ईरान से युद्ध में उलझे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैथोलिक चर्च के सर्वेसर्वा पोप लियो XIV को लेकर हैरान करने वाला बयान दिया है। ट्रंप का पोप पर यह जबानी हमला कई विशेषज्ञों को भी हैरत में डाल रहा है और वे सोच रहे हैं कि युद्ध के एन्माद में ट्रंप क्या भाषा की मर्यादाएं तो नहीं लांघ रहे हैं! दरअसल राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कल रात अपनी एक पोस्ट में पोप को ‘अपराध को लेकर कमजोर’ नजरिए वाला ही नहीं बताया बल्कि यहां तक कहा कि वे ‘विदेश नीति के लिए खतरनाक’ यानी पोप विदेश नीति के मामले में कुछ नहीं जानते। ट्रंप का यह बयान बेशक उनकी ईरान के खिलाफ कठोर नीतियों पर पोप के हाल के बयानों से उपजा लगता है।
युद्ध विरोधी पोप
पिछले साल वेटिकन में पहले अमेरिकी मूल के पोप बने पोप लियो अमेरिका-इस्राएल के ईरान पर युद्ध के मुखर आलोचक बने हुए हैं। ट्रंप का पोप के विरुद्ध दिया उक्त बयान न केवल उन सर्वोच्च कैथोलिक नेता पर व्यक्तिगत आक्षेप है, बल्कि यह अमेरिकी विदेश नीति और वैश्विक शांति के प्रयासों पर भी सवाल खड़े करता है।

जैसा पहले बताया, ट्रंप का आक्रोश पोप के हाल के युद्ध संबंधी बयानों से उपजा दिखता है। हुआ यूं था कि पिछले सप्ताह पोप लियो ने ट्रंप की ‘ईरानी सभ्यता को नष्ट’ करने की धमकी को “ट्रूली अनएक्सेप्टेबल” (नितांत अस्वीकार्य) बताते हुए सीधे सीधे ट्रंप की निंदा की थी। 70 वर्षीय पोप लियो ने वैश्विक नेताओं से युद्धोन्माद में चल रहे खूनखराबे को खत्म करने की अपील की थी, अमेरिका—ईरान युद्ध को उन्होंने ‘डेल्यूजन ऑफ ऑम्निपोटेंस’ (सर्वशक्तिमान होने का भ्रम) से उपजा युद्ध करार दिया था।
पोप की उक्त टिप्पणी साफ तौर पर ट्रंप की ओर इशारा कर रही थी। मीडिया में आईं रिपोर्ट के अनुसार, पोप ने कहा था, ”यह सर्वशक्तिमान होने का भ्रम ही है जो युद्ध को और भड़का रहा है। नेताओं को इस खूनखराबे को तुरंत बंद करना चाहिए। अमेरिका-इस्राएल का ईरान विरोधी युद्ध अमानवीय है और वैश्विक शांति के लिए खतरा है।”
इस बयान के माध्यम से पोप लियो ने शांति की अपील ही की थी। ये अपील वेटिकन से जारी उनके वैश्विक संदेशों में दर्ज है। पोप ने आगे ईरानी सभ्यता को नष्ट करने की धमकी को ‘सभ्यता-विरोधी’ बताते हुए इसे ‘नितांत अस्वीकार्य’ कहा था। उन्हें इसे मानवता के विरुद्ध बताया था।
‘अपना काम देखें पोप’
अपनी पोस्ट में ट्रंप ने आगे लिखा, ”मैं ऐसा पोप नहीं चाहता जो ईरान के न्यूक्लियर हथियार रखने को ठीक समझे। मैं ऐसा पोप नहीं चाहता जो अमेरिका के वेनेजुएला पर हमले को भयानक बताए। लियो को अपना काम संभालना चाहिए, आम समझ इस्तेमाल करनी चाहिए, रेडिकल लेफ्ट की चापलूसी बंद करनी चाहिए और एक गरिमामय पोप बनना चाहिए, न कि राजनेता।”
इसी पोस्ट में ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यदि वे व्हाइट हाउस में न होते, तो लियो वेटिकन में न पहुंचते। उन्होंने पोप को ‘क्राइम पसंद करने वाला’, ‘ज्यादा ही उदारवादी’ आदि भी कहा। हाल में एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा भी था कि वे लियो के ‘खास प्रशंसक नहीं’ हैं और उनका काम कोई ‘बहुत अच्छा नहीं’ चल रहा है।
यहां बता दें कि असल में यह विवाद राष्ट्रपति ट्रंप और कैथोलिक चर्च के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव से जुड़ा है। पोप लियो से पहले वाले पोप फ्रांसिस के साथ भी ट्रंप का रिश्ता कोई अच्छा नहीं रहा था। साल 2016 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान तत्कालीन पोप फ्रांसिस ने ट्रंप की आप्रवासन नीतियों की आलोचना की थी और उनके लिए “क्रिश्चियन नहीं हैं” कहा था। ट्रंप ने पोप फ्रांसिस को ‘डिसग्रेसफुल’ (निंदनीय) बताया था।
उनके बाद पोप बने अमेरिकी मूल के पोप लियो ने भी ट्रंप प्रशासन की कठोर आप्रवासन नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा था, ”मैं नहीं जानता कि यह प्रो-लाइफ (जीवन के हित में) है या नहीं।” उनका वह बयान ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के विरुद्ध था, जो चाक—चौबंद सीमा सुरक्षा पर जोर देती थी।
वैसे भी पोप लियो XIV का इस पद तक आना दिलचस्प रहा था। पिछले साल चुने गए पहले अमेरिकी मूल के पोप के रूप में वे वेटिकन में अमेरिकी प्रभाव को मजबूत करने का प्रतीक बने हैं। लेकिन विदेश नीति पर उनके बयानों ने ट्रंप को सदा भड़काया ही है। ट्रंप ने ईरान पर हमले को जायज ठहराया है, जबकि पोप इसे ‘ईरानी सभ्यता का विनाश’ करने की जिद जैसा मानते हैं। इसी क्रम में ट्रंप ने वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई का जिक्र किया था, पोप लियो ने

इसकी भी आलोचना की थी।
सामने आ रही दरार
अब इस ताजा विवाद के व्यापक निहितार्थ निकलने के कयास लगाए जा रहे हैं। ट्रंप का पोप पर यह जबानी हमला अमेरिकी पांथिक-राजनीतिक दरार को पटल पर ला रहा है। अमेरिका और यूरोप का लातीनी समुदाय खासतौर पर पोप की शांति की अपील का समर्थन कर रहा है। सोशल मीडिया पर #PopeLeoStrong ट्रेंड कर रहा है, जबकि ट्रंप समर्थक #MAGApope को आगे बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद अमेरिकी विदेश नीति को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि पोप वैश्विक कैथोलिक समाज की दृष्टि से एक खास महत्व रखते हैं।
पोप लियो आज से अफ्रीका की यात्रा पर हैं। उनकी यह यात्राा मुस्लिम बहुल अल्जीरिया से शुरू हुई है। माना जा रहा है कि उनका यह 11 दिवसीय दौरा शांति के संदेश को बल देगा। ट्रंप की टिप्पणियां वेटिकन-अमेरिका संबंधों में दरार डाल सकती हैं। इतिहास में पहले भी, राष्ट्रपतियों और पोपों के बीच मतभेद रहे हैं, लेकिन ट्रंप का इस तरह का प्रत्यक्ष आक्षेप सामान्य नहीं माना जा रहा है।

















