पाकिस्तान में ट्रांसजेन्डर ऐक्टिविस्ट के दावे से मची खलबली: उभरकर आया दर्द भरा इतिहास
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पाकिस्तान में ट्रांसजेन्डर ऐक्टिविस्ट के दावे से मची खलबली: उभरकर आया दर्द भरा इतिहास

पाकिस्तानी ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हिना बलोच ने दावा किया कि पाकिस्तान के 80% लोग गे और 20% बाइसेक्शुअल हैं। ख्वाजा सिरा समुदाय पर अत्याचार, मुगल काल का इतिहास और 2018 के कानून के बाद बढ़ती हिंसा पर विस्तार से जानिए।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Apr 7, 2026, 12:11 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
एक्टिविस्ट हिना बलोच (फोटो साभार: एक्स)

एक्टिविस्ट हिना बलोच (फोटो साभार: एक्स)

हिजड़ा अर्थात ख्वाजासरा समुदाय के लोग! हिजड़ा शब्द से हम सभी परिचित हैं। इस शब्द से अर्थ ऐसे व्यक्ति से लिया जाता है, जिसके लिंग का निर्धारण न हो। जो न ही महिला है और न ही पुरुष। हिजड़ा शब्द के मूल में जाते हैं तो ऐसा कहा जाता है कि यह शब्द अरबी भाषा के हिज़्र से आया। और हिज़्र का अर्थ है “कबीला छोड़ना”, “अलग हो जाना या फिर पलायन करना। तो हिजड़ा का अर्थ हुआ कि ऐसे लोग जो शारीरिक रूप से तो पुरुष थे, मगर उन्होंने पुरुष वाले कामों को छोड़ दिया। रेखता के अनुसार, हिजड़ा शब्द का अर्थ ऐसा व्यक्ति न ही पुरुष है और न ही स्त्री। ऐसा व्यक्ति जो वीर नहीं हो अर्थात बुजदिल हो, जो बच्चे पैदा न कर सके।

अभी हाल ही में पाकिस्तान की एक ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता हिना बलोच ने पाकिस्तान में हिजड़ा या ख्वाजासरा समुदाय के विषय में काफी बातें बताई हैं। ख्वाजासरा से अर्थ ऐसे आदमियों से है, जिनके यौनांग काट दिए जाते थे या फिर जो पैदायशी किसी लैंगिक विसंगति का शिकार होते थे।

हिजड़ों को हरम में रखते थे मुगल

मुगल काल में इन्हें हरम की सेवा में रखा जाता था। मुगल काल में जब से हरम का आरंभ हुआ, उसके बाद इस समुदाय का काम हरम की औरतों पर निगरानी रखना हो गया। भारत में मुगल काल को लेकर जो भी फिल्में बनी हैं, उनमें यह देखा जा सकता है। ख्वाजासरा समुदाय में ऐसे भी गुलाम लोग हुआ करते थे, जिन्हें जबरन ऐसा बना दिया जाता था। चूंकि वे यौन रूप से अक्षम होते थे, इसलिए शहजादियों की ओर से निश्चिंतता रहती थी। परंतु तब से लेकर अब तक समय बदल चुका है। जहां पहले ख्वाजासरा समुदाय को मुगल काल में शाही दरबारों और किलों में जगह दी जाती थी, फिर चाहे वे ऐसे लोग हों, जिन्हें जबरन बनाया गया हो या फिर स्वाभाविक प्रवृत्ति वाले हों, तो वहीं पाकिस्तान में अब इस समुदाय के साथ तमाम भेदभाव हो रहे हैं।

पाकिस्तान में ख्वाजासरा समुदाय पर अत्याचार

हिना बलोच ने उन्हीं अत्याचारों के विषय में बात की है। उन्होंने खुलकर बताया है कि पाकिस्तान में किस तरह से इस समुदाय के लोगों के साथ शोषण की घटनाएं हो रही है। हिना ने बताया कि चूंकि उनके परिवार के लोग काफी उदार विचारों के थे तो उनके पालनपोषण में बहुत भेदभाव नहीं लगा। मगर फिर भी उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। दरअसल, उनके अनुसार पाकिस्तान में पहले ऐसा था कि केवल आदमी और औरत दो ही लैंगिक पहचानें थीं और इस समुदाय की कोई कानूनी पहचान नहीं थी, कानूनी अस्तित्व नहीं था। इसलिए इस समुदाय के लोगों के साथ दुर्व्यवहार, हिंसा और यहाँ तक कि हत्या तक से कोई फर्क नहीं पड़ता था।

मगर पाकिस्तान में ख्वाजा सिरा लोगों को वर्ष 2009-2010 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कानूनी पहचान मिलनी आरंभ हुई। इसके बाद वर्ष 2018 में मई में पाकिस्तान की संसद में ट्रांसजेंडर पर्सन (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम पारित किया गया। और उसके बाद ही उन्हें अपना नाम और लिंग को अपने पासपोर्ट तथा अन्य कानूनी दस्तावेजों में दर्ज करने का कानूनी अधिकार मिला।

हिना के केवल एक ही बयान पर चर्चा क्यों?

हिना ने पूरे ख्वाजा सिरा समुदाय की तमाम समस्याओं पर बात की और यह भी बताया कि कैसे उन्हें अपने माशरे में भेदभाव और पक्षपात का सामना करना पड़ रहा था। कैसे उस समुदाय के पास केवल तीन ही विकल्प थे या फिर यह कहें कि केवल ये विकल्प ही स्वीकार्य थे। इन तीनों से इतर पाकिस्तानी समाज इन लोगों को देख ही नहीं सकता था। एक तरीका तो यह था कि वे लोग सड़कों पर भीख मांगे। दूसरा है कि वे लोग यौन कार्य करें। हिना ने कहा कि ये काम कई ख्वाजा सरा अपने मन से करते हैं तो कई विवशता से। अपने मन से करने की उनकी विवशता यह है कि इसके अलावा उनके पास कोई काम है ही नहीं। कई ऐसे भी इनमें लोग हैं, जो यह काम नहीं करना चाहते हैं, मगर उन्हें मजबूरी में यह करना पड़ता है। और तीसरा है नाचना। और यह नाच उन्हें करना होता है दावतों आदि में आदमियों के लिए।

हिना का कहना था कि जब भी कोई ख्वाजा सरा नौकरी जैसे कि स्कूल में टीचर, सिक्युरिटी गार्ड आदि का काम करना चाहता है तो सबसे पहले तो उसे यह अवसर दिया ही नहीं दिया जाएगा।

पाकिस्तान में 80% आबादी समलैंगिक

हिना के जिस बयान पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उसमें उन्होनें यह कहा है कि पाकिस्तान में लगभग 80% लोग गे अर्थात समलैंगिक हैं और शेष 20% बायसेक्शुअल हैं। और उन्होनें यह भी कहा कि उन्हें यह लगता है कि आखिर पाकिस्तान इस सच्चाई को स्वीकार क्यों नहीं कर रहा है।

ख्वाजा सरा लोगों की इज्जत के नाम पर हत्याएं

हिना ने बताया कि कैसे पश्चिम के दुष्प्रचार के चलते पाकिस्तान में ख्वाजा सरा लोगों की हत्याएं भी हुईं। उनका कहना था कि जब 2018 में ऐसे लोगों के अधिकार के लिए कानून पारित हुआ। और इसके बाद कुछ राइटविंगर यूट्यूबर्स ने पश्चिमी राइटविंगर्स के कहे शब्दों के अनुसार इस समुदाय के प्रति विष उगलना आरंभ कर दिया। और इसके चलते इस समुदाय के लोगों को एक दूसरी प्रकार की हिंसा का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि पहले जब तक इन लोगों को कानूनी पहचान नहीं मिली थी, तब तक इन्हें मारना और छूट जाना आसान था, क्योंकि या तो इन्हें परिवार वाले ही अपनी इज्जत की खातिर मार डालते थे या फिर उनके यौन साथी।

पश्चिमी प्रोपोगैंडा के बाद तीन ख्वाजासारों की हत्या

मगर इस कानून के पारित होने के बाद और पश्चिमी प्रोपोगैंडा के बाद करांची में तीन ख्वाजा सारों की हत्या हुई और इन लोगों ने पुलिस पर दबाव डालकर कम से कम एक के हत्यारों को तो पकड़वाने में सफलता पाई। जब उससे पूछा गया कि उसने उसे क्यों मारा तो उस हत्यारे का कहना था कि वह इन लोगों के खिलाफ जिहाद कर रहा है। और इसे सुनकर पूरे इस समुदाय के दिलों में दहशत हो गई थी। उसने कहा कि इस समुदाय के खिलाफ जिहाद करना होगा क्योंकि ये लोग घृणित हैं और इस्लाम में केवल दो ही लिंग हैं और कुछ नहीं।

हालांकि वह आदमी उस मारे गए ख्वाजा सरा का पूर्व प्रेमी ही था, मगर अब उसके पास एक और लक्ष्य था कि उसने अल्लाह के लिए किया। और उसके बाद उसे लोगों से समर्थन मिलने लगा और उसके पक्ष में ट्वीट्स भी आने लगे। और ये लेख आने लगे कि इस व्यक्ति को जमानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए। 2022 में पाकिस्तान ऐसा देश बना, जो ट्रांसजेन्डर्स लोगों के प्रति हिंसा में सबसे शीर्ष पर था और उसके बाद ही वहाँ पर ट्रांस प्राइड आदि अभियानों का आरंभ हुआ।

उसके बाद की भी भयावह घटनाएं हैं कि कैसे उन्हें अपना मुल्क छोड़कर भागना पड़ा और कैसे उन्होनें ब्रिटेन में शरणार्थी शिविर में शरण ली। और उन्होनें उसके बाद की अनिश्चितता पर भी लगातार बात की। पाकिस्तान में उपजी असहिष्णुता की भी बात की, परंतु यह दुर्भाग्य है कि एक वक्तव्य के कारण यह इंटरव्यू चर्चित हो गया, परंतु जो मूल मुद्दे और मूल समस्याएं हिना ने उठाईं, वह नेपथ्य में चली गईं।

Topics: हिना बलोच इंटरव्यूमुगल काल हिजड़ा हरमHina Baloch80% of Pakistan is GayKhwaja Sira Community in PakistanHijra‘हिजड़ा’Transgender in Pakistanहिना बलोचHina Baloch Interview80% पाकिस्तान गेHijras in the Mughal-era Haremख्वाजा सिरा समुदाय पाकिस्तानट्रांसजेंडर पाकिस्तान
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