भारत लगातार अपनी रक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत करता जा रहा है। इसमें सरकारी कंपनियों के साथ ही निजी कंपनियां बड़ी भूमिका निभा रही हैं। इसी क्रम में भारतीय सेना को गुजरात की एक डीप-टेक ड्रोन कंपनी ने सैकड़ों कामिकाज़े ड्रोन डिलीवर कर दिए हैं। ये डिलीवरी इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट रूट के तहत हुई है, जो सेना की तुरंत जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनाया जाता है।
कौन है ड्रोन डिलीवर करने वाली कंपनी
ये कंपनी सूरत स्थित कंपनी InsideFPV ने दिसंबर 2025 में रक्षा मंत्रालय के साथ 10 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। सिर्फ दो महीने में कंपनी ने पूरा ऑर्डर पूरा कर दिया और ड्रोन उत्तरी कमांड को भेज दिए। हालांकि सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए ड्रोन की सही संख्या नहीं बताई गई है, लेकिन खबरों में इसे “सैकड़ों” बताया गया है।
कंपनी मुख्य रूप से FPV ड्रोन बनाती है, जिन्हें स्पेशल गॉगल्स से लाइव वीडियो फीड देखकर उड़ाया जाता है। ये कामिकाज़े ड्रोन भी उसी टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं।
ड्रोन की खासियतें
ये ड्रोन खासतौर पर भारत के कठिन मौसम और इलाकों के लिए बनाए गए हैं। -35 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी ये बिना किसी समस्या के काम करते हैं। GPS-denied एरिया यानी जहां सैटेलाइट सिग्नल नहीं पहुंचता, वहां भी ये प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।
ड्रोन में ऑटोमैटिक नेविगेशन की सुविधा है। साथ ही मल्टी-स्टेप सेफ्टी मैकेनिज्म और डेटोनेशन ट्रिगर भी लगा है, ताकि इस्तेमाल करते समय कोई गलती न हो। कंपनी के CEO अर्थ चौधरी ने बताया, “हमारे कामिकाज़े और FPV सिस्टम भारत के सबसे मुश्किल इलाकों के लिए डिजाइन किए गए हैं, जहां तापमान बहुत कम होता है।”
इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट का मतलब
रक्षा मंत्रालय ने आपातकालीन रूट से ये कॉन्ट्रैक्ट दिया, ताकि जल्दी से जल्दी सेना को ये सिस्टम मिल जाएं। आमतौर पर बड़े डिफेंस डील में सालों लग जाते हैं, लेकिन यहां सिर्फ दो महीने में डिलीवरी हो गई। ये दिखाता है कि घरेलू कंपनियां अब तेजी से और बड़ी मात्रा में प्रोडक्शन कर सकती हैं।
InsideFPV ने बताया कि ये ड्रोन कामिकाज़े अटैक के लिए हैं। ये दुश्मन के टारगेट को सटीक तरीके से निशाना बना सकते हैं और खुद को भी नष्ट कर देते हैं। कंपनी अब अपनी मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा करने के लिए 20,000 स्क्वायर फीट की नई फैसिलिटी में शिफ्ट हो रही है, ताकि भविष्य में और बड़े ऑर्डर हैंडल किए जा सकें।
क्यों जरूरी हैं ये ड्रोन
आजकल युद्ध में ड्रोन की भूमिका बहुत बढ़ गई है। ये सस्ते, सटीक और बिना पायलट के काम करते हैं। भारतीय सेना इन्हें बॉर्डर पर तैनात करने की योजना बना रही है, खासकर उन इलाकों में जहां पारंपरिक हथियारों से काम करना मुश्किल होता है। InsideFPV जैसी कंपनियां अब भारतीय डिफेंस को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही हैं। पहले ज्यादातर ऐसे सिस्टम विदेश से आते थे, लेकिन अब घरेलू उत्पादन बढ़ रहा है। ये डिलीवरी उस दिशा में एक अच्छा कदम है। 10 करोड़ रुपये के इस छोटे लेकिन तेज कॉन्ट्रैक्ट ने दिखा दिया है कि भारतीय इंडस्ट्री अब सेना की तुरंत जरूरतों को पूरा करने लायक हो गई है।

















