सुरों की मल्लिका प्रसिद्ध पार्श्वगायिका आशा भोसले नहीं रहीं। आज (12 अप्रैल 2026) मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उनका निधन हो गया। वह 92 वर्ष की थीं। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार की शाम को उन्हें बेहद थकान और सीने में संक्रमण की वजह से अस्पताल ले जाया गया था। वहां उनका इलाज चल रहा था। अस्पताल के डॉक्टर प्रतित सामदानी ने उनके निधन की पुष्टि की है। उनकी पोती ज़नै भोसले ने एक्स पर पोस्ट करके परिवार की प्राइवेसी का सम्मान करने की अपील की थी। उसमें लिखा था कि दादी को थकान और छाती के इंफेक्शन की वजह से भर्ती किया गया।
प्रधानमंत्री ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आशा भोसले के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने शोक संदेश में कहा कि भारत की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाजों में से एक, आशा भोसले जी के निधन से गहरा दुख हुआ है। दशकों तक फैली उनकी असाधारण संगीतमय यात्रा ने हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया और दुनिया भर के अनगिनत दिलों को छुआ। चाहे उनकी भावपूर्ण धुनें हों या ऊर्जा से भरपूर रचनाएं, उनकी आवाज में हमेशा एक शाश्वत चमक रही। उनके साथ मेरी जो बातचीत हुई, उसकी यादें मेरे मन में हमेशा संजोकर रहेंगी। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के साथ हैं। वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और उनके गीत लोगों के जीवन में हमेशा गूंजते रहेंगे।
80 साल के सफर का अंत
आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली जिले के गोर गांव में हुआ था। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर क्लासिकल सिंगर और एक्टर थे। जब आशा महज नौ साल की थीं, तब पिता का देहांत हो गया था। माँ का नाम शेवंती था। पिता के देहांत के बाद उनका परिवार पहले कोल्हापुर फिर मुंबई आ गया था। आशा ताई की बड़ी बहन लता ताई भी गायिका थीं।
आशा का करियर आठ दशक से ज्यादा लंबा रहा। उन्होंने 12,000 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए। 20 भारतीय और विदेशी भाषाओं में गाया। उनकी आवाज़ सोप्रानो थी और वे हर तरह के गाने गा लेती थीं – फिल्मी, पॉप, क्लासिकल, भजन, ग़ज़ल, लोक, कव्वाली और रवींद्र संगीत तक।
माझा बाल से हुई थी शुरुआत
बॉलीवुड के स्वर्णिम दिनों में आशा ताई लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार, मुकेश और मन्ना डे जैसे दिग्गजों के साथ गाती रहीं। शुरुआत मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ (1943) से हुई, जिसमें ‘चला चला नव बाला’ गाया। हिंदी में पहला गाना ‘सावन आया’ (‘चुनरिया’, 1948 ) था। वहीं पहला सोलो यानी एकल गाना ‘रात की रानी’ (1949) में।
ओ.पी. नैय्यर के साथ ‘आओ हुजूर तुमको’, आर.डी. बर्मन के साथ ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’, ए.आर. रहमान के साथ ‘तन्हा तन्हा’ और ‘रंगीला रे’, अदनान सामी के साथ ‘कभी तो नज़र मिलाओ’ जैसे गाने उनके करियर के बड़े हिट रहे। ‘पिया तू अब तो आजा’ और ‘ये मेरा दिल’ आज भी लोग गुनगुनाते हैं।















