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कार्रवाई से डरे घुसपैठिए

किशनगंज जिले में नेपाल और बांग्लादेश की सीमा पर 'नो मैन्स लैंड' को अतिक्रमण-मुक्त कराने के लिए होने लगी कार्रवाई। ऐसा माना जा रहा है कि यह कदम बांग्लादेशी घुसपैठ को रोकने में मदद करेगा। इस कार्रवाई से उन तत्वों में है दहशत, जो यह मानते ही नहीं हैं कि भारत में हो रही है घुसपैठ

Written byसुबोध कुमार साहासुबोध कुमार साहा
Apr 8, 2026, 08:09 pm IST
inबिहार
नेपाल सीमा पर 'नो मैन्स लैंड' पर बुलडोजर कार्रवाई

नेपाल सीमा पर 'नो मैन्स लैंड' पर बुलडोजर कार्रवाई

इन दिनों बिहार के किशनगंज जिले में नेपाल और बांग्लादेश की सीमा पर ‘नो मैन्स लैंड’ (दो देशों के बीच की सीमा निर्धारित करने के लिए जो भूमि छोड़ी जाती है) को अतिक्रमण-मुक्त किया जा रहा है। बता दें कि किशनगंज बिहार का एक मात्र मुस्लिम-बहुल जिला है। इस जिले की सीमा नेपाल और बांग्लादेश से लगती है। जिले में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है। इसका एक कारण बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ है।

माना जाता है कि इन घुसपैठियों को भारत लाने के पीछे एक बड़ा गिरोह है। इस गिरोह को स्थानीय मदद मिलती है। घुसपैठियों के मददगार उन्हें भारत की सीमा में लाकर कहीं भी बसा देते हैं। इन लोगों ने ‘नो मैन्स लैंड’ को भी नहीं छोड़ा है। जहां कोई नहीं रह सकता, वहां भी इन घुसपैठियों को बसा दिया जाता है। यह सिलसिला बहुत पुराना है। इसलिए कई संगठन इन घुसपैठियों को रोकने और ‘नो मैन्स लैंड’ को अतिक्रमण-मुक्त कराने की मांग करते रहे हैं। लेकिन उनकी मांग पर अभी तक कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया। लेकिन हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे पर आए और उन्होंने सुरक्षाबलों, जांच एजेंसियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर क्षेत्र की समस्याओं को समझा और उनके समाधान के निर्देश दिए।

अब इसका असर दिखने लगा है। उनके निर्देश पर किशनगंज जिला प्रशासन ने नेपाल सीमा से सटे ‘नो मेंस लैंड’ क्षेत्र में अवैध निर्माणों को ढहाने का काम शुरू किया है। किशनगंज के जिलाधिकारी विशाल राज के अनुसार, “नेपाल सीमा से लगे छह स्थानों पर चिन्हित करीब 20 अवैध निर्माणों को हटाया गया है।” उन्होंने यह भी बताया, “सीमा क्षेत्र में घुसपैठ की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान के लिए अलग से रणनीति बनाई जा रही है। प्रशासन, सीमा सुरक्षा बल और अन्य एजेंसियां मिलकर संयुक्त कार्ययोजना तैयार कर रही हैं, ताकि सीमा से सटे संवेदनशील इलाकों में निगरानी और नियंत्रण मजबूत किया जा सके।”

लोग मान रहे हैं कि यह केवल अवैध निर्माण की तोड़-फोड़ नहीं है, बल्कि घुसपैठ कराने वाले गिरोह को तोड़ने की कार्रवाई है। लोगों का कहना है कि किशनगंज और अररिया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध बस्तियों का सफाया सिलीगुड़ी गलियारा को सुरक्षित बनाने के लिए अनिवार्य है।

बता दें कि कटिहार-किशनगंज के पास का हिस्सा बांग्लादेश के करीब होने के कारण यह क्षेत्र हमेशा से संवेदनशील रहा है। किशनगंज बिहार का एकमात्र ऐसा जिला है, जो नेपाल की खुली सीमा के साथ-साथ बांग्लादेश के भी बेहद करीब स्थित है। नेपाल से करीब 114 किलोमीटर लंबी खुली सीमा इस क्षेत्र को अत्यंत संवेदनशील बनाती है, क्योंकि यहां लोगों का आवागमन अपेक्षाकृत आसान है।इस क्षेत्र में मौजूद ‘चिकन नेक’ देश के लिए जीवनरेखा के समान है। यह संकीर्ण भूभाग पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। यदि इस क्षेत्र में किसी प्रकार की अस्थिरता उत्पन्न होती है, तो इसका प्रभाव केवल सीमांचल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत पर पड़ सकता है। इसलिए ‘नो मैन्स लैंड’ को सुरक्षित और अतिक्रमण-मुक्त रखना जरूरी है।

सीमावर्ती गांवों में कई स्थान ऐसे हैं, जहां खेत की मेड़ के बाद ही अंतरराष्ट्रीय सीमा शुरू हो जाती है और कई जगहों पर ‘फेंसिंग’ भी नहीं है। काकरोदा बीओपी के आसपास कुछ बस्तियां सीमा से महज 100–200 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले वर्षों में इस क्षेत्र में आबादी तेजी से बढ़ी है, जिससे निगरानी और पेट्रोलिंग चुनौतीपूर्ण हो गई है।

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि सीमा के अत्यधिक निकट बसावट होने से निगरानी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 10 किलोमीटर के भीतर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई केवल भूमि प्रबंधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम है। इससे संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण, अवैध निर्माण पर रोक और सीमा सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी। जनसांख्यिकी का अध्ययन करने हेतु उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा है।

न केवल ‘नो मैन्स लैंड’, बल्कि अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में भी मकानों, मस्जिदों और मदरसों का तेजी से निर्माण हुआ है। माना जाता है कि इन निर्माणों के लिए देश-विदेशी कई संगठन पैसा उपलब्ध कराते हैं। इसलिए पूरा क्षेत्र बेहद संवेदनशील हो चुका है। इन सबको देखते हुए ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने को कहा है। बता दें कि यह मुद्दा बिहार विघानसभा चुनाव के दौरान भी जोर-शोर से उठा था। उस समय भी भाजपा ने लोगों से वादा किया था कि सरकार बनने के बाद घुसपैठियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। अमित शाह उसी वायदे को पूरा कर रहे हैं। इसलिए स्थानीय लोगों में एक नई आस जगी है।
प्रस्तुति : सुबोध कुमार साहा, किशनगंज से

Topics: संवेदनशील क्षेत्रबुलडोजर कार्रवाईसिलीगुड़ी गलियाराअवैध निर्माणघुसपैठिएराष्ट्रीय सुरक्षापाञ्चजन्य विशेषसीमा सुरक्षा तंत्रमुस्लिम-बहुल जिलाचिकन नेकअतिक्रमण मुक्तजनसांख्यिकी
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