भारत में श्रम कानूनों में बदलाव के साथ ग्रेच्युटी के नियमों में भी बड़ा सुधार किया गया है। यह बदलाव खासकर फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों (FTE) के लिए काफी फायदेमंद है। पहले किसी भी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल तक काम करना जरूरी होता था, लेकिन अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को इतना लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
फिक्स्ड-टर्म रोजगार क्या होता है- फिक्स्ड-टर्म रोजगार का मतलब है कि किसी कर्मचारी को एक तय समय के लिए नौकरी पर रखा जाता है, जैसे 1 साल या 2 साल के कॉन्ट्रैक्ट पर। पहले ऐसे कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिलती थीं। लेकिन अब नए नियमों के अनुसार, उन्हें भी वही सैलरी, छुट्टियां और अन्य लाभ मिलेंगे जो परमानेंट कर्मचारियों को मिलते हैं।
ग्रेच्युटी के नियम में क्या बदलाव हुआ- अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी सिर्फ 1 साल की नौकरी पूरी करने के बाद ग्रेच्युटी पाने के हकदार हो जाएंगे। उदाहरण के लिए, अगर आपने 1 साल 3 महीने काम किया है, तो आपको पूरे 15 महीनों की ग्रेच्युटी मिलेगी। लेकिन अगर आपने 1 साल से कम काम किया है, तो ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी। यह नियम उन लोगों के लिए बनाया गया है जो छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स या कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं। पहले उन्हें 5 साल पूरे न करने के कारण ग्रेच्युटी नहीं मिलती थी। अब उन्हें भी उनके काम का फायदा मिलेगा।
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सैलरी स्ट्रक्चर में क्या बदलाव आया- नए नियम के अनुसार, आपकी बेसिक सैलरी आपके कुल CTC का कम से कम 50% होनी चाहिए। अगर भत्ते (जैसे HRA, ट्रैवल अलाउंस) ज्यादा हैं, तो उनका कुछ हिस्सा बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाएगा। इससे आपकी ग्रेच्युटी और PF दोनों बढ़ेंगे। अब कंपनियों को कर्मचारी के जाने के बाद 30-60 दिन इंतजार नहीं कराना होगा। नए नियम के अनुसार, 48 घंटे (2 दिन) के अंदर ही ग्रेच्युटी और बाकी पैसे देने होंगे।












