारत, ओडिशा
Orisha Puri jagannath temple Survey Done

भुवनेश्वर । ओडिया नववर्ष के शुभ अवसर पर पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में एक महत्वपूर्ण धार्मिक बदलाव किया गया है। अब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा नए निर्मित ‘रत्न पलंक’ पर विश्राम करेंगे। यह बदलाव मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था में एक विशेष अध्याय के रूप में देखा जा रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का केंद्र बनेगा।

इस पहल को पुरी श्रीमंदिर परंपरा और जगन्नाथ मंदिर समाचार के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विधि-विधान के बाद शुरू होगा नया शयन अनुष्ठान

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी ने जानकारी दी कि सभी धार्मिक अनुष्ठानों के पूर्ण होने के बाद ही नए रत्न पलंकों का उपयोग शुरू किया जाएगा। दैनिक ‘शयन’ अनुष्ठान के तहत अब तीनों देवताओं को इन नए पवित्र पलंकों पर विराजमान किया जाएगा।

उन्होंने कहा- यह प्रक्रिया पूरी तरह परंपरागत विधि-विधान के अनुसार संपन्न की जा रही है, जिससे जगन्नाथ मंदिर अनुष्ठान की गरिमा बनी रहे।

विशेष शिल्पकला से तैयार किए गए रत्न पलंक

मंदिर प्रशासन के अनुसार, तीनों रत्न पलंकों का निर्माण विशेष शिल्पकला और पारंपरिक तकनीकों के साथ किया गया है। इन पर चांदी की परत चढ़ाई गई है, जो इन्हें और भव्य बनाती है। उपयोग से पहले इनका शुद्धिकरण और प्राण-प्रतिष्ठा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।

इस पहल को रत्न पलंक निर्माण और धार्मिक शिल्पकला के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

पुराने पलंकों को संग्रहालय में किया जाएगा संरक्षित

मंदिर प्रशासन ने बताया कि पुराने रत्न पलंकों को हटाया नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखते हुए मंदिर परिसर स्थित नीलाद्रि संग्रहालय में रखा जाएगा। इनकी अंतिम व्यवस्था को लेकर मंदिर प्रबंधन समिति की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। यह कदम मंदिर विरासत संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

परंपरा और आधुनिकता का संतुलित संगम

इस पहल को परंपरा और आधुनिक शिल्पकला के सुंदर समन्वय के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा को बढ़ाता है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी समृद्ध करता है। इससे जगन्नाथ मंदिर आध्यात्मिक महत्व और अधिक मजबूत होगा।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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