नई दिल्ली। दिग्गज प्लेबैक सिंगर पद्म विभूषण आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है।
आशा भोसले का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और वीर सावरकर से भी गहरा जुड़ाव रहा है। उनकी जीवनी स्वरस्वामिनी आशा का विमोचन भी सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने किया था। उन्हें 5 जून 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नागपुर के रेशिमबाग स्थित मुख्यालय में कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वह इसमें शामिल नहीं हो सकी थीं। उन्होंने डॉ मोहन भागवत को एक पत्र लिखा था।

इस पत्र में उन्होंने खराब स्वास्थ्य के कारण कार्यक्रम में आने में असमर्थता जताई, लेकिन संघ के कार्यों की सराहना की और उन्हें अपनी शुभकामनाएं दीं पत्र में उन्होंने लिखा- “आपके द्वारा कार्यकर्ता विकास वर्ग – द्वितीय के समापन समारोह में आमंत्रण दिए जाने के लिए मैं अत्यंत आभारी हूं। आपने मेरे घर आकर व्यक्तिगत रूप से और बाद में औपचारिक रूप से मुझे आमंत्रित किया, इसके लिए आभार। मेरी यह प्रबल इच्छा थी कि मैं संघ मुख्यालय आकर उन कार्यकर्ताओं को देखूं जो राष्ट्रसेवा के लिए स्वयं को समर्पित करने का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश, अमेरिका से लौटने के बाद अस्वस्थता के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है। डॉक्टरों ने मुझे पूर्ण विश्राम की सलाह दी है। इसलिए, सारी तैयारियां करने के बाद भी मुझे यह यात्रा भारी मन से रद्द करनी पड़ रही है।”
उन्होंने आगे लिखा- “मैंने संघ के कार्यों को लेकर अपनी शुभेच्छा और भावना पहले ही प्रकट की है। संघ स्वयंसेवक और उनका कार्य हमारे देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक बड़ी आशा और सहारा हैं। मैं संघ के कार्यों के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं और यथासंभव सहयोग का आश्वासन भी देती हूं। मेरी हार्दिक इच्छा है कि मैं शीघ्र स्वस्थ होकर आपसे व्यक्तिगत रूप से भेंट कर सकूं। आशा है कि यह शीघ्र ही संभव होगा।”
इस पत्र के उत्तर में संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आशा ताई भोसले को शीघ्र स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दीं और शीघ्र मुलाकात का आश्वासन दिया था।
वीर सावरकर के साथ जुड़ाव
मुंबई में स्वरस्वामिनी आशा के विमोचन के मौके पर आशा भोसले ने वीर सावरकर से भी अपने जुड़ाव को याद किया था।















